{"_id":"69e4fad001ae38ad350b7fb1","slug":"vp-radhakrishnan-sri-lanka-visit-bilateral-ties-cyclone-ditwah-aid-2026-04-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"India-Sri Lanka Ties: इतिहास में पहली बार उपराष्ट्रपति का श्रीलंका दौरा, विकास कार्यों पर हुई चर्चा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
India-Sri Lanka Ties: इतिहास में पहली बार उपराष्ट्रपति का श्रीलंका दौरा, विकास कार्यों पर हुई चर्चा
Sun, 19 Apr 2026 09:28 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, कोलंबो।
पीटीआई, कोलंबो।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 19 Apr 2026 09:28 PM IST
सार
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की ऐतिहासिक श्रीलंका यात्रा ने दोनों देशों के बीच विकास, सुरक्षा और मानवीय सहयोग के नए द्वार खोले हैं। 450 मिलियन डॉलर की 'दितवा' चक्रवात सहायता और 50 हजार घरों का निर्माण भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति की सफलता को दर्शाता है।
विज्ञापन
सीपी राधाकृष्णन, भारत के उपराष्ट्रपति
- फोटो : @PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने संबंधों को और प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन श्रीलंका के दो दिवसीय दौरे पर हैं। रविवार को कोलंबो पहुंचते ही उपराष्ट्रपति ने श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस दौरान द्विपक्षीय रणनीतिक रिश्तों पर चर्चा हुई।
अधिकारियों के अनुसार, यह किसी भी भारतीय उपराष्ट्रपति की श्रीलंका की पहली आधिकारिक यात्रा है। कोलंबो के भंडारनायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खेल मंत्री सुनील कुमारा गामगे ने उपराष्ट्रपति के नेतृत्व वाले 49 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा भारत की पड़ोसी प्रथम नीति का एक जीवंत उदाहरण पेश करती है।
चक्रवात 'दितवा' के बाद भारत ने की मदद
चर्चा का मुख्य केंद्र चक्रवात दितवा के बाद भारत की ओर से दी गई 450 मिलियन डॉलर की विशाल आर्थिक सहायता रही। इस पैकेज का उपयोग श्रीलंका के प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और विशेष रूप से भारतीय मूल के तमिल समुदाय के पुनर्वास के लिए किया जा रहा है। राष्ट्रपति दिसानायके ने संकट के समय भारत की त्वरित मदद की सराहना की।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: ट्रंप की आखिरी चेतावनी: राष्ट्रपति बोले- डील मानो, वरना अंधेरे में डूबेगा ईरान; पाकिस्तान में कल फिर वार्ता
50 हजार परिवारों का सपना हुआ पूरा
अपनी यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति ने एक सामुदायिक स्वागत समारोह में शिरकत की, जहां उन्होंने वर्चुअल माध्यम से 'भारतीय आवास परियोजना' के तीसरे चरण के तहत निर्मित घरों को लाभार्थियों को सौंपा। इस उपलब्धि के साथ ही अब तक श्रीलंका में भारतीय सहायता से कुल 50,000 घर बनाए जा चुके हैं। उपराष्ट्रपति ने बताया कि चौथे चरण के तहत 10,000 और घरों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
मछुआरों का मुद्दा
भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से लंबित मछुआरों के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं ने गंभीरता से चर्चा की। दोनों देशों के मछुआरों के हितों को ध्यान में रखते हुए, इस विवाद को मानवीय आधार पर सुलझाने और आपसी विश्वास बढ़ाने पर सहमति बनी।
राजनीतिक मुलाकातों का सिलसिला
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने श्रीलंकाई प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या से भी मुलाकात की, जिन्होंने उनके सम्मान में 'टेम्पल ट्रीज़' में दोपहर भोज का आयोजन किया। इसके अलावा, विपक्ष के नेता साजित प्रेमदासा और विभिन्न तमिल राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनसे भेंट की। प्रेमदासा ने भारत को श्रीलंका का सच्चा साझेदार बताते हुए भविष्य की चुनौतियों से मिलकर लड़ने की बात कही। कल सोमवार को उपराष्ट्रपति नुआरा एलिया के दौरे पर रहेंगे, जहां वे जमीनी स्तर पर आवास परियोजनाओं का निरीक्षण करेंगे और स्थानीय तमिल समुदाय से सीधा संवाद करेंगे।
छठी पीढ़ी तक को मिलेगा OCI कार्ड- विक्रम मिसरी
उपराष्ट्रपति के इस दौरे के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि अब श्रीलंका में रहने वाले भारतीय मूल के प्रवासियों की पांचवीं और छठी पीढ़ी भी ओसीआई कार्ड के लिए पात्र होगी, जो पहले केवल चौथी पीढ़ी तक सीमित थी। इसके साथ ही, अब श्रीलंकाई अधिकारियों की ओर से जारी पंजीकरण प्रमाण पत्र और पुराने पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों को भी कार्ड प्राप्त करने के लिए वैध माना जाएगा। उन्होंने कहा कि अपनी इस यात्रा में उपराष्ट्रपति ने चक्रवात दितवा के लिए 450 मिलियन डॉलर की सहायता और आवास परियोजनाओं की समीक्षा करने के साथ-साथ मछुआरों के मुद्दे पर भी मानवीय दृष्टिकोण से चर्चा की।
विज्ञापन
अधिकारियों के अनुसार, यह किसी भी भारतीय उपराष्ट्रपति की श्रीलंका की पहली आधिकारिक यात्रा है। कोलंबो के भंडारनायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खेल मंत्री सुनील कुमारा गामगे ने उपराष्ट्रपति के नेतृत्व वाले 49 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा भारत की पड़ोसी प्रथम नीति का एक जीवंत उदाहरण पेश करती है।
विज्ञापन
चक्रवात 'दितवा' के बाद भारत ने की मदद
चर्चा का मुख्य केंद्र चक्रवात दितवा के बाद भारत की ओर से दी गई 450 मिलियन डॉलर की विशाल आर्थिक सहायता रही। इस पैकेज का उपयोग श्रीलंका के प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और विशेष रूप से भारतीय मूल के तमिल समुदाय के पुनर्वास के लिए किया जा रहा है। राष्ट्रपति दिसानायके ने संकट के समय भारत की त्वरित मदद की सराहना की।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: ट्रंप की आखिरी चेतावनी: राष्ट्रपति बोले- डील मानो, वरना अंधेरे में डूबेगा ईरान; पाकिस्तान में कल फिर वार्ता
50 हजार परिवारों का सपना हुआ पूरा
अपनी यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति ने एक सामुदायिक स्वागत समारोह में शिरकत की, जहां उन्होंने वर्चुअल माध्यम से 'भारतीय आवास परियोजना' के तीसरे चरण के तहत निर्मित घरों को लाभार्थियों को सौंपा। इस उपलब्धि के साथ ही अब तक श्रीलंका में भारतीय सहायता से कुल 50,000 घर बनाए जा चुके हैं। उपराष्ट्रपति ने बताया कि चौथे चरण के तहत 10,000 और घरों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
मछुआरों का मुद्दा
भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से लंबित मछुआरों के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं ने गंभीरता से चर्चा की। दोनों देशों के मछुआरों के हितों को ध्यान में रखते हुए, इस विवाद को मानवीय आधार पर सुलझाने और आपसी विश्वास बढ़ाने पर सहमति बनी।
राजनीतिक मुलाकातों का सिलसिला
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने श्रीलंकाई प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या से भी मुलाकात की, जिन्होंने उनके सम्मान में 'टेम्पल ट्रीज़' में दोपहर भोज का आयोजन किया। इसके अलावा, विपक्ष के नेता साजित प्रेमदासा और विभिन्न तमिल राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनसे भेंट की। प्रेमदासा ने भारत को श्रीलंका का सच्चा साझेदार बताते हुए भविष्य की चुनौतियों से मिलकर लड़ने की बात कही। कल सोमवार को उपराष्ट्रपति नुआरा एलिया के दौरे पर रहेंगे, जहां वे जमीनी स्तर पर आवास परियोजनाओं का निरीक्षण करेंगे और स्थानीय तमिल समुदाय से सीधा संवाद करेंगे।
छठी पीढ़ी तक को मिलेगा OCI कार्ड- विक्रम मिसरी
उपराष्ट्रपति के इस दौरे के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि अब श्रीलंका में रहने वाले भारतीय मूल के प्रवासियों की पांचवीं और छठी पीढ़ी भी ओसीआई कार्ड के लिए पात्र होगी, जो पहले केवल चौथी पीढ़ी तक सीमित थी। इसके साथ ही, अब श्रीलंकाई अधिकारियों की ओर से जारी पंजीकरण प्रमाण पत्र और पुराने पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों को भी कार्ड प्राप्त करने के लिए वैध माना जाएगा। उन्होंने कहा कि अपनी इस यात्रा में उपराष्ट्रपति ने चक्रवात दितवा के लिए 450 मिलियन डॉलर की सहायता और आवास परियोजनाओं की समीक्षा करने के साथ-साथ मछुआरों के मुद्दे पर भी मानवीय दृष्टिकोण से चर्चा की।