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Venezuela: क्या वेनेजुएला में भितरघात ने दिया ट्रंप का साथ, मौन रही मादुरो की सुरक्षा टीम, अगला निशाना क्यूबा

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 07 Jan 2026 07:57 PM IST
सार

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जहां रूस व उत्तर कोरिया सहित कई देशों ने विरोध जताया। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ इस घटना के परिणामों को लेकर चिंतित हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई बातें सामने आई रही है। जानिए विस्तार से...

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Was there an internal betrayal against Maduro in Venezuela? Maduro's internal security cordon remained silent
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सैन्य हिरासत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले सप्ताह सैनिक कार्रवाई के जरिए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करा दिया था। इसे लेकर दुनिया के विभिन्न देशों की प्रतिक्रिया सामने आई है। रूस, उत्तरी कोरिया सहित कई देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम की आलोचना की है। आर्मी क्षेत्र में रह रहे वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो, आखिर इतनी आसानी से किस तरह अमेरिकन फोर्सेज के हाथ लग गए, उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रक्षा मामलों के विशेषज्ञ मेजर जन. (रिटायर्ड) ध्रुव सी कटोच ने अमर उजाला डॉट कॉम के साथ एक खास बातचीत में कहा, वेनेजुएला में 'भितरघात' ने की ट्रंप की राह आसान की है। यहां पर 'घर का भेदी लंका ढहाए' वाली कहावत सही साबित होती है। हमले के वक्त 'मादुरो' की इंटरनल कॉर्डन क्या रही थी। क्या उसने हथियार डाल दिए थे। अमेरिकी लालच के सामने उनकी राइफलों से गोलियां नहीं निकल सकी। अब राष्ट्रपति ट्रंप का अगला निशाना 'क्यूबा' हो सकता है। 

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वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला का प्रशासन तब तक संभालेगा, जब तक वहां सत्ता का सुरक्षित और व्यवस्थित हस्तांतरण नहीं हो जाता। ट्रंप का मुख्य फोकस, वेनेजुएला के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को बहाल करने पर होगा। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ मेजर जन. (रिटायर्ड) ध्रुव सी कटोच से जब पूछा गया कि किसी शक्तिशाली राष्ट्र द्वारा आर्थिक हितों को पूरा करने के लिए सैन्य कार्रवाई की मदद लेना, ये कदम मौजूदा समय में विश्व के किस ओर जाने का संकेत है तो कटोच ने कहा, अमेरिका का यह एक्शन गलत था। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को एनफोर्समेंट ऑपरेशन बताकर सैन्य कार्रवाई से इनकार करने का प्रयास किया है। प्रारंभ में अमेरिका की तरफ से कहा गया कि एनफोर्समेंट दस्ते की एक टीम ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अरेस्ट किया है। 
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सुरक्षा परिषद की परवाह किसी को नहीं
बतौर कटोच, ये अमेरिका का एक बहाना था। यह पूरी तरह से एक मिलिट्री ऑपरेशन था। मौजूदा विश्व में अमेरिका का यह एक्शन, एक गलत दौड़ को बढ़ावा दे सकता है। इससे विश्व की बाकी महाशक्तियों के लिए क्या संदेश जाएगा। रूस, चीन व अन्य दूसरे बड़े देश भी ऐसी कार्रवाई करना शुरु कर देंगे। इस मामले में एक बार फिर से यह साबित हो गया है कि संयुक्त राष्ट्र संघ एक दंत विहीन संगठन है। सुरक्षा परिषद की परवाह किसी को नहीं है। 
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अमेरिका का यह सैन्य ऑपरेशन, वैश्विक संधियों व समझौतों का उल्लंघन है। इस कार्रवाई के पीछे मुख्य वजह 'तेल' रहा है। इस सैन्य ऑपरेशन से अब वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण हो जाएगा। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान का है। वजह, वेनेजुएला से करीब अस्सी प्रतिशत तेल चीन को बेचा जा रहा था। गत सप्ताह चीन ने वेनेजुएला के साथ कुछ कांन्टेक्ट भी साइन किए थे। चीन का प्रभाव यहां बहुत ज्यादा हो गया था। ट्रंप प्रशासन का कहना था कि इस इलाके में अमेरिकन के अलावा बाहर के लोग नहीं आ सकते। ओएनजीसी विदेश लिमिटेड की लगभग एक अरब डॉलर की बकाया राशि के वापस आने की उम्मीद, इस सवाल के जवाब में पूर्व मेजर जन. ध्रुव कटोच ने कहा, भारत का हिस्सा यहां पर कम है। इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। 

वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप द्वारा क्यूबा, मैक्सिको और कोलंबिया को लेकर सख्त बयान दिया गया। इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि आगे भी किसी दूसरे देश में ऐसी सैन्य कार्रवाई संभव है। अब अगला नंबर किसका है, रक्षा विशेषज्ञ कटोच ने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप मौजूदा व्यवस्था में मैक्सिको पर कोई खास दबाव नहीं डाल सकते। अब क्यूबा पर बहुत ज्यादा दबाव बढ़ जाएगा। 

क्यूबा और वेनेजुएला के बीच गहरे संबंध रहे हैं। इस देश की ज्यादातर तेल की जरुरत यहीं से पूरी होती है। दोनों देशों के बीच अच्छी समझ रही है। अब इनके रिश्ते खत्म हो सकते हैं। क्यूबा पर खतरा मंडरा रहा है। इस क्रम में कोलंबिया का नंबर बाद में आता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई को सही बताया है। इस कार्रवाई के पीछे वेनेजुएला की ईरान से बढ़ती नजदीकी और आपराधिक समूह, इन्हें मुख्य कारण बताया है। 

ये भी पढ़ें: Venezuela: कभी चीन और जापान से अमीर वेनेजुएला कंगाल कैसे हो गया, पढ़िए अर्श से फर्श तक पहुंचने की पूरी कहानी

'मादुरो' की असली ताकत वेनेजुएला की सेना नहीं
मार्को रूबियो, क्यूबा के रहने वाले हैं। वे क्यूबा की सत्ता को बदलना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने इराक, अफगानिस्तान या लीबिया से इस सैन्य कार्रवाई की तुलना को अनुचित ठहराया है। वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिकी की नजर के दावों को भी उन्होंने खारिज किया है। मार्को रूबियो, जानते थे कि 'मादुरो' की असली ताकत वेनेजुएला की सेना नहीं है। क्यूबा की खुफिया एजेंसी जी2, वेनेजुएला में खुफिया नेटवर्क संभाल रही थी। राष्ट्रपति मादुरो के सुरक्षा घेरे में क्यूबा के दस्ते रहते थे। 


बतौर कटोच, इस सैन्य कार्रवाई की फाइनल डिटेल क्लासीफाइड है। संभव है कि उन्हें डी क्लासीफाइड होने में लंबा वक्त लग जाए।बतौर कटोच, एक सैन्य पर्सन के नाते मैं कह सकता हूं कि वेनेजुएला में मौजूद सुरक्षा बलों के पास अच्छे हथियार थे। उनके पास रूस के काफी रक्षा उपकरण थे। एयर डिफेंस सिस्टम और फाइटर जेट्स हैं। इसके बावजूद अमेरिकन फोर्सेज आसानी से वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर लेती हैं। खास बात है कि जहां निकोलस मादुरो रहते थे, वह एरिया आर्मी के नियंत्रण में था। अगर राष्ट्रपति का डिफेंस ठीक होता तो उन्हें आसानी से अमेरिका लेकर आना मुश्किल था। मतलब अंदर की सिक्योरिटी में सेंध लगी थी। इंटरनल कॉर्डन तक कुछ नहीं कर सकी। वे सब बिक चुके थे। 

ऐसा बताया जा रहा है कि अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई में दो चार मिलिट्री प्वाइंट पर बमबारी हुई है। लगभग सौ लोगों के हताहत होने की बात कही जा रही है। कटोच ने कहा, व्यक्तिगत तौर पर हम कह सकते हैं कि अमेरिका ने यह गलत किया है। डेढ़ दो दशक में इसके दुष्परिणाम सामने आएंगे। इसका अमेरिका पर असर होगा, क्योंकि कोई भी देश इस तरह की सैन्य कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगा। इससे अन्य देशों के अलावा यूरोप और अमेरिका के बीच दूरी बढ़ेगी। यूरोप का डिफेंस, ज्यादातर अमेरिका के हाथ में है। इसे एक मजबूरी कह सकते हैं। अगर इसे हटा दें तो यूरोप के पास ज्यादा कुछ नहीं बचेगा। आने वाले समय में यूरोप अपने डिफेंस में कुछ इजाफा करने की कोशिश करेगा। तब तक वह दूरी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी होगी। 

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