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भारत को प्रतिद्वंद्वी की तरह देखता है चीन : रिपोर्ट

Fri, 20 Nov 2020 03:01 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, वाशिंगटन।
एजेंसी, वाशिंगटन। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 20 Nov 2020 03:01 AM IST
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US State Department said in a report that China sees India as a rival
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत बहुत तेजी से विकास कर रहा है और चीन उसकी तरक्की को प्रतिद्वंद्वी की तरह देखता है। चीन चाहता है कि भारत के रिश्ते अमेरिका और दूसरे लोकतांत्रिक देशों से खराब हो जाएं। इस रिपोर्ट में जोर देकर यह भी कहा गया है कि चीन, अमेरिका को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश की जगह से हटाना चाहता है।

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तीन नवंबर को हुए अमेरिकी चुनाव के बाद ट्रंप प्रशासन के जाने और नए राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के बीच सत्ता हस्तांतरण से पहले विस्तृत नीतिगत दस्तावेज में कहा गया है कि चीन इस क्षेत्र में कई देशों की सुरक्षा, स्वायत्तता और अर्थव्यवस्था के हितों को नुकसान कर रहा है।
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70 पन्नों की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन भारत की तरक्की को प्रतिद्वंद्वी की तरह देखता है और आर्थिक मोर्च पर अपनी महत्वाकांक्षाएं पूरी करने के लिए इसका इस्तेमाल नई दिल्ली की अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया व अन्य लोकतांत्रिक देशों के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी को खराब करने में करना चाहता है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, चीन इलाके में आसियान देशों के सदस्य देशों और प्रशांत महासागर के द्वीपों की स्वायत्तता, सुरक्षा और आर्थिक हितों को भी नुकसान पहुंचा रहा है।

खुद को शक्ति का केंद्र बनाना चाहता है चीन
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने दुनिया को एक प्रतिस्पर्धा के युग में धकेल दिया है। इसके तहत चीन पूरी दुनिया में खुद को शक्ति का केंद्र बनाना चाहता है और यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहा है कि उसके उदय को कोई नहीं रोक सकता है।

उसके निशाने पर जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड और फिलीपींस के अलावा भारत, वियतनाम, इंडोनेशिया और ताइवान जैसे रणनीतिक साझेदार देश भी शामिल हैं। रिपोर्ट में भारत-चीन तनाव संबंधों का भी जिक्र है।

चीन की हवाई सीमा में घुसे अमेरिकी बमवर्षक विमान
अमेरिका ने चीन के हवाई रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) में लंबी दूरी के दो बमवर्षक विमान भेजे हैं। इससे दोनों देशों में एक बार फिर तनाव भड़क उठा है। इस क्षेत्र में चीनी नौसेना बड़े स्तर पर युद्धाभ्यास कर रही है। एविएशन ट्रैकर एयरक्राफ्ट स्पॉट्स के मुताबिक, अमेरिका ने बी-1 और बी-1बी बमवर्षक लड़ाकू विमानों को चीनी सीमा में भेजकर खुली चेतावनी दी है कि यदि वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो अमेरिकी वायुसेना कार्रवाई कर सकती है। ये बमवर्षक सबसे पड़े पेलोड हैं और और अमेरिकी वायुसेना इनका इस्तेमाल जासूसी मिशन के तौर पर नहीं, बल्कि चेतावनी देने के रूप में करती है।

हांगकांग : चीन के मानवाधिकार उल्लंघन पर अमेरिका में प्रस्ताव पारित
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर हांगकांग में मौलिक अधिकारों तथा आजादी को घटाने और चीन की ओर से हो रहे मानवाधिकार हनन की घटनाओं की निंदा की है।

अमेरिकी सदन में ध्वनि मत से पारित इस प्रस्ताव में चीन सरकार की कार्रवाइयों की निंदा करते हुए कहा कि इनसे हांगकांग की स्वायत्तता एवं वहां के लोगों के मौलिक आधिकारों एवं आजादी का उल्लंघन हुआ है।

अध्यक्ष नैंसी पेलोसी ने कहा, सदन द्विदलीय आधार पर हमेशा तिब्बत में धर्म और संस्कृति की आजादी एवं हांगकांग में कानून के शासन के लिए लड़ाई लड़ेगा। इसमें जोर दिया गया है कि चीन की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उसकी विश्वसनीयता कम करती है । प्रस्ताव में चीन एवं हांगकांग की सरकार से विवादित सुरक्षा कानून को लागू न करने अथवा कार्रवाई से परहेज करने का आग्रह किया गया है।

पांच देशों ने कहा, हांगकांग में नागरिक अधिकार कम न करे चीन
अमेरिकी नेतृत्व में पांच देशों के एक समूह ने चीन से कहा है कि वह जनप्रतिनिधि का चुनाव करने के हांगकांग के लोगों के अधिकारों को कम ना करे। इस समूह में अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन शामिल है।

इन पांच देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में हांगकांग के निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अयोग्य करार देने के लिए चीन द्वारा लागू कानून पर गंभीर चिंता दोहराई।

चीनी मूल के अमेरिकी को 38 माह की सजा
अमेरिका में चीनी मूल के अमेरिकी नागरिक वी. सुन (49) को 38 महीने की जेल की सजा सुनाई गई है। उस पर अमेरिका के निर्यात नियमों को तोड़ने तथा रक्षा संबंधी डाटा को दूसरे देश को सौंपने का आरोप है। डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने यह जानकारी दी। वह 10 साल से टक्सन स्थित रेथियॉन मिसाइल्स एंड डिफेंस कंपनी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में कार्यरत था।


सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन सी डेमर्स ने कहा कि सुन एक बेहद कुशल इंजीनियर था, जिसे संवेदनशील मिसाइल तकनीक सौंपी गई थी। वह जानता था कि वह कानूनी रूप से इसे ट्रांसफर नहीं कर सकता है। फिर भी, उसने तकनीक को चीन तक पहुंचाया।

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