फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   USA president joe biden signed resolve tibet act amid china warning support Tibetans

USA: चीन की चेतावनी के बावजूद बाइडन ने रिजॉल्व तिब्बत एक्ट पर किए हस्ताक्षर, विवाद के शांतिपूर्ण हल पर जोर

Sat, 13 Jul 2024 11:31 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 13 Jul 2024 11:31 AM IST
सार

 चीन ने इस कानून को लेकर अमेरिका को चेतावनी दी थी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से इस कानून पर हस्ताक्षर न करने को कहा था। हालांकि बाइडन ने चीन के विरोध को दरकिनार कर रिजॉल्व तिब्बत एक्ट पर हस्ताक्षर करने का फैसला किया। 

विज्ञापन
USA president joe biden signed resolve tibet act amid china warning support Tibetans
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : पीटीआई

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने तिब्बत विवाद का शांतिपूर्ण तरीके से हल निकालने के लिए रिजॉल्व तिब्बत एक्ट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। चीन ने इस कानून को लेकर अमेरिका को चेतावनी दी थी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से इस कानून पर हस्ताक्षर न करने को कहा था। हालांकि बाइडन ने चीन के विरोध को दरकिनार कर रिजॉल्व तिब्बत एक्ट पर हस्ताक्षर करने का फैसला किया।
विज्ञापन


क्या है रिजॉल्व तिब्बत कानून
'रिजॉल्व तिब्बत कानून' में कहा गया है कि अमेरिका की नीति है कि तिब्बत मुद्दे को बिना किसी पूर्व शर्त के, बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए। यह कानून तिब्बत के बारे में चीन के झूठ से निपटने की कोशिश की गई है और चीन से तिब्बत के इतिहास के बारे में गलत और भ्रामक प्रचार बंद करने की भी मांग करता है। साथ ही यह कानून चीन के भ्रामक दावों से निपटने के लिए अमेरिका के विदेश विभाग को भी ताकत देता है। कानून में तिब्बती लोगों के अलग धार्मिक, भाषाई और ऐतिहासिक पहचान को परिभाषित किया गया है। इसमें कहा गया है कि चीन की नीतियां तिब्बती लोगों को अपनी जीवन शैली को संरक्षित करने की क्षमता को दबाने की कोशिश कर रही हैं। तिब्बत के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा ने बार-बार चीन से तिब्बती लोगों को स्वायत्ता देने की अपील की है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत लोगों को आत्मनिर्णय लेने का अधिकार है। 
विज्ञापन


अमेरिका की संसद से जब यह कानून पारित हुआ था तो अमेरिकी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत आकर दलाई लामा से मुलाकात भी की थी। अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति के प्रमुख माइकल मैक्कॉल ने कहा कि यह कानून तिब्बत के लोगों को अपने भविष्य का प्रभारी बनाने में मदद करेगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


चीन ने दी थी धमकी
चीन रिजॉल्व तिब्बत एक्ट का विरोध कर रहा है। चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा था कि वह इस विधेयक पर हस्ताक्षर न करें। चीन के विदेश विभाग के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा था कि 'कोई भी ताकत जो शिजांग को अस्थिर करने या फिर चीन के दबाने की कोशिश करेगी, वह सफल नहीं होगी। अमेरिका को विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए। चीन अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और अपने हितों के लिए सख्त कदम उठाएगा।' चीन तिब्बत को शिजांग कहकर संबोधित करता है। चीन ने इस साल अप्रैल में कहा था कि वह सिर्फ दलाई लामा के प्रतिनिधियों से बात करेगा न कि निर्वासन में चल रही तिब्बत सरकार से। 


चीन ने दलाई लामा की तिब्बत को स्वायत्ता देने की मांग भी खारिज कर दी है। चीन के तिब्बत पर कब्जे के बाद साल 1959 में 14वें दलाई लामा तिब्बत से भागकर भारत आ गए थे। उसके बाद से ही दोनों पक्षों में संबंध तनावपूर्ण हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed