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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद: भारत ने कहा- पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया को ज्यादा समय के लिए टाला नहीं जा सकता
Fri, 25 Jun 2021 07:27 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र
पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 25 Jun 2021 07:27 AM IST
सार
- भारतीय विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) विकास स्वरूप ने सभी पक्षकारों से इस्राइल और फलस्तीन के बीच तनाव को कम करने और उकसावे से बचने का आग्रह किया
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विकास स्वरूप, सचिव, विदेश मंत्रालय (पश्चिम)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
भारत ने बृहस्पतिवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा कि पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया को ज्यादा समय के लिए टाला नहीं जा सकता। इसके साथ ही भारत ने इस्राइल और फलस्तीन के बीच सीधी बातचीत बहाल करने की जरूरत को भी रेखांकित किया।
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पश्चिम एशिया (फलस्तीन के मुद्दे समेत) पर हुई बैठक को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) विकास स्वरूप ने सभी पक्षकारों से तनाव को कम करने और उकसावे से बचने का आग्रह किया।
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विकास स्वरूप ने कहा कि 'फिलीस्तीनी लोगों को तत्काल मानवीय सहायता, विशेष रूप से गाजा में, सत्यापित चैनलों के माध्यम से पहुंचनी चाहिए। हम मानवीय सहायता के क्षेत्र में इस्राइल और फिलिस्तीनी अधिकारियों के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान करते हैं।'
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Immediate humanitarian assistance to Palestinian people, particularly in Gaza, should reach through verified channels. We call for reinforced cooperation between the Israeli and Palestinian authorities in the area of humanitarian aid: Vikas Swarup, Secretary (West), MEA
— ANI (@ANI) June 24, 2021
उन्होंने कहा, ‘‘शांति प्रक्रिया को लंबे समय तक टाला नहीं जा सकता। गतिरोध के कारण पक्षकारों के बीच विश्वास में कमी ही आती है और हिंसा की आशंका को बढ़ावा मिलता है।’ स्वरूप ने पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया को तत्काल बहाल करने तथा इस्राइल और फलस्तीन के बीच सीधी बातचीत की जरूरत पर बल दिया।
उन्होंने कहा, ‘भारत ‘क्वार्टेट’ समेत सभी राजनयिक प्रयासों का समर्थन करता है जिनका लक्ष्य इस बातचीत को बहाल करने और शांति प्रक्रिया के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक प्रतिबद्धता को मजबूत करना है।’ स्वतंत्र और लोकतांत्रिक फलस्तीन की स्थापना के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए स्वरूप ने कहा कि सार्थक और दीर्घकालिक शांति के लिए दो देश के समाधान का कोई ‘विकल्प नहीं है'।