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US-China Politics: क्या दक्षिण एशिया में कंट्रोल चाहते हैं ट्रंप? चीन पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर कर रहे काम
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डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग (फाइल)
- फोटो : एएनई/रॉयटर्स
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अमेरिका से अच्छी खबर है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और समकक्ष मार्को रुबियो में सार्थक बात हुई है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की टीम लौटकर बड़ा होमवर्क करेगी। वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत किया कि धीरे-धीरे काफी कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन भारतीय रणनीतिकारों को अमेरिका की एक मंशा और दिखाई दे रही है। उनका अंदेशा बढ़ रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ‘दक्षिण एशिया’ में कंट्रोल चाहते हैं।
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भारतीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसी के पूर्व प्रमुख का कहना है कि इस्राइल, फलस्तीन और ईरान के बीच तनातनी में अमेरिकी रणनीतिकारों को 'दक्षिण एशिया' में अपनी कमजोरी सबसे ज्यादा खली है। एक पूर्व विदेश मंत्री नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद दक्षिणी एशिया में सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से कई बदलाव हुए। सूत्र का कहना है कि यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि दक्षिण एशिया में चीन का दखल बढ़ने से पूरे एशिया में उसका काफी प्रभुत्व बढ़ गया। चीन का यह दबदबा उसे रूस के और करीब ले जाने में मददगार साबित हुआ और चीन के सामरिक विशेषज्ञों, रणनीतिकारों, आर्थिक सलाहकारों ने मध्य एशिया की तरफ अपनी रुचि को काफी बढ़ा दिया। एक पूर्व राजनयिक कहते हैं कि भू-राजनीतिक परिस्थितियां हमेशा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्थिति को प्रभावित करती हैं। सूत्र का कहना है कि आपको याद होगा, अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी का अमेरिका में ही काफी विरोध हुआ था। अमेरिकी विशेषज्ञ भी जानना चाहते थे कि बाइडेन प्रशासन के निर्णय के बाद उन्हें क्या हासिल हुआ? राजनयिक का कहना है कि अभी कुछ दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति ने अफगानिस्तान में 'बागराम एयरबेस' पर नियंत्रण की इच्छा जताई थी।
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आपरेशन सिंदूर के बाद से अमेरिका ने बढ़ाया पाकिस्तान से प्रेम
मई 2025 से पहले वैश्विक पटल पर पाकिस्तान की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। 6-10 मई 2025 के बाद से अमेरिका का पाकिस्तान प्रेम अचानक बढ़ गया है। पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल मुनीर को राष्ट्रपति ने अमेरिका में व्हाइट हाऊस में आमंत्रित किया। इसके बाद से अमेरिका लगातार पाकिस्तान से अच्छे संबंध का राग अलाप रहा है। विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि यह तो अमेरिका पर निर्भर करता है कि वह किससे कैसा संबंध रखना चाहता है। बीच में पाकिस्तान से अमेरिकी प्रशासन के रिश्ते इतने अच्छे नहीं थे। अब राष्ट्रपति ट्रंप के दौर में इसमें गर्मजोशी आ रही है। पाकिस्तान के जनरल मुनीर उन्हें 'नोबेल पुरस्कार' देने की वकालत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की उम्मीदें बढ़ रही हैं। वायुसेना के पूर्व एयरवाइस मार्शल एनबी सिंह का कहना है कि कुछ भी अचानक नहीं होता। ट्रंप के बारे में कुछ कोई कुछ भी कहे, लेकिन मुझे लग रहा है कि वह सोच समझकर आगे बढ़ते हैं।
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अमेरिका को रूस नहीं बल्कि चीन से मिल सकती है चुनौती
अंतरराष्ट्रीय मामलों के शोधार्थी अमित मिश्रा कहते हैं कि इस समय चीन का प्रभुत्व बढ़ा है। खास बात यह है कि चीन ने बिना कोई लड़ाई लड़े अपने कद को बढ़ाया है। विश्व की अर्थव्यवस्था में चीन ने बड़ी दूरी तय की है। मिश्रा का कहना है कि अमेरिका को रूस से नहीं बल्कि आने वाले समय में चीन से बड़ी चुनौती मिलने की संभावना है। वह कहते हैं कि जिस तरह से क्षेत्रीय मामले में चीन ने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण बाद अपना तेजी से विस्तार किया है, वह अमेरिका के रणनीतिकारों को जरूर खल रहा होगा। विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी एसके शर्मा का कहना है कि इस समय पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश में अमेरिका काफी सक्रिय है। अफगानिस्तान को लेकर ट्रंप के बयान ने काफी हलचल बढ़ा दी है। नेपाल मामलों के विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार आनंद स्वरुप वर्मा वहां की उथल-पुथल, जेन-जी आपरेशन में अमेरिकी ताकतों का बढ़ा हाथ मानते हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका चीन के लिए कोई ‘वैक्यूम’नहीं छोड़ना चाहता है।
चीन के सहयोग से कभी भी बदमाशी कर सकता है पाकिस्तान
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि चीन पश्चिम एशिया में बड़ा खेल खेल सकता है। उसके इस खेल में पाकिस्तान बड़ा खिलाड़ी बन सकता है। पाकिस्तान की पश्चिम एशिया के मामले में कोशिश को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। सऊदी अरब से समझौते ने भी दुनिया को चौकन्ना कर दिया है। ईरान के बंदरगाह 'चाबहार' परियोजना पर ट्रंप की कैंची चलाने को भी नए रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान को लेकर इसलिए नई नीति पर काम कर रहा है। इसमें अफगानिस्तान भी अहम है। ताकि भारत का अफगानिस्तान से संपर्क मुश्किल हो और पाकिस्तान की अफगानिस्तान में 'एंट्री' का रास्ता खुले। इससे चीन अपनी सीईसी योजना को आगे बढ़ाएगा और अमेरिका संतुलित करने के लिए 'बागराम में सैनिक अड्डा' का विचार लेकर आया है। अमेरिका की पाकिस्तान से जुड़ी नीति को इसी के सापेक्ष देखा जा रहा है। विदेश मामलों के एक जानकार इस समय अमेरिका में हैं। वह 'थिंक टैंक' के सदस्य हैं। बताते हैं कि अमेरिका के 10-15 साल से अंतरराष्ट्रीय मामले में काम कर रहे अधिकारी काफी भौचक्के हैं। उन्हें ट्रंप की विदेश नीति बदलने की नीति भी काफी हैरान कर रही है। 'अमेरिकी मागा (विदेश से आकर अमेरिका में बसने की चाहत रखने वाले लोगों की मुखालफत करने वाला समूह)' इस समय काफी तेजी से उभर रहा है। यह भी तमाम अमेरिकियों के लिए चिंता का विषय है। वह कहते हैं कि यह समय उथल-पुथल का है और सावधान रहने का है।