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USA: अफगानिस्तान से सेना वापसी के फैसले पर घिरी बाइडन सरकार, संसदीय समिति ने दी कानूनी कार्रवाई की धमकी
Tue, 09 May 2023 08:11 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 09 May 2023 08:11 AM IST
सार
संसदीय समिति और उसके अध्यक्ष मैक्कॉल ने मांग की है कि सरकार इस संबंध में हुई बातचीत का खुलासा करे और ये भी बताए कि खूफिया रिपोर्ट पर सरकार ने क्या जवाब दिया था?
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अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन
- फोटो : twitter.com/SecBlinken
विस्तार
साल 2021 में अमेरिका सेना ने अफगानिस्तान छोड़ दिया था लेकिन जिस जल्दबाजी में अमेरिका की जो बाइडन सरकार ने यह फैसला किया था, उससे पूरी दुनिया हैरान थी। अब खबर आ रही है कि इस फैसले को लेकर बाइडन सरकार और अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन घिर सकते हैं। दरअसल अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष माइकल मैक्कॉल ने धमकी दी है कि एंटनी ब्लिंकेन के खिलाफ संसद की अवमानना के आरोप में कार्रवाई की जा सकती है।
संसदीय समिति ने मांगे ये जवाब
विदेश मामलों की संसदीय समिति ने अपनी जांच में पाया है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी को लेकर खूफिया रिपोर्ट में इस फैसले की आलोचना की गई थी और कहा गया था कि इस फैसले से अफगानिस्तान में फिर से तालिबान की सत्ता काबिज हो सकती है। इसके बावजूद बाइडन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही और आखिरकार हुआ भी वही, जिसका डर था। अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान काबिज हो चुका है। अब संसदीय समिति और उसके अध्यक्ष मैक्कॉल ने मांग की है कि सरकार इस संबंध में हुई बातचीत का खुलासा करे और ये भी बताए कि खूफिया रिपोर्ट पर सरकार ने क्या जवाब दिया था?
मैक्कॉल ने दी धमकी
मैक्कॉल ने धमकी दी है कि अगर विदेश मंत्री गुरुवार शाम छह बजे तक जवाब नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की अवमानना के आरोप में कार्रवाई करेंगे। मैक्कॉल ने एंटनी ब्लिंकन को कानूनी कार्रवाई की भी धमकी दी है। मैक्कॉल ने इस संबंध में बीती पांच मई को विदेश विभाग को एक पत्र लिखा है।
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बता दें कि अमेरिका में एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें विदेश विभाग के कार्यकर्ता सीधे वरिष्ठ अधिकारियों को विदेश नीति के संबंध में सूचित कर सकते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस व्यवस्था के तहत ही वरिष्ठ अधिकारियों को बताया गया था कि अगर अमेरिकी सेना की अफगानिस्तान से वापसी होती है तो तालिबान फिर से काबुल की सत्ता पर काबिज हो सकता है।
अफगानिस्तान में फिर काबिज हुआ तालिबान
अमेरिकी संसदीय समिति का कहना है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की अचानक वापसी की वजह से वह देश फिर से आतंकियों की सुरक्षित पनाहगाह बन गया है। इससे अमेरिका के विरोधियों का हौसला बढ़ा है। बता दें कि दो दशक की उपस्थिति के बाद अगस्त 2021 में अचानक अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस बुला ली थी। इससे अफगानिस्तान में काफी अराजकता और हंगामा हुआ था। इसके बाद से अफगानिस्तान में हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। साथ ही आतंकवाद फिर से अफगानिस्तान में अपने पैर जमा चुका है।
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संसदीय समिति ने मांगे ये जवाब
विदेश मामलों की संसदीय समिति ने अपनी जांच में पाया है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी को लेकर खूफिया रिपोर्ट में इस फैसले की आलोचना की गई थी और कहा गया था कि इस फैसले से अफगानिस्तान में फिर से तालिबान की सत्ता काबिज हो सकती है। इसके बावजूद बाइडन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही और आखिरकार हुआ भी वही, जिसका डर था। अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान काबिज हो चुका है। अब संसदीय समिति और उसके अध्यक्ष मैक्कॉल ने मांग की है कि सरकार इस संबंध में हुई बातचीत का खुलासा करे और ये भी बताए कि खूफिया रिपोर्ट पर सरकार ने क्या जवाब दिया था?
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मैक्कॉल ने दी धमकी
मैक्कॉल ने धमकी दी है कि अगर विदेश मंत्री गुरुवार शाम छह बजे तक जवाब नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की अवमानना के आरोप में कार्रवाई करेंगे। मैक्कॉल ने एंटनी ब्लिंकन को कानूनी कार्रवाई की भी धमकी दी है। मैक्कॉल ने इस संबंध में बीती पांच मई को विदेश विभाग को एक पत्र लिखा है।
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बता दें कि अमेरिका में एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें विदेश विभाग के कार्यकर्ता सीधे वरिष्ठ अधिकारियों को विदेश नीति के संबंध में सूचित कर सकते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस व्यवस्था के तहत ही वरिष्ठ अधिकारियों को बताया गया था कि अगर अमेरिकी सेना की अफगानिस्तान से वापसी होती है तो तालिबान फिर से काबुल की सत्ता पर काबिज हो सकता है।
अफगानिस्तान में फिर काबिज हुआ तालिबान
अमेरिकी संसदीय समिति का कहना है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की अचानक वापसी की वजह से वह देश फिर से आतंकियों की सुरक्षित पनाहगाह बन गया है। इससे अमेरिका के विरोधियों का हौसला बढ़ा है। बता दें कि दो दशक की उपस्थिति के बाद अगस्त 2021 में अचानक अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस बुला ली थी। इससे अफगानिस्तान में काफी अराजकता और हंगामा हुआ था। इसके बाद से अफगानिस्तान में हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। साथ ही आतंकवाद फिर से अफगानिस्तान में अपने पैर जमा चुका है।