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Canada: सिखों-हिंदुओं में दरार डालने के पीछे क्या है खालिस्तानियों का प्लान, कनाडा में कितने सुरक्षित भारतीय

Tue, 05 Nov 2024 03:50 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 05 Nov 2024 03:50 PM IST
सार

कनाडा में भारतीय हिंदू मंदिरों पर हमलों ने एक नई बहस छेड़ दी है। अपनी जड़ों से हजारों किलोमीटर दूर कनाडा में लंबे समय से बसे सिखों-हिंदुओं के बीच हमेशा से अच्छे संबंध रहे हैं। दोनों समुदाय एक दूसरे के सुख दुख के साथी रहे हैं।

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What is the plan of Khalistanis behind creating rift between Sikhs and Hindus, how safe are Indians in Canada
कनाडा में मंगलवार को खालिस्तानियों के विरोध में निकाली गई मार्च - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कनाडा में भारतीय हिंदू मंदिरों पर हमलों ने एक नई बहस छेड़ दी है। अपनी जड़ों से हजारों किलोमीटर दूर कनाडा में लंबे समय से बसे सिखों-हिंदुओं के बीच हमेशा से अच्छे संबंध रहे हैं। दोनों समुदाय एक दूसरे के सुख दुख के साथी रहे हैं। ऐसे में इन हमलों के बीच बड़ा प्रश्न यही है कि सिखों और हिंदुओं के बीच यह दरार क्यों डाली जा रही है? यह दरार बढ़ाकर खालिस्तानी गिरोह क्या हासिल करना चाहता है?
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रवि मल्होत्रा कनाडा के कैलगरी में सपरिवार रहते हैं। वे वहां के स्थानीय मंदिर के प्रशासनिक समिति से भी जुड़े हैं। उनका कहना है कि कनाडा में सिख और हिंदू दोनों ही अपने भारतीय मूल पर गर्व करते हैं। दोनों समुदायों के बीच यहां परस्पर बेहद अच्छे संबंध रहे हैं। भारत की भांति कनाडा में भी हिंदू समुदाय के लोग अपने परिवार के साथ गुरुद्वारे में जाकर सेवा करते हैं और लंगर प्रसाद ग्रहण करते हैं। ठीक इसी तरह सिख समुदाय के लोग हिंदू मंदिरों में जाते हैं और देवी-देवताओं के सामने सिर झुकाते हैं। वे सामूहिक तौर पर सेवा कार्य भी करते हैं। इस तनावपूर्ण माहौल में भी दिवाली पर कुछ मंदिरों में सिख परिवार पहुंचे। उन्होंने मंदिर में दीपक जलाए और प्रसाद बांटे।    
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मल्होत्रा के अनुसार, लेकिन अब ऐसे लोगों की संख्या घटी है। इसका बड़ा कारण खालिस्तानियों के द्वारा दोनों समुदाय के लोगों को डराना है। लोग किसी आशंका से सामने नहीं आना चाहते। लेकिन दोनों ही समुदायों में अभी भी 90-95 प्रतिशत लोग इस तरह के झगड़ों से दूर हैं। वे इस राजनीति को समझते हैं, इसलिए वे इसे बहुत अधिक महत्त्व भी नहीं देते। लेकिन यह सच है कि खालिस्तानियों के असर के कारण कुछ लोग अब सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहते हैं। संभवतः वे उनकी नजर में सामने नहीं आना चाहते। 
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खालिस्तानियों की मंशा क्या? 
रवि मल्होत्रा ने कहा कि खालिस्तानी कनाडा की राजनीति में अपने आपको ज्यादा प्रभावी बनाना चाहते हैं। इस समय भी ट्रूडो सरकार को उनकी पार्टी एनडीपी का सहयोग है। लेकिन दूसरे सहयोगी दलों के कारण ट्रूडो सरकार पूरी तरह एनडीपी पर निर्भर नहीं है। अगले वर्ष सितंबर-अक्टूबर में कनाडा में चुनाव होने हैं। खालिस्तानी इस चुनाव में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाकर कनाडा की सरकार में बड़ा दखल हासिल करना चाहते हैं। इससे वे कनाडा में अपनी अवैध गतिविधियों को ढकने के लिए एक राजनीतिक छत्र पा सकते हैं। 



