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वाशिंगटन: राष्ट्रपति के तौर पर बाइडन का पहला साल पूरा, बोले- 2024 में भी हैरिस मेरे साथ रहेंगी दौड़ में
Thu, 20 Jan 2022 08:18 AM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 20 Jan 2022 08:18 AM IST
सार
इससे पहले मध्य दिसंबर में हैरिस ने कहा था कि उन्होंने और बाइडन ने अभी 2024 के चुनाव के बारे में विचार नहीं किया है। यह अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि यदि बाइडन दोबारा चुनाव नहीं लड़ेंगे तो उपराष्ट्रपति भी मैदान में नहीं उतरेंगी।
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जो बाइडेन के साथ कमला हैरिस (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को अपनी सहयोगी व भारतवंशी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस पर पूरा भरोसा है। राष्ट्रपति के तौर पर अपने कार्यकाल का एक साल पूरा होने के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, ' 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भी यदि मैं फिर मैदान में उतरा तो हैरिस मेरे साथ दौड़ में शामिल होंगी।'
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इससे पहले मध्य दिसंबर में हैरिस ने कहा था कि उन्होंने और बाइडन ने अभी 2024 के चुनाव के बारे में विचार नहीं किया है। यह अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि यदि बाइडन दोबारा चुनाव नहीं लड़ेंगे तो उपराष्ट्रपति भी मैदान में नहीं उतरेंगी।
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वॉल स्ट्रीट जर्नल के साथ एक चर्चा में उपराष्ट्रपति हैरिस से पूछा गया था कि 79 वर्षीय बाइडन क्या दोबारा चुनाव लड़ेंगे? जवाब में उन्होंने कहा था, 'मैंने इस बारे में अभी नहीं सोचा, न इस बारे में बाइडन से बात की है।' हैरिस इतिहास में पहली अश्वेत व एशिया मूल की पहली महिला हैं, जो अमेरिकी उपराष्ट्रपति बनीं हैं।
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हैरिस की छवि पर असर पड़ा
शुरुआत में तो हैरिस को बाइडन की उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था, लेकिन बाद में प्रेस में नकारात्मक छवि व कथित शिथिलता तथा प्रशासन में उनके महत्व को लेकर संदेह पैदा होने लगा। इसके अलावा अल्पसंख्यकों को मतदान के अधिकार और अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर प्रवासी संकट जैसे कुछ जटिल मामलों से निपटने में उनकी हताशा के चलते हैरिस की छवि पर असर पड़ा।
बाइडन ने किया बचाव
राष्ट्रपति बाइडन ने हैरिस का बचाव किया है। उन्होंने कहा, 'अल्पसंख्यकों के वोटिंग अधिकार मामले के लिए मैंने उन्हें प्रभारी बनाया है। मुझे लगता है कि वह अच्छा काम कर रही हैं।' राष्ट्रपति बाइडन अमेरिकी कांग्रेस पर दो अहम विधेयकों को पारित करने के लिए दबाव डाल रहे हैं। इनमें से एक मतदान के अधिकार का दायरा बढ़ाना और दूसरा राज्यों को चुनाव कानूनों में बदलाव के लिए और शर्तें रखने तथा चुनाव अधिकारियों को अनुचित प्रभाव से बचाने से संबंधित हैं।
डेमोक्रेट्स व वोटिंग के अधिकारों की मांग कर रहे कार्यकर्ता रिपब्लिकनों द्वारा अश्वेतों व लैटिन अमेरिकियों को सीमित वोटिंग अधिकार देने के प्रयासों के खिलाफ हैं। इसलिए वे मतदान अधिकारों में परिवर्तन की मांग उठा रहे हैं।