अमेरिकी एनएसए ने चीन पर किया कटाक्ष, कहा-साम्राज्यवादी ताकतों के लिए कोई जगह नहीं
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अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी ने चीन पर कटाक्ष करते हुए चेतावनी दी है कि 21वीं सदी की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में उन ‘साम्राज्यवादी’ ताकतों के लिए कोई जगह नहीं है, जहां बड़े देश छोटे देशों का फायदा उठा सकते हैं। यह चेतावनी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर की गई जहां अमेरिका ने 1000 डॉलर का निवेश किया है।
अमेरिकी एनएसए रॉबर्ट ओब्रायन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते चीनी प्रभाव पर सवालों का जवाब देते कहा कि सभी देशों को एक दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करते हुए बराबरी का व्यवहार करना चाहिए। साथ ही वैश्विक कानूनों व परंपराओं के अनुसार अपना बर्ताव रखना चाहिए।
उन्होंने बैंकॉक में साम्राज्यवादी शक्तियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वो दिन बीत चुके हैं जब बड़े देश अपने भौगोलिक आकार के चलते छोटे देशों का लाभ उठा सकते थे। हम नहीं समझते हैं कि 21वीं सदी की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में उसके लिए कोई जगह बची है।’
उनका बयान बैंकॉक में पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन के मौके पर आया है जहां हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के तेजी से बढ़ते सैन्य एवं आर्थिक विस्तारवाद का मुद्दा प्रमुखता से उठा। बता दें कि चीन दक्षिण सागर पर अपना दावा करता है जबकि दूसरे छोटे देश भी यहां अपना दावा करते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने जिनपिंग को दिया व्यापार समझौते पर दस्तखत का न्यौता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर हस्ताक्षर करने के लिए अमेरिका आमंत्रित किया है। एनएसए रॉबर्ट ओब्रायन ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच बेहतर रिश्ते न सिर्फ अमेरिका-चीन के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी अच्छे हैं। ओब्रायन ने कहा कि मुझे लगता है कि हम एक समझौते के करीब हैं।
शी ने लिया व्यापक बाजार पहुंच, मुक्त व्यापार सौदों का संकल्प
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि दुनिया के देशों को व्यापार में बाधा पहुंचाने की जगह उन्हें दूर करने पर ध्यान लगाना चाहिए। शी ने शंघाई में चीन की अर्थव्यवस्था को खोलने की इच्छा और मुक्त व्यापार सौदों का संकल्प लेते हुए आयोजित आयात प्रदर्शनी में बोल रहे थे। इस दौरान फ्र ांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद रहे। उन्होंने संरक्षणवाद और एकतरफावाद का विरोध करने की अपील की।