USA News: अमेरिका के फोर्ट बेंड काउंटी में तीन भारतीय-अमेरिकी जज बने
रविवार को भारतीय मूल की जूली ए मैथ्यू, केपी जॉर्ज और सुरेंद्रन के पटेल ने जज के तौर पर शपथ ली। जूली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं, जो जज चुनी गईं।
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अमेरिकी राज्य टेक्सस में स्थिति 240वें न्यायिक जिले (फोर्ट बेंड काउंटी) में तीन भारतवंशी जज चुने गए हैं। प्रतिव्यक्ति आय और पारिवारिक आय के लिहाज से यह अमेरिका का सबसे अमीर इलाका है। यहां प्रतिव्यक्ति औसत सालाना आाय 95,389 डॉलर है, जबकि औसत पारिवारिक आय 105,944 डॉलर है। यहां रविवार को भारतीय मूल की जूली ए मैथ्यू, केपी जॉर्ज और सुरेंद्रन के पटेल ने जज के तौर पर शपथ ली। जूली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं, जो जज चुनी गईं। उन्होंने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी को हराकर दूसरी बार काउंटी जज का चुनाव जीता है। एजेंसी
इन्सानी शव से अब खाद बनाएगा अमेरिका
अब इन्सानों के मृत शरीर को जलाने व दफनाने की जगह खाद बनाई जाएगी। अमेरिका के न्यूयॉर्क समेत छह शहरों में ऐसा देखने को मिलेगा। साल 2019 में वाशिंगटन मानव खाद को वैध बनाने वाला अमेरिका का पहला राज्य बना था। इसके बाद बाद कोलोराडो, ओरेगन, वर्मोंट और कैलिफोर्निया ने भी ऐसा किया।
न्यूयॉर्क में अब कोई भी व्यक्ति जीवित रहते अपनी मृत्यु के बाद अपने शरीर को मिट्टी में बदलने का विकल्प चुन सकता है। पर्यावरणविदों के मुताबिक, इसे दफनाने या दाह संस्कार की अपेक्षा पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में देखा जाता है। इस प्रक्रिया को नेचुरल कार्बनिक रिडक्शन के रूप में भी जाना जाता है। इसमें किसी शव को एक कंटेनर में बंद कर दिया जाता है, जो अगले कई हफ्तों में विघटित होती है और खाद में तब्दील हो जाती है। एजेंसी