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US vs Iran: अब दुनिया की महाशक्तियां टकराएंगी, ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद अब आगे क्या?

Mon, 23 Jun 2025 08:18 AM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 23 Jun 2025 08:18 AM IST
सार

सच यह है कि रूस और चीन ने विश्व में अमेरिका के बढ़ते दबदबे का खेल फंसा दिया है। दोनों देश मध्य पूर्व में इस्राइल और अमेरिका के दबदबे को खारिज करने की रणनीति तैयार में जुट गए हैं।

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US vs Iran: Now the world's superpowers will clash, what next after US attacks on Iranian nuclear sites?
ईरान पर अमेरिका का हमला - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

ईरान का परमाणु संयंत्र रूस के सहयोग और उसकी डिजाइन पर आधारित है। रूसी परमाणु वैज्ञानिक युद्ध के हालात में भी ईरान में हैं। इस बीच अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केन्द्रों पर नतांज, फोर्डो और इस्फाहान को निशाना बनाया। रूस ने अमेरिका के हमले की खिल्ली उड़ा दी है। चीन, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, समेत सभी की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। जाने इसके बाद क्या अब दुनिया की महाशक्तियां टकराएंगी?

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सच यह है कि रूस और चीन ने विश्व में अमेरिका के बढ़ते दबदबे का खेल फंसा दिया है। दोनों देश मध्य पूर्व में इस्राइल और अमेरिका के दबदबे को खारिज करने की रणनीति तैयार में जुट गए हैं। अमेरिका में रह चुके भारत के एक राजदूत कहते हैं कि बड़ा असमंजस वाला दौर चल रहा है। दुनिया में मची उथल-पुथल है। कई युद्ध चल रहे हैं। अभी शांत होते नहीं दिखाई दे रहे हैं। जैसे वर्ल्ड ऑर्डर बिगड़ता जा रहा हो। सूत्र का कहना है कि अब बात इस्राइल और ईरान तक नहीं रह गई। अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया है। रूस समेत तमाम देशों ने इसे संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और अंतराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना है। टकराव की संभावना और जटिलताएं बढ़ गई हैं।
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रूस ने कहा- ईरान और इस्राइल दोनों के परमाणु कार्यक्रम की जांच हो
रूस के परमाणु सुरक्षा परिषद के डिप्टी दैमित्री मेदवेदेव ने बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने अमेरिका के आरोपों वाला बम इजरायल पर दाग दिया है। उसके परमाणु कार्यक्रम की जांच की मांग की है। मेदवेदेव का कहना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन इस्राइल का गोपनीय परमाणु कार्यक्रम चल रहा है। मेदवेदेव ने मांग की है कि इस्राइल के परमाणु हथियार कार्यक्रम भी संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी आईएईए जांच करे। मेदवेदेव ने दोनों देशों के परमाणु कार्यक्रम पर रिपोर्ट की मांग की है। गौरतलब है कि अमेरिका और इस्राइल ने ईरान का परमाणु हथियार विकसित करने का आरोप लगाया और उसके परमाणु संयंत्रों, वैज्ञानिकों पर हमले कर रहे हैं। इसी तरह से अमेरिका और बहुराष्ट्रीय सेनाओं ने इराक पर परमाणु हथियार विकसित करने का आरोप मढ़कर वहां सैन्य कार्रवाई की थी। कार्रवाई के बाद इराक में परमाणु हथियार के कोई सबूत नहीं मिले थे।
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कौन हैं  दैमित्री मेदवेदेव?
दैमित्री मेदवेदेव रूस के राष्ट्रपति पुतिन के भरोसेमंद हैं। जब पुतिन ने राष्ट्रपति पद छोड़ा था तो प्रधानमंत्री बने थे तो राष्ट्रपति दैमित्री बने थे। इसके बाद रूस के संविधान की बाध्यता पूरी होने के बाद मेदवेदेव प्रधानमंत्री और पुतिन राष्ट्रपति बने। मेदवेदेव रूस के परमाणु सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष हैं। वैसे भी रूस में चाहे दैमित्री मेदवेदेव हों या विदेश मंत्री सर्गे लावरोव बिना पुतिन के संकेत के कोई भाषा नहीं बोलते। राष्ट्रपति पुतिन ने भी ईरान-इजरायल युद्ध के गलत तरफ मुड़ जाने की चिंता जताई थी। पुतिन लगातार ईरान के हुक्मरान के संपर्क में हैं। रूस का इस्राइल से भी संबंध ठीक है और बेन्जामिन नेतेन्याहू के भी संपर्क में हैं। इस बारे में रूस के राष्ट्रपति और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप में चर्चा हुई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी विचार साझा हुआ और पुतनि ने खुद बताया कि यूएई, सऊदीअरब समेत अन्य से भी उन्होंने शांति के बाबत साझा किया है।

