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चाल या मजबूरी?: रूसी हथियारों के विकल्प खोजने में भारत की मदद करना चाहता है अमेरिका, पढ़ें पूरी रिपोर्ट
Sat, 28 Jan 2023 02:54 PM IST
संजीव कुमार झा
पीटीआई, वाशिंगटन
पीटीआई, वाशिंगटन
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 28 Jan 2023 02:54 PM IST
सार
अमेरिकी राजनीतिक मामलों के अवर सचिव, विक्टोरिया नूलैंड ने सभी सांसदों से कहा है कि रूसी सैन्य उपकरणों के विकल्प खोजने में हमें भारत की मदद करनी चाहिए।
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पीएम मोदी और विक्टोरिया नूलैंड
- फोटो : Social Media
विस्तार
यूक्रेन के ऊपर लगातार रूसी हमले से परेशान अमेरिका अब भारत को अपनी तरफ खींचने की पूरी कोशिश करने में लगा है। दरअसल, अपनी भारत यात्रा से पहले अमेरिकी राजनीतिक मामलों के अवर सचिव, विक्टोरिया नूलैंड ने सभी सांसदों से कहा है कि रूसी सैन्य उपकरणों के विकल्प खोजने में हमें भारत की मदद करनी चाहिए ताकि भारत की निर्भरता रूस पर से कम हो। हालांकि, अमेरिका के बयान को भारत कितना तरजीह देता है यह देखने वाली बात होगी क्योंकि पूरी दुनिया को भारत और रूस की नजदीकी का पता है। ऐसे में भारत इसके लिए तैयार हो यह संभव लग नहीं रहा है।
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भारत 60 साल के बाद ले मजबूत फैसला: विक्टोरिया नूलैंड
अमेरिकी नेता विक्टोरिया नूलैंड ने कहा कि भारत 60 सालों से उलझन में फंसा हुआ है लेकिन दुनिया की भलाई के लिए उसे ठोस कदम उठाना होगा। अमेरिका को उम्मीद है कि रूसी सैन्य उपकरण के विकल्प खोजने में भारत अमेरिका की मदद लेने के लिए तैयार हो जाएगा। हालांकि, इस दौरान कई सांसदों ने भारत के पुराने रुख का भी जिक्र किया कि कैसे भारत रूस के खिलाफ वोटिंग करने से बचता रहा है। क्या रूस से नजदीकी के चलते भारत इस अभियान में अमेरिका की मदद करेगा।
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अमेरिकी सांसदों ने भारत के पिछले रुख पर उठाया सवाल
अमेरिकी अधिकारियों ने रूस द्वारा भारत द्वारा एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद पर भी चिंता व्यक्त की है और कहा कि जब भारत अमेरिका के प्रतिबंधों को नहीं माना तो कैसे आगे वह मदद करेगा। नूलैंड ने जवाब में कहा भारत की मेरी पिछली यात्रा पर, हमने जो पहली बातें कही थीं, उनमें से एक यह थी कि देखें कि युद्ध के मैदान में ये हथियार कैसा प्रदर्शन करते हैं। मर्कले ने कहा कि आसियान देशों के साथ-साथ भारत और दक्षिण अफ्रीका दोनों, जिनके साथ अमेरिका को रूस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने में कठिनाई हो रही है। मुझे लगता है कि यह विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीका में लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
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अमेरिका की कड़ी आपत्ति के बावजूद भारत ने रूस से खरीदा एस-400 मिसाइल प्रणाली
अमेरिका की कड़ी आपत्तियों और बाइडन प्रशासन की ओर से प्रतिबंधों की धमकी के बावजूद भारत ने अपने फैसले में कोई भी बदलाव करने से इनकार कर दिया है और मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीद