अमेरिका पर निशाना: नए कानून से टेक कंपनियों पर लगाम कसने की कोशिश, यूएस और ईयू के रिश्तों में नया पेंच
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईयू प्राइवेसी की रक्षा से लेकर डिजिटल टैक्स जैसे मामलों में आक्रामक मुद्रा में है। लेकिन डीएमए का मामला और भी आगे है। अमेरिका की व्यापार संस्था सीसीआईए के ब्रसेल्स कार्यालय के प्रमुख क्रिश्चियन बॉर्गमैन ने कहा- ‘अपनी अर्थव्यवस्था विकसित करने के बजाय ईयू ने अपना ध्यान गूगल, एपल, फेसबुक, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट कंपनियों को ठिकाने लगाने पर केंद्रित कर रखा है...
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यूरोपियन यूनियन (ईयू) सिलिकॉन वैली की बड़ी टेक कंपनियों पर प्रतिस्पर्धा संबंधी नियम लागू करने के अपने इरादे पर आगे बढ़ रही हैं। इससे अमेरिका के साथ उसके व्यापार संबंधों में एक नई अड़चन पैदा हुई है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि जो बाइडन के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद जिस समय अमेरिका और ईयू व्यापार संबंधों को फिर से सुगम बनाने की कोशिश में हैं, इस विवाद से नई उलझन पैदा हो गई है।
वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी अधिकारी ईयू के नए कानून संबंधी योजना से बहुत चिंतित हैं। उनकी राय है कि ईयू फेसबुक, गूगल और एपल जैसी सिलिकॉन वैली की टेक कंपनियों को अनुचित रूप से निशाना बना रहा है। अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन टाय ने इस महीने के आरंभ में कहा था- ‘मुझे विश्वास है कि यूरोपीय अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर हमारी दुरुस्त और ईमानदार बातचीत होगी।’
ईयू ने डिजिटल मार्केट्स एक्ट (डीएमए) के नाम से प्रस्तावित कानून का मसविदा जारी किया है। अमेरिकी अधिकारियों और वहां के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का कहा है कि ये कानून बना, तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर चिप उत्पादन तक के क्षेत्रों में अमेरिका और यूरोप के साझा प्रयास करने की मंशा पर पानी फिर जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों की राय है कि इन क्षेत्रों में चीन कड़ी टक्कर दे रहा है। इसलिए इसमें अमेरिका और ईयू के मिल कर कोशिश करने की जरूरत है।
यूएस चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के वरिष्ठ निदेशक गरेट वर्कमैन ने वेबसाइट पॉलिटिको से कहा- ‘यूरोपीय अधिकारी ऐसा कानून क्यों बना रहे हैं, जिससे सिर्फ अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा। वे उसी समय ऐसा कर रहे हैं, जब वे यह भी कह रहे हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में मिल कर काम करने की जरूरत है।’
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईयू प्राइवेसी की रक्षा से लेकर डिजिटल टैक्स जैसे मामलों में आक्रामक मुद्रा में है। लेकिन डीएमए का मामला और भी आगे है। अमेरिका की व्यापार संस्था सीसीआईए के ब्रसेल्स कार्यालय के प्रमुख क्रिश्चियन बॉर्गमैन ने कहा- ‘अपनी अर्थव्यवस्था विकसित करने के बजाय ईयू ने अपना ध्यान गूगल, एपल, फेसबुक, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट कंपनियों को ठिकाने लगाने पर केंद्रित कर रखा है। हमने इसे डिजिटल सर्विसेज टैक्स के मामले में भी देखा था, जिसे लागू करने का इरादा अब उसने छोड़ दिया है। लेकिन उसका रुख डीएमए के मामले में जितना सख्त है, उतना किसी और मामले में नहीं रहा है।’
डीएमए बिल फिलहाल ईयू की विधि निर्माण प्रक्रिया में है। उसके 2023 से पहले लागू होने की संभावना नहीं है। लेकिन अमेरिकी नेताओं ने अभी इसके खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। उनकी राय है कि ईयू को रोकने का यही वक्त है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अब देखने की बात यह है कि ईयू अमेरिकी विरोध पर कितना ध्यान देता है। यूरोपियन संसद में मई में इस बिल पर पहली चर्चा हुई थी। ईयू की टेक कंपनियों के संगठन यूरोपियन टेक एलायंस ने मौजूदा बिल को पारित कराने के लिए अपना जोर लगा रखा है। इसलिए जानकारों की राय है कि इस मामले में ईयू का झुकना आसान नहीं होगा।