फोर्डो का कुछ नहीं बिगड़ा? रूस ने उड़ाई खिल्ली
ईरान के परमाणु संयंत्र पर अमेरिकी हमले के बाद रूस ने उसके सैन्य प्रहार की खिल्ली उड़ाई। रूस का कहना है कि अमेरिका के इस हमले में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का कुछ नहीं बिगड़ा। फोर्डो परमाणु संयंत्र, ईरान का यह परमाणु केंद्र पहाड़ी क्षेत्र में जमीन से बहुत गहराई में बताया जाता है। कहा जा रहा है कि इस पर अमेरिका के शक्तिशाली बम प्रहार का कोई असर नहीं हुआ। देमित्री मेदवेदेव अमेरिका के इस प्रयास को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून तथा ईरान की संप्रभुता पर हमला जरूर मान रहे हैं। वह अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप को ‘शांति के राष्ट्रपति’ से उन्हें ‘युद्ध शुरू करने वाला राष्ट्रपति’ कहकर आलोचना करने (खिल्ली उड़ाने) से नहीं चूक रहे हैं। दवेदेव यही नहीं रुकते। वह दावा कर रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार देने के लिए कई देश तैयार हैं। ईरान ने भी यही आवाज उठाई है। सुयुक्त राष्ट्र संघ में भी उसने अपना दावा दाखिल कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस भी ताजा हालात को लेकर काफी चिंतति हैं। रूस के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अघारची मास्को जा रहे हैं। वह वहां रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है।

ईरान ने अब क्या किया?
परमाणु केंद्रों पर हमले के बाद ईरान ने तीन काम किए। 1. इस्राइल पर अपनी घातक हाइपरसोनिक मिसाइल दागी और अपने परमाणु केंद्र पर हुए हमले का वीडियो जारी किया। अमेरिका को भी अंजाम भुगतने की चेतावनी दे दी। उसके 100 से अधिक सैन्य अड्डों पर खतरा मंडराने लगा है। इसे देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। 2. ईरान ने संयुक्त राष्ट्र संघ में अपनी संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाकर आवाज तेज की। मित्र और सहयोगी देशों से संपर्क तेज किया। दुनिया के देशों के सामने वस्तुस्थिति को रखने का प्रयास किया। 3.अंरतराष्ट्रीय मानदंड के अनुरुप परमाणु कार्यक्रम जारी रखने का भरोसा देकर  रूस-चीन जैसे देशों से संकट की घड़ी में भरोसा और सहयोग का प्रयास शुरू कर दिया है। ईरान ने साफ किया कि वह न दबेगा, न झुकेगा।

इस्राइल और अमेरिका .....क्या होने वाला है?
इस्राइल अपने अस्तित्व से लेकर अब तक के सबसे जटिल दौर में फंस गया है। सबसे मंहगा, उसके अस्तित्व के लिए खतरा बन गए युद्ध से जूझ रहा है। तेल अवीव, हाइफा समेत तमाम शहर उसके ईरान की घातक मिसाइलों की मार झेल रहे हैं। स्कूल, शिक्षण संस्थान सब बंद हैं। रह-रहकर साइरन बच रहे हैं और पांच मिनट के भीतर लोगों को बंकर में चले जाने की हिदायत दी गई है। पहले यह समय 25 मिनट का होता था। इस्राइल ने कहा कि वह ईरान में आपरेशन जारी रखेगा, उसके कई लक्ष्य अभी बाकी हैं। इस्राइल के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतेन्याहू ने अमेरिका के ईरान पर हमले का स्वागत किया है।

इस्राइल का भरोसे का सहयोगी अमेरिका ईरान पर हमले के बाद अब उससे परमाणु वार्ता, शांति की अपील जैसी कोशिशों में जुटा है। सामरिक और रणनीतिक मामलों के जानकार कहते हैं कि अमेरिका कई मोर्चे पर तैयारी कर रहा है। वह ईरान से अपनी रक्षा, वार्ता और जरूरत पड़ने पर भीषण आक्रमण की रणनीति पर साथ-साथ काम कर रहा होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान शांति के रास्ते पर लौट आए तो अच्छा है। नहीं मानेगा तो हमले और भीषण होंगे।


अंत में सवाल ‘ग्रेट अमेरिका’ और ‘ग्रेट रूस’ का है
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप अपने देश को ग्रेट अमेरिका बनाना चाहते हैं। राष्ट्रपति पुतिन रूस को ‘ग्रेट रूस’। प्रतिबद्धता और महत्वाकांक्षा दोनों की है। चीन खुद को महाशक्ति बनाने की महत्वाकांक्षा पाले है। पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि पहले ‘नं दो’ से रूस खिसके, तब चीन का नं आए। सारा झगड़ा संसाधनों और मध्य पूर्व में अभी दबदबा का है। अमेरिका अपने मंसूबे पूरा करने में इस्राइल को साथ रखता है। रूस के साथ पहले सीरिया, ईरान आदि। सीरिया में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। ईरान संघर्ष से जूझ रहा है। मध्य पूर्व में संतुलन रूस की प्राथमिकता है। चीन और रूस का समीकरण ठीक है। चीन की चिंता ईरान में निवेश, ऊर्जा सुरक्षा तथा मध्य पूर्व में अपने प्रसार की है। देखना है कि दुनिया की तीन शक्तियां आगे सतरंज की कौन सी बाजी चलती हैं।

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