US Presidency: बॉबी जिंदल ने किया निक्की हेली का बचाव, कहा- नस्लीय हमले ठीक नहीं
बॉबी जिंदल का यह बयान तब सामने आया है, जब 2024 में अमेरिकी चुनाव के लिए दावेदारी पेश करने वाली भारतीय मूल की निक्की हेली को नस्लीय हमलों का शिकार होना पड़ा।
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अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में दावेदारी पेश करने वालीं निक्की हेली का लुइसियाना राज्य के पूर्व गवर्नर बॉबी जिंदल ने बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि उनके लिंग, नस्ल या जातीयता के लिए उनकी आलोचना या प्रशंसा नहीं की जानी चाहिए। जिंदल ने न्यूजवीक पत्रिका में एक में लिखा, वह एक महिला के रूप में पैदा हुई हैं और भारतीय प्रवासियों के लिए उनके बारे में यह सब जानना सबसे महत्वपूर्ण बात नहीं है।
बॉबी जिंदल का यह बयान तब सामने आया है, जब 2024 में अमेरिकी चुनाव के लिए दावेदारी पेश करने वाली भारतीय मूल की निक्की हेली को नस्लीय हमलों का शिकार होना पड़ा। बता दें, 51 वर्षीय हेली दक्षिण कैरोलिना की दो बार की गवर्नर और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत रह चुकी हैं। वहीं, जिंदल 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल होने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी थे।
ऐसे हमलों से केवल अल्पावधि में मिलता है लाभ
जिंदल ने कहा, इस तरह के हमलों से चुनावी अभियान को केवल अल्पावधि में लाभ होता है, क्योंकि राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान बढ़ जाता है, यह पत्रकारों और मतदाताओं को उनकी उम्मीदवारी पर चर्चा करने का एक कारण देता है। जिंदल ने लिखा है कि हमारे राष्ट्र का नेतृत्व करने के लिए खुद को पेश करने वाले किसी भी उम्मीदवार को कठोर जांच की उम्मीद करनी चाहिए और आधुनिक अभियानों में सब कुछ निष्पक्ष खेल जैसा लगता है। खासकर जब उम्मीदवार सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक व्यक्तिगत जानकारी साझा करते हैं।
विवेक रामास्वामी ने भी पेश की दावेदारी
भारतीय-अमेरिकी उद्यमी विवेक रामास्वामी ने भी राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का एलान किया है। विवेक और निक्की हेली दोनों ने रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उम्मीदवारी पेश की है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं वो 2024 के राष्ट्रपति चुनाव मे रिपब्लिकन पार्टी की ओर से दावेदारी करेंगे।
कैसे होता है अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव?
अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव भारत के आम चुनाव से काफी अलग होता है। यहां द्विदलीय व्यवस्था है, भारत की तरह अमेरिका में बहुदलीय व्यवस्था नहीं है। भारत में पार्टियां आम चुनाव में बहुमत हासिल करने की कोशिश करती हैं। बहुमत वाले दल या गठबंधन के सांसद अपना नेता चुनते हैं। चुना हुआ नेता प्रधानमंत्री बनता है। अमेरिका में ठीक इसके उलट है। यहां की दोनों प्रमुख पार्टियां रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति उम्मीदवार के चयन को लेकर भी जनता के बीच जाती हैं। दोनों पार्टियों में उम्मीदवार बनने की चाहत रखने वाले लोग हर स्टेट में प्राइमरी और कॉकस इलेक्शन में हिस्सा लेते हैं। प्राइमरी और कॉकस चुनाव में जो जीतता है वह दोनों पार्टियों की ओर से औपचारिक उम्मीदवार बनता है। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ के औपचारिक रूप से उम्मीदवारों की घोषणा के बाद शुरू होती है। अपनी-अपनी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर जीतने वाले दोनों उम्मीदवार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ते हैं। दोनों प्रत्याशी देशभर में अपने एजेंडे के साथ एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं।