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नवालनी और उनके समर्थकों पर रूस में कस रहा है सरकार का शिकंजा
Wed, 03 Feb 2021 04:06 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 03 Feb 2021 04:06 PM IST
सार
कुछ दिन पहले नवालनी की संस्था ने कुछ लोगों की एक सूची जारी की थी और पश्चिमी देशों से उन पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था...
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एलेक्सी नवाल्नी
- फोटो : Amar Ujala (File)
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विस्तार
रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विरोधियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। पुतिन विरोधी नेता अलेक्सी नवालनी की गिरफ्तारी के बाद देश में हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है। इसी बीच रूस की संसद में एक प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसके तहत रूस के नागरिकों पर किसी तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की अपील करने को अपराध बनाने का प्रावधान है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले नवालनी की संस्था ने कुछ लोगों की एक सूची जारी की थी और पश्चिमी देशों से उन पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था।
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रूस की संसद ड्यूमा में प्रस्ताव पेश करते हुए पुतिन के दल- यूनाइटेड रशिया पार्टी के सांसद व्याचेस्लाव वोलोदिन ने कहा कि ऐसी अपील करने वाले लोगों के लिए बेहद सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए। ये बिल वोलोदिन के अलावा कई और सांसदों ने मिल कर तैयार किया है। इसमें तीन साल कैद और पांच लाख रुबल (6,585 डॉलर) तक का जुर्माना लगाने की बात कही गई है।
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बीते 30 जनवरी को रूस की गैर सरकारी संस्था एंटी-करप्शन फाउंडेशन (एफबीके) ने 35 रूसियों की सूची जारी की थी। संस्था ने अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन से अपील की थी कि वे इन लोगों पर प्रतिबंध लगा दें। इस सूची में रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको, रूस के नेशनल गार्ड के प्रमुख विक्टर जोलोतोव और व्यापारी रोमन अब्रहामोविच के नाम भी हैं। एफबीके की स्थापना नवालनी ने 2011 में की थी। लेकिन रूसी सरकार ने इसे विदेशी एजेंटे घोषित कर रखा है।
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दो हफ्ते पहले एफबीके के प्रमुख व्लादिमीर अशुर्कोव ने आठ लोगों की एक सूची जारी थी और कहा था कि पश्चिमी देशों को इन व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकता के आधार पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। उसके बाद अशुर्कोव एक मुकदमे में फंस गए हैं। रूस की फेडरल सिक्युरिटी सर्विस ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें अशुर्कोव को एक ब्रिटिश राजनयिक से पैसा मांगते दिखाया गया। वीडियो के मुताबिक अशुर्कोव ये धन रूसी संस्थानों को निशाना बनाने के लिए मांग रहे थे।
इस बीच जारी लिस्ट के बारे में अशुर्कोव ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा था कि जब अलेक्सी नवालनी ने ये लिस्ट उन्हें दी थी, तब उसका कोई संबंध नवालनी की विदेश से वापसी पर नहीं था। अशुर्कोव ने लिखा- ‘अलेक्सी मुझसे चाहते थे कि मैं इस लिस्ट की तरफ पश्चिमी देशों की सरकारों का ध्यान खीचूं और भ्रष्ट पुतिन शासन को कमजोर करने के लिए धीरे-धीरे और अधिक विवेकपूर्ण ढंग से काम करूं। लेकिन अलेक्सी की गिरफ्तारी और उन्हें लंबे समय तक जेल में डाल देने की शासन की कोशिश को देखते हुए मैंने फैसला किया कि अलेक्सी की सूची को जारी करने का यही सही समय है।’
सोमवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एफबीके की कड़ी आलोचना की। पेस्कोव ने कहा कि प्रतिबंध लगाने की अपील कर इसने साबित कर दिया है कि उसे विदेशी एजेंट कहना सही है। सांसद व्लादिमीर झाबारोव ने भी एफबीके पर निशाना साधा है। उन्होंने पूछा कि क्या अमेरिका में किसी संगठन से उम्मीद की जा सकती है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति पर प्रतिबंध लगाने के लिए व्लादिमीर पुतिन से अपील करे?
इस बीच नवालनी के खिलाफ रूस की एक अदालत में मंगलवार को फैसला सुनाया। इसके तहत अब नवालनी को उनकी पुराने सजा की बची अवधि जेल में गुजारनी होगी। इस मामले में अभियोग पक्ष ने कोर्ट से गुजारिश की थी कि नवालनी को पूरी सजा जेल में काटने का आदेश दे। नवालनी को उस मामले में साढ़े तीन साल कैद सुनाई गई थी। अब इस सजा की बची पूरी अवधि नवालनी को जेल में बितानी होगी। पिछले साल अदालत ने ये सजा निलंबित कर दी थी। इस कारण नवालनी इलाज के लिए जर्मनी जा पाए। लेकिन हाल में उनके देश लौटते ही उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया गया।