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दूर हुईं रुकावटें!: ईरान परमाणु डील को पुनर्जीवित करने के बहुत करीब पहुंच गई है वियना वार्ता

Sat, 05 Mar 2022 03:54 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 05 Mar 2022 03:54 PM IST
सार

ईरानी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक समझौते की राह में एक और रुकावट ईरान की यह मांग है कि उसके इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को अमेरिका आतंकवाद की अपनी लिस्ट से हटाए। फिलहाल अमेरिका इसके लिए तैयार नहीं है...

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US State Department spokeswoman said, Significant progress has been made towards the Iran nuclear deal and close to a possible settlement
ईरान परमाणु संयंत्र - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

ईरान परमाणु डील को पुनर्जीवित करने पर समझौता हो जाने की उम्मीद बढ़ गई है। यहां अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों के अंदर इस समझौते पर दस्तखत हो सकते हैं। ऐसी खबर है कि वियना मे चल रही वार्ता में समझौते की राह में मौजूद आखिरी रुकावटें अब दूर होने वाली हैं।

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ईरान और छह अन्य देशों के बीच परमाणु समझौता 2015 में हुआ था। उसका मकसद ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकना था। दूसरी तरफ से जिन देशों ने समझौते पर दस्तखत किए, उनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देश और जर्मनी थे। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, और चीन सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं। 2017 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश को इस समझौते से अलग कर लिया और ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए। आरोप है कि उसके बाद से ईरान ने भी समझौते का उल्लंघन शुरू कर यूरेनियम का संवर्धन कर शुरू कर दिया।

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रोसी की यात्रा से तय होगा डील का भविष्य

जो बाइडन के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद समझौते को पुनर्जीवित करने के लिए पिछले साल फिर से बातचीत शुरू हुई थी। अब खबर है कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी रफायल ग्रोसी शनिवार को तेहरान आएंगे। यहां उनकी कोशिश बची-खुची रुकावटों को दूर करने की होगी। बताया जाता है कि ईरान की कथित अघोषित परमाणु गतिविधियों के निरीक्षण के सवाल पर अभी भी मतभेद कायम हैं। ईरान जोर डाल रहा है कि ऐसे निरीक्षण की योजना छोड़ दी जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि रोसी की यात्रा का क्या नतीजा रहता है, उससे ही परमाणु डील का भविष्य तय होगा।

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वियना वार्ता में भाग ले रहे देशों का भी कहना है कि समझौता होने के करीब है, लेकिन अभी कुछ रुकावटें बाकी हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जलिना पोर्टर एक सम्मेलन में कहा- ‘समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। हम संभावित समझौते के करीब हैं, लेकिन अभी कई दिक्कतें दूर होनी बाकी हैं।’ ब्रिटिश वार्ताकार स्टीफाइन अल-काद ने एक ट्विट में कहा- हम बहुत करीब हैं, लेकिन कुछ कदम और चलना है। फ्रांस के वार्ताकार फिलिप इरेरा ने सोशल मीडिया पर वार्ताकारों के यूरोपीय दल के साथ अपना एक फोटो पोस्ट किया और 11 महीने की उनकी मेहनत के लिए उनका आभार जताया। इसे इस बात का संकेत समझा गया है कि समझौता अब होने ही वाला है।

आतंकवाद की अपनी लिस्ट से हटे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स

लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि तमाम सकारात्मक संदेशों के बावजूद तब तक कोई कुछ नहीं कह सकता, जब तक बचे मुद्दे भी हल नहीं हो जाते। जानकारों का कहना है कि अभी सबसे बड़ी रुकावट अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की प्रस्तावित जांच का मुद्दा है। बताया जाता है कि शनिवार को ग्रोसी तेहरान में इस मुद्दे पर ऐसा फॉर्मूला तैयार करने की कोशिश करेंगे, जो सभी संबंधित पक्षों को स्वीकार्य हो सके।



ईरानी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक समझौते की राह में एक और रुकावट ईरान की यह मांग है कि उसके इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को अमेरिका आतंकवाद की अपनी लिस्ट से हटाए। फिलहाल अमेरिका इसके लिए तैयार नहीं है।

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