खूनी संघर्ष: पाकिस्तान में सड़कें बनीं जंग का मैदान, सात की मौत और 300 घायल, जानें क्यों बन गए गृहयुद्ध जैसे हालात
पाकिस्तान की सड़कों पर बीते तीन दिनों से कट्टर इस्लामी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक के समर्थक आतंक मचाए हुए हैं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की वजह से पाकिस्तान जंग का अखाड़ा बन चुका है और इस खूनी जंग में अब तक सात लोगों की मौतें हो चुकी हैं और 300 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।
विस्तार
कंगाली की चौखट पर खड़ा पाकिस्तान एक बार फिर हिंसा की आग की लपटों से झुलस रहा है। पाकिस्तान की सड़कों पर बीते तीन दिनों से कट्टर इस्लामी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक के समर्थक आतंक मचाए हुए हैं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की वजह से पाकिस्तान जंग का अखाड़ा बन चुका है और इस खूनी जंग में अब तक सात लोगों की मौतें हो चुकी हैं और 300 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।
पाकिस्तान में जो हिंसा की लपटें उठ रहीं हैं, उसके केंद्र में फ्रांस की पत्रिका में पिछले साल पैगंबर मोहम्मद के छपे वह विवादित कार्टून हैं, जिसे लेकर इमरान सरकार को फ्रांस के राजदूत को वापस भेजे जाने को लेकर कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान ने डेडलाइन दी थी। लेकिन प्रदर्शन से पहले ही पार्टी के प्रमुख साद हुसैन रिज्वी की गिरफ्तारी ने पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए।सड़कों पर लोगों को हुजूम दिख रहा है। माना जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए इमरान सरकार ने सेना का भी सहारा लिया है और सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच भी हिंसक झड़प की खबरें हैं। इससे जुड़े कई वीडियो-फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हैं।
टीएलपी पर लगा प्रतिबंध
पाकिस्तान ने कट्टर इस्लामी पार्टी के समर्थकों की लगातार तीसरे दिन कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ झड़प के बाद तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान को वर्ष 1997 के आतंकवाद रोधी अधिनियम के नियम 11-बी के तहत प्रतिबंधित कर दिया है। गृह मंत्री शेख राशिद अहमद ने बताया कि मैंने तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) पर 1997 के आतंकवाद रोधी अधिनियम के नियम 11-बी के तहत प्रतिबंध लगाने के लिए पंजाब सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उन्होंने यह भी बताया कि बीते दो दिन में प्रदर्शनकारियों के साथ झड़पों में कम से कम दो पुलिस अधिकारियों की मौत हो चुकी है जबकि 340 से ज्यादा घायल हुए हैं।
पाकिस्तान में बवाल की वजह
तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) समर्थकों ने फ्रांस की पत्रिका में पिछले साल पैगंबर मोहम्मद का कार्टून प्रकाशित करने के लिए फ्रांस के राजदूत को निष्कासित करने के वास्ते इमरान खान सरकार को 20 अप्रैल तक का समय दिया था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने सोमवार को पार्टी के प्रमुख साद हुसैन रिज्वी को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद टीएलपी ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
कौन है साद हुसैन रिज्वी?
वर्ष 2018 के आम चुनाव में 25 लाख वोट हासिल करने वाली टीएलपी ने साद रिज्वी की गिरफ्तारी के बाद देशभर में सड़कों को बंद कर दिया। साद रिजवी खादिम हुसैन रिज्वी का बेटा है, जिनकी कुछ महीने पहले मौत हो चुकी है। मंत्री ने यह भी कहा कि सभी सड़कों को खाली करा लिया गया है और प्रमुख शहरों के मुख्य चौराहों से प्रदर्शनकारियों को हटाया जा चुका है।
हजारों कार्यकर्ताओं को डाला जेल में
कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने देशभर में टीएलपी के 2,000 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने का दावा किया है। इनमें से अधिकतर को पंजाब से गिरफ्तार किया गया। खास बात यह है कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सरकार ने पिछले साल नवंबर में फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित करने पर सहमति जताते हुए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
टीएलपी कब सुर्खियों में आया था
टीएलपी ने पिछले साल नवंबर में कार्टून के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था। हालांकि फरवरी तक राजदूत को निष्कासित करने का आश्वासन दिए जाने के बाद मामला शांत हो गया था और समझौते को 20 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया। सरकार ने टीएलपी के खिलाफ कार्रवाई की मांगों को लेकर संसद में एक विधेयक लाने का वादा किया था। टीएलपी वर्ष 2017 में चर्चा में आया था, जब उसने इस्लामाबाद के निकट फैसलाबाद चौराहे पर तीन सप्ताह तक विशाल विरोध प्रदर्शन किया था। तत्कालीन सरकार द्वारा कानून मंत्री को हटाए जाने के बाद टीएलपी ने शहर से लॉकडाउन हटाया था।