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US Deportation: अल-सल्वाडोर के गार्सिया अमेरिका से एस्वातिनी निर्वासित होंगे, किल्मर बोले- युगांडा भेजने का डर
Sun, 07 Sep 2025 02:13 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 07 Sep 2025 02:13 AM IST
सार
अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन के वकीलों ने किल्मर अब्रेगो गार्सिया के वकीलों को एक पत्र लिखकर बताया है कि वे गार्सिया को अफ्रीकी देश एस्वातिनी भेजेंगे। जबकि, गार्सिया ने युगांडा भेजे जाने का डर जताया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई
विस्तार
अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) के वकीलों ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को एक पत्र में कहा कि वे किल्मर अब्रेगो गार्सिया को अफ्रीकी देश एस्वातिनी भेजेंगे, क्योंकि उन्होंने युगांडा भेजे जाने का डर जताया है। आईसीई ने गार्सिया के वकीलों को पत्र लिखकर यह जानकारी दी।
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पत्र में कहा गया कि युगांडा में उत्पीड़न या यातना का उनका डर गंभीरता से लेना मुश्किल है, खासकर जब आपने (अपने वकीलों के जरिये) दावा किया है कि आपको कम से कम 22 अलग-अलग देशों में उत्पीड़न या यातना का डर है। फिर भी, हम आपको सूचित करते हैं कि अब आपका नया निष्कासन देश एस्ताविनी है। वहीं, एस्वातिनी के सरकारी प्रवक्ता ने शनिवार (स्थानीय समयानुसार) को बताया कि उन्हें गार्सिया के वहां स्थानांतरण के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है।
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अल साल्वाडोर के रहने वाले हैं गार्सिया
गार्सिया, जो मूल रूप से अल-साल्वाडोर के रहने वाले हैं, मैरीलैंड में एक दशक से भी ज्यादा समय तक रहे हैं। इस साल की शुरुआत में उन्हें गलती से अल सल्वाडोर भेज दिया गया था। इस गलती ने कानूनी लड़ाई को जन्म दिया और उसका मामला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कठोर आव्रजन नीतियों की सीमाओं की परीक्षा में बदल दिया है।
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2019 में अदालत ने अल साल्वाडोर निर्वासन पर लगाई थी रोक
गार्सिया 2011 के आसपास किशोर अवस्था में अवैध रूप से अमेरिका आए थे। उनकी एक अमेरिकी पत्नी और बच्चा है। 2019 में आव्रजन अदालती आदेश ने उनके मूल देश अल साल्वाडोर में उनके निर्वासन पर रोक लगा दी थी, क्योंकि उन्हें वहां के गिरोहों से धमकियों का वास्तविक डर था। इसके बावजूद उन्हें मार्च में अल सल्वाडोर निर्वासित कर दिया गया, जिसे सरकारी वकील ने 'प्रशासनिक गलती' बताया। वहां उन्हें कुख्यात आतंकवाद निरोधक जेल में रखा गया।
आईसीई गार्सिया को दोबारा निर्वासित करना चाहता है
अदालती आदेश के बाद ट्रंप प्रशासन उन्हें जून में अमेरिका वापस ले आया, लेकिन इस बार उन पर 2022 में टेनेसी में हुए एक यातायात रोक के आधार पर मानव तस्करी का आरोप लगा दिया गया। यह मामला अभी अदालत में लंबित है, जबकि आईसीई अब उन्हें दोबारा निर्वासित करना चाहता है। इस बीच, गार्सिया अमेरिका में शरण की मांग कर रहे हैं।
गार्सिया अब शरण के पात्र: वकील
उनका शरण आवेदन 2019 में इसलिए खारिज हुआ था, क्योंकि उन्होंने अमेरिका आने के एक साल से अधिक समय बाद आवेदन किया था। उनके वकील साइमन सैंडोवल-मोसनबर्ग का कहना है कि चूंकि गार्सिया को पहले निर्वासित किया जा चुका है और अब दोबारा अमेरिका आया है, इसलिए अब वह शरण के लिए पात्र है। उन्होंने एक बयान में कहा, 'अगर गार्सिया को आव्रजन अदालत में निष्पक्ष सुनवाई की अनुमति मिली, तो इसमें कोई शक नहीं कि वह अपना केस जीत जाएंगे।'
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सरकार वापस अल साल्वाडोर भेजने की करेगी कोशिश
शरण मांगते समय गार्सिया ने युगांडा और करीब दो दर्जन अन्य देशों में उत्पीड़न का डर जताया था। आईसीई के एक हालिया अदालती दस्तावेज के मुताबिक, अगर उनका मामला दोबारा खोला गया तो 2019 का आदेश (जिसमें अल सल्वाडोर भेजने पर रोक थी) खत्म हो जाएगा और सरकार उसे वापस अल सल्वाडोर भेजने की कोशिश करेगी।