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Saint Martin: सेंट मार्टिन द्वीप का क्या है महत्व? आखिर क्यों इसे US को नहीं देना चाहती थीं शेख हसीना; जानें

Mon, 12 Aug 2024 04:19 PM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 12 Aug 2024 04:19 PM IST
सार

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि अगर उन्होंने बंगाल की खाड़ी में सेंट मार्टिन द्वीप पर संप्रभुता अमेरिका को सौंप दी होती और बंगाल की खाड़ी में उसे बेस बनाने की अनुमति दे देतीं तो वह सत्ता में बनी रह सकती थीं। अब भारत में 76 वर्षीय शेख हसीना में भारत में अपने करीबी सहयोगियों से यह खास बातें साझा की हैं।  

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What is the strategic importance of St. Martin Island, why was America trying to take it from Sheikh Hasina
Saint Martin island - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के पीछे अमेरिका की भूमिका की संभावना होने का दावा किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि इस्तीफे से पहले शेख हसीना ने कहा, अगर उन्होंने बंगाल की खाड़ी में सेंट मार्टिन द्वीप पर संप्रभुता अमेरिका को सौंप दी होती और बंगाल की खाड़ी में उसे बेस बनाने की अनुमति दे देतीं तो वह सत्ता में बनी रह सकती थीं।'  अब भारत में 76 वर्षीय शेख हसीना में भारत में अपने करीबी सहयोगियों से यह खास बातें साझा की हैं। हालांकि, उनके बेटे ने इन दावों को सिरे से नकार दिया है। आइए जानते हैं  सेंट मार्टिन द्वीप के बारे में...

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चर्चा में सेंट मार्टिन द्वीप 
हसीना के इस दावे के बाद से बंगाल की खाड़ी के उत्तर पूर्वी भाग में केवल तीन किमी वर्ग क्षेत्रफल में फैले इस द्वीप समूह की चर्चा चारों ओर हो रही है। दरअसल, अमेरिका इस द्वीप पर इसलिए कब्जा चाह रहा है ताकि हिंद महासागर में वह अपना प्रभुत्व स्थापित कर सके। बता दें कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की उपस्थिति बढ़ रही है। चीन की बढ़ती उपस्थिति ने अमेरिका में खतरे की घंटी बजा दी है। अमेरिका ने अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति का जवाब दिया है, जिसमें भारत एक प्रमुख रणनीतिक भागीदार है। दोनों देशों ने क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति के जवाब में चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (क्वाड) और मालाबार नौसैनिक अभ्यास जैसे अन्य तंत्र विकसित किए हैं। 
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द्वीप का है रणनीतिक महत्व
दरअसल, इस द्वीप की भौगोलिक स्थिति ऐसी है जो इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यहां से दुनिया में कही भी समुद्र के रास्ते जाया जा सकता है। इतना ही नहीं, इस द्वीप से न सिर्फ बंगाल की खाड़ी बल्कि आस-पास के पूरे इलाके पर नजर रखी जा सकती है। ऐसे में सामरिक रूप से सेंट मार्टिन द्वीप का खासा महत्व है।
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नारिकेल जिंजिरा नाम से भी जाना जाता है
सेंट मार्टिन द्वीप बांग्लादेश का एकमात्र मूंगा द्वीप है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। इस द्वीप में साफ नीला पानी और मूंगे जैसे विविध समुद्री जीव पाए जाते हैं। वहीं, इस द्वीप को नारिकेल जिंजिरा (नारियल द्वीप) और दारुचिनी द्वीप (दालचीनी द्वीप) के नाम से भी जाना जाता है। यह बंगाल की खाड़ी के उत्तर पूर्वी भाग में केवल तीन किमी वर्ग क्षेत्रफल में फैला है और कॉक्स बाजार-टैंकफ प्रायद्वीप के सिरे से लगभग नौ किमी दक्षिण में स्थित है। मार्टिन द्वीप की अर्थव्यवस्था मुख्यरूप से पर्यटन, मछली पालन, चावल-नारियल की खेती पर निर्भर करती है। इससे द्वीप के 5500 लोगों की आजीविका चलती है।

बांग्लादेश और म्यांमार के बीच विवाद का कारण
बता दें कि मार्टिन द्वीप तब चर्चा में आया, जब बांग्लादेश और म्यांमार इस क्षेत्र के आसपास मछली पकड़ने के अधिकार को लेकर भिड़ गए। दोनों देशों ने अपनी समुद्री सीमा के परिसीमन पर द्वीप पर संप्रभु दावों का विरोध किया था। हालांकि, 2012 में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (आईटीएलओएस) ने अपने फैसले में इस द्वीप को बांग्लादेश के क्षेत्रीय समुद्र, महाद्वीपीय शेल्फ और ईईजेड का हिस्सा बताया था। इसके अलावा, 2018 में, बांग्लादेश सरकार ने म्यांमार के अद्यतन मानचित्र का विरोध किया था, जिसमें द्वीप को उसके संप्रभु क्षेत्र के हिस्से के रूप में दिखाया गया था। बाद में म्यांमार ने इसे एक गलती के रूप में स्वीकार किया था।




शेख हसीना और अमेरिका के रिश्तों में तनातनी
शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहने के दौरान अमेरिका और बांग्लादेश के बीच संबंधों में तनातनी देखने को मिली थी। अमेरिका ने यहां तक कह दिया था कि बांग्लादेश में जनवरी में हुए चुनाव निष्पक्ष नहीं थे। आपको बता दें कि जनवरी में हुए चुनाव में आवामी लीग सत्ता में लौटी थी। बांग्लादेश छोड़ने से कुछ महीने पहले ही शेख हसीना ने बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार गिराने के लिए साजिशें रची जा रही हैं। उन्होंने अमेरिका पर बांग्लादेश और म्यांमार से बाहर एक नया ईसाई देश बनाने की साजिश करने का आरोप लगाया था। इस वर्ष मई के महीने में शेख हसीना ने कहा था, 'अगर मैं किसी खास देश को बांग्लादेश में हवाई अड्डा बनाने की अनुमति देती तो इस तरह की साजिशें नहीं रची जाती।’

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