'नशे के हजारों करोड़ के व्यापार का कनेक्शन'
एक अप्रवासी भारतीय के अनुसार, पंजाब-पाकिस्तान से लेकर कनाडा तक हजारों करोड़ रुपये का नशे का अवैध कारोबार होता है। नशे की यह खेप अफगानिस्तान से पाकिस्तान और पाकिस्तान से पंजाब तक पहुंचाई जाती है। पंजाब और पाकिस्तान के कुछ चैनलों के द्वारा यह नशे की खुराक कनाडा सहित कई यूरोपीय-अमेरिकी देशों तक पहुंचाई जाती है। यह हजारों करोड़ रूपये का अवैध कारोबार है। 

खालिस्तानी समूह इस नशे के कारोबार पर अपना कब्जा बनाए रखने के लिए इस तरह के हमले कर लोगों का ध्यान भटकाते हैं। वे कनाडा में खुद को राष्ट्रीय विचारधारा वाले एक धार्मिक दल के तौर पर अपनी पहचान बनाए रखते हैं। लेकिन इसके पीछे वे नशे के कारोबार को अंजाम देते हैं। आरोप है कि इसी पैसे के बल पर वे अपनी राजनीतिक इच्छाओं को पूरा करने का काम करते हैं। 

'सिखों का बड़ा वर्ग उनके साथ नहीं'
कनाडा के विक्टोरिया में रहने वाले एक व्यवसायी सरदार परमिंदर सिंह ने अमर उजाला को बताया कि सिखों का बड़ा समुदाय पंजाब के आतंकी दौर को देख चुका है। उसने देखा है कि किस तरह एक छोटे से समूह की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने पूरे पंजाब को आतंक की आग में झोंक दिया था। इसका पंजाब को बड़ा नुकसान हुआ। उनके अनुसार यह घटना अभी इतनी पुरानी नहीं पड़ी है कि लोग उसके असर को भूल जाएं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आज भी कनाडा में भी खालिस्तानियों को सिखों के एक बड़े वर्ग का समर्थन हासिल नहीं है। लेकिन यह सच है कि कुछ युवाओं और नई पीढ़ी के लोगों के बीच, जो कनाडा में ही पैदा हुए और पले-बढ़े, उनके बीच खालिस्तान को लेकर एक आकर्षण है। 

गुरुओं के साथ भिंडरावाले की फोटो?
एक अप्रवासी भारतीय ने अमर उजाला को बताया कि कनाडा के कुछ गुरुद्वारे पूरी तरह खालिस्तानियों के कब्जे में आ गए हैं। वहां सिख पंथ के गुरुओं की फोटो के साथ-साथ भिंडरावाले की फोटो भी लगाई गई है। यह बेहद आपत्तिजनक है, सिख समाज के भी अनेक लोग इसे सही नहीं मानते, न ही इसका समर्थन करते हैं, लेकिन खालिस्तानियों के राजनीतिक-प्रशासनिक प्रभाव के कारण कोई कुछ नहीं कह पाता। 


कितने सुरक्षित भारतीय
रवि मल्होत्रा ने अमर उजाला से कहा कि उनके जैसे हजारों हिंदू उनके इलाके में रहते हैं, लेकिन किसी को सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता नहीं है। कुछ मंदिरों में लोगों के जाने पर हिंसा हुई थी, इसमें महिला-बच्चे भी शामिल थे। लेकिन लोग अपने घरों में शांतिपूर्ण तरीके से रह रहे हैं, और अपना कामकाज कर रहे हैं। हालांकि, हिंदू समुदाय के लोगों को चिंता है कि आगामी चुनाव के पहले इस तरह की हिंसा को बढ़ावा मिल सकता है जिससे लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। 
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