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वट्टा-सट्टा शादी: पाकिस्तान में परंपराओं की बलि चढ़ रही हैं लड़कियां, जानिए क्या है ये
Mon, 29 Mar 2021 03:52 PM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेशावर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेशावर
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 29 Mar 2021 03:52 PM IST
सार
पाकिस्तान में शादी की आयु 16 साल है। यहां केवल सिंध प्रांत ऐसा है जहां विवाह की आयु 18 साल निर्धारित है। इसके बावजूद सिंध समेत पेशावर और पंजाब में बाल विवाह के मामलों में इजाफा हो रहा है। यहां 15 साल से भी कम आयु में लड़कियों की शादी कर दी जा रही है। इसके पीछे का कारण परंपराएं और रीति-रिवाजों को बताया जाता है। विवाद निपटाने के लिए और संपत्ति के झगड़ों के समाधान के लिए ये शादियां कर दी जाती हैं। स्थानीय भाषा में इसे 'वट्टा-सट्टा शादी' कहते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
विस्तार
बाल विवाह के इन मामलों को रोकने के लिए कई सामाजिक संगठन आगे आए हैं। पेशावर में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता नसीम कहते हैं कि पाकिस्तान ने साल 1990 में बाल अधिकारों पर कन्वेंशन को अनुमति दी थी। इसमें बच्चों के अधिकारों की रक्षा के साथ बाल विवाह की प्रथा को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्धता जताई गई थी। हालांकि, अभी भी इस पर कोई रोक नहीं लग पाई है। पाकिस्तान के पेशावर, पंजाब और सिंध प्रांत में आज भी 35 फीसदी बाल विवाह ही हो रहे हैं।
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सामाजिक कार्यकर्ता पूरे देश में विवाह की न्यूनतम आयु 18 साल करने की मांग कर रहे हैं। नसीम बताते हैं कि पाकिस्तान जनसांख्यिकी और स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2017-18 का डाटा बताता है कि पंजाब, पेशावर और सिंध प्रांत में आज भी 35 फीसदी बाल विवाह हो रहे हैं। हालांकि, आवाज उठाए जाने के बाद भी पाकिस्तान सरकार ने अभी तक इस मामले में कोई ठोस कदम उठाने का या कार्रवाई करने का संकेत नहीं दिया है और न ही इस बारे में उच्च स्तर पर ही कोई चर्चा की जा रही है।
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संपत्ति विवाद और झगड़े निपटाने के लिए कर देते हैं शादी
वहीं, महिला अधिकार कार्यकर्ता मुख्तारन माई कहती हैं कि पंजाब प्रांत के ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर लड़कियों की शादी रीति-रिवाजों और परंपराओं के कारण कम उम्र में ही कर दी जाती है। मुख्तारन माई कहती हैं, 'यहां वट्टा-सट्टा शादी आम बात है। किसी की हत्या होने पर पैसे चुकाना, जनजातीय विवाद और संपत्ति के झगड़े को निपटाने के लिए भी लड़कियों की शादी कर दी जाती है। वट्टा-सट्टा के तहत दो परिवारों के लड़के-लड़कियों की शादी एक-दूसरे परिवार में की जाती है।'
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पाकिस्तान में बाल विवाह के पीछे सबसे बड़ी वजह गरीबी
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कार्यकर्ता कैसर खान कहते हैं कि पाकिस्तान में बाल विवाह के पीछे की सबसे बड़ी वजह गरीबी है। वे कहते हैं, 'जनजातीय इलाकों के लोग पांच लाख से 20 लाख रुपए देकर कम उम्र की लड़कियों से शादी कर देते हैं। धार्मिक नेता, आदिवासियों के मुखिया और राज्य प्रशासन तक सभी इसमें शामिल हैं।' खान कहते हैं कि जब आम आदमी से लेकर शासन-प्रशासन भी इसमें शामिल है तो इस प्रथा पर रोक कैसे लग पाएगी और लोग आगे किस तरह से बढ़ पाएंगे।
64 साल के विधायक ने की 14 साल की किशोरी से शादी
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में हाल ही में 64 वर्षीय विधायक मौलाना सलाउद्दीन अयूबी ने 14 साल की किशोरी से शादी की थी। दुनियाभर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और संगठनों ने इसकी आलोचना की थी। पाकिस्तान की भी खूब किरकिरी हुई थी। इसके बाद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से बाल विवाह के खिलाफ ठोस कदम उठाने की मांग की है। वहीं, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने शादी की खबर को बेतुकी और बहुत परेशान करने वाला बताया था।