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Nepal-US Partnership: अब बड़े सियासी विवाद में बदला अमेरिका से नेपाल के सैन्य गठजोड़ का मसला

Mon, 20 Jun 2022 05:33 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 20 Jun 2022 05:33 PM IST
सार

हैं। पूर्व विदेश मंत्री रमेश नाथ पांडे ने कहा है- ‘एसपीपी प्रकरण एक राष्ट्रीय त्रासदी है। यह देश के राजनयिक तंत्र की पूरी नाकामी का परिणाम है। जिस खराब ढंग से इस मामले से निपटा गया है, उससे भरोसे का संकट खड़ा हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह उठा है कि आखिर इस देश में किस पर यकीन किया जाए।’

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us nepal state partnership program: Foreign policy blaming all major political parties for the SPP controversy
शेर बहादुर देउबा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नेपाल में अमेरिका के साथ सैन्य गठजोड़ का मुद्दा अब बड़े सियासी विवाद में तब्दील हो गया है। इस बारे में पूछताछ के लिए नेपाली संसद के निचले सदन- प्रतिनिधि सभा की अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को रविवार को बुलाया था। लेकिन देउबा ने पहले से तय कार्यक्रम में व्यस्त होने की बात कह कर उसके सामने पेश होने से इनकार कर दिया। उसके बाद अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति के अलग-अलग दलों के सदस्यों के बीच इसको लेकर तीखी तू-तू-मैं-मैं हुई कि अब देउबा के बारे में क्या रुख लिया जाए।

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पिछले हफ्ते के आरंभ में ये खबर लीक हुई थी कि अमेरिका नेपाली सेना पर उसके स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (एसपीपी) में शामिल होने के लिए दबाव डाल रहा है। बाद में ये सामने आया कि अमेरिका के नेशनल गार्ड के साथ एसपीपी में शामिल होने की पहल खुद नेपाल की तरफ से की गई थी। इसी बारे में पिछले हफ्ते संसदीय समिति ने विदेश मंत्री नाराणय खड़का और सेनाध्यक्ष जनरल प्रभुराम शर्मा से पूछताछ की थी। उसके बाद प्रधानमंत्री को बुलाने का फैसला हुआ था।

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इस हफ्ते फिर बुलाएगी समिति

देउबा के समिति के सामने न आने के बाद उनके एक सहयोगी ने मीडिया को बताया कि समिति ने बिना प्रधानमंत्री के तय कार्यक्रमों पर गौर किए उन्हें नोटिस भेज दिया था। संसदीय समिति में भी इस मुद्दे पर तीखा विवाद हुआ। लेकिन बाद में समिति ने तय किया कि प्रधानमंत्री को इसी हफ्ते फिर से बुलाया जाएगा, ताकि उनकी अगली अमेरिका यात्रा और एसपीपी के बारे में उनकी राय जानी जा सके। देउबा के जुलाई के मध्य में अमेरिका जाने की संभावना है।

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इस बीच एसपीपी विवाद के लिए विदेश नीति के जानकार सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पूर्व विदेश मंत्री रमेश नाथ पांडे ने कहा है- ‘एसपीपी प्रकरण एक राष्ट्रीय त्रासदी है। यह देश के राजनयिक तंत्र की पूरी नाकामी का परिणाम है। जिस खराब ढंग से इस मामले से निपटा गया है, उससे भरोसे का संकट खड़ा हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह उठा है कि आखिर इस देश में किस पर यकीन किया जाए।’

राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर आरोप लगाने का सिलसिला जारी है। वर्तमान सत्ताधारी गठबंधन का दावा है कि नेपाली सेना की तरफ से अमेरिका को पत्र तब भेजा गया था, जब केपी शर्मा ओली प्रधानमंत्री थे। जबकि ओली के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रही है।

सेनाध्यक्ष जनरल शर्मा ने किया खंडन

यूएमएल अब दावा कर रही है कि 2015 में नेपाली सेना ने बिना तत्कालीन प्रधानमंत्री को जानकारी दिए अमेरिकी नेशनल गार्ड को पत्र लिखा था। यूएमएल के सचिव और पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ये बात कही है। जबकि जनरल शर्मा ने संसदीय समिति के सामने कहा था कि सेना ने जो कुछ किया, वह सरकार को भरोसे में लेने के बाद किया गया।



बीते शुक्रवार को संसदीय समिति के सामने सेनाध्यक्ष जनरल शर्मा ने खंडन किया था कि नेपाली सेना एसपीपी में शामिल हो चुकी है। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि नेपाली सेना को अमेरिका से दो हेलीकॉप्टर मिले हैं, जबकि तीसरे हेलीकॉप्टर का वह इंतजार कर रही है। शर्मा शनिवार को लेबनान रवाना हो गए, जहां से वे 27 जून को अमेरिका जाएंगे। इस बीच नेपाली सेना पर विवादों का साया रोज गहराता जा रहा है।

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