फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Uyghurs detained in Thailand say they face deportation, persecution in China

Uyghurs: थाईलैंड से चीन प्रत्यर्पण की आशंका से सहमे उइगर, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और बड़े देशों से मदद की अपील

Sat, 11 Jan 2025 10:51 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 11 Jan 2025 10:51 PM IST
सार

Uyghurs: थाईलैंड में हिरासत में रखे गए उइगरों के एक समूह ने विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को पत्र लिखा है और उनसे मदद की अपील की है। चीन प्रत्यर्पण की आशंका को लेकर पत्र में उन्होंने कहा, हमें जेल में डाला जा सकता है और हमारी जान भी जा सकती है। 

विज्ञापन
Uyghurs detained in Thailand say they face deportation, persecution in China
उइगर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई

विस्तार

थाईलैंड में 43 उइगर पुरुषों के एक समूह ने दावा किया है कि थाई सरकार उन्हें चीन भेजने की तैयारी कर रही हैं, जहां उन्हें अत्याचार, यातना और हत्या का सामना करना पड़ सकता है। इससे उनके परिवार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चिंता बढ़ गई है। थाईलैंड में इन उइगरों को एक दशक पहले हिरासत में लिया गया था। 

विज्ञापन


उइगरों के समूह ने एक पत्र में देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद की अपील की है। पत्र में कहा गया, हमें जेल में डाला जा सकता है और हमारी जान भी जा सकती है। हम सभी मानवाधिकार संगठनों से अपील करते हैं कि वे हमारी मदद करें और हमें इस संकट से बचाएं। 
विज्ञापन


उइगर चीन के शिनजियांग क्षेत्र में एक मुस्लिम समुदाय है। चीनी सरकार ने इस समुदाय पर भारी दमन किया है, जिसमें हजारों उइगरों को कैद किया गया और उनके खिलाफ अत्याचार किया गया। कुछ पश्चिमी देशों ने इसे नरसंहार करार दिया।   
विज्ञापन
विज्ञापन

 
इन उइगरों का कहना है कि वह चीन में अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसके कारण उन्हें दमन और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। साल 2014 में 300 उइगर थाईलैंड पहुंचे थे और बाद में थाई अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 2015 में थाईलैंड ने 109 उइगरों को चीन वापस भेज दिया था, जिसका अंतरराष्ट्रीय पर काफी विरोध हुआ था। 

 173 उइगरों का एक अन्य समूह तुर्किये भेज दिया था। इसमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे। वहीं, 53 उइगर थाईलैंड में आव्रजन हिरासत में हैं। इनमें से कुछ ने शरणार्थी बनने के लिए आवेदन किया है। लेकिन थाई सरकार ने उन्हें संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) से मिलने की अनुमति नहीं दी। इसके अलावा, इनमें से पांच उइगरों की हिरासत में मौत हो चुकी हैं, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। 
 
हिरासत में रखे गए इन उइगरों का कहना है कि उन्हें बहुत खराब परिस्थितियों में रखा गया है। उन्हें सही खाना नहीं मिलता, उन्हें गंदे और छोटे सेल में रखा जाता है, जहां सफाई का कोई सामान नहीं दिया जाता और वे अपने परिवारों या वकीलों से भी संपर्क नहीं कर सकते। इसके अलावा, कुछ दिन पहले उन्हें थाईलैंड के अधिकारियों ने स्वैच्छिक प्रत्यर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा, जिससे वे डर गए हैं। 

मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इन उइगरों को चीन भेजा गया, तो वे अत्याचार, उत्पीड़न और यहां तक कि मौत का शिकार हो सकते हैं। उइगर मानवाधिकार परियोजना के शोध और प्रचार निदेशक  पीटर इरविन ने कहा, इन उइगरों  पर कोई अपराध का आरोप नहीं है। उनका अधिकार है कि उन्हें प्रत्यर्पित न किया जाए और वे चीन से भागकर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी सुरक्षा का अधिकार रखते हैं। 


संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मामले में थाईलैंड से अपील की है कि वे इन उइगरों को सुरक्षा प्रदान करें और उन्हें वापस न भेजें। इसके अलावा, थाईलैंड और चीन के विदेश मंत्रालयों ने अभी तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इन उइगरों के परिजन भी चिंतित हैं और उनका कहना है कि वे थाईलैंड सरकार पर दबाव बना रहे कि उनके परिजनों को चीन न भेजें। बिलाल अलबेट थाईलैंड में बंद अपने भाई को लेकर चिंतित हैं। वह कहते हैं, हम सभी एक जैसी स्थिति में हैं। सब चिंता और डर में हैं। दुनिया की सभी देश यह सब जानते हैं, लेकिन वे चीन के दबाव में डरकर कुछ नहीं कह रहे हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed