US-China Tension: क्या चीन वाकई भारत के साथ वार्ता को गंभीरता से ले रहा? अमेरिका को ड्रैगन की नीयत पर शक
दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू ने कहा कि बहुत ही कम सबूत मिले हैं कि चीन सरकार इन वार्ताओं को वास्तविकता में गंभीरता से ले रही है। जो दिख रहा है वह इसके उलट है।
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अमेरिका ने चीन और भारत के बीच बातचीत का सर्मथन किया है। उसका कहना है कि सीमा विवाद को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत होना जरूरी है। हालांकि बाइडन प्रशासन का यह भी कहना है कि बीजिंग इन वार्ताओं को गंभीरता से ले रहा है, लेकिन इसके सबूत बहुत कम मिले हैं।
दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू ने कहा कि चीन के साथ भारत के सीमा विवाद पर हमारा रुख पुराना है।
चीन लगातार कर रहा हस्तक्षेप
उन्होंने कहा कि बहुत ही कम सबूत मिले हैं कि चीन सरकार इन वार्ताओं को वास्तविकता में गंभीरता से ले रही है। जो दिख रहा है वह इसके उलट है। हम वास्तविकता नियंत्रण रेखा पर होने वाले हस्तक्षेप को नियमित देख सकते हैं।
अमेरिका हमेशा भारत के साथ
लू ने कहा कि चीन-भारत का कैसा भी संबंध हो, लेकिन अमेरिका भारत के साथ हमेशा खड़ा है। भारत हम पर पूरा भरोसा रख सकता है। उन्होंने कहा कि हमने गलवान संकट के दौरान 2020 में अपनी दोस्ती का सबूत दिया था। हम भारत के साथ आने वाले वर्षों में और अवसर तलाशेंगे और रिश्ते को आगे बढ़ाएंगे।
पिछले महीने आई थी एक रिपोर्ट
एक शीर्ष अमेरिकी थिंक-टैंक सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी ने पिछले महीने एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत-चीन की बढ़ती दुश्मनी का संयुक्त राज्य अमेरिका और इसकी हिंद-प्रशांत रणनीति पर प्रभाव पड़ेगा।
लिसा कर्टिस ने एक रिपोर्ट जारी की थी उसमें कहा गया कि अमेरिका उस भूमिका पर विचार करता है, जिसमें वह भारत के साथ संबंधों को सुधार सके। साथ ही लिखा की अमेरिका को बारीकी से निगरानी करनी चाहिए और भविष्य में भारत-चीन सीमा संकट पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
बता दें, लिसा कर्टिस ने साल 2017 से 2021 तक दक्षिण और मध्य एशिया के लिए राष्ट्रपति और एनएससी के वरिष्ठ निदेशक के उप सहायक के रूप में काम किया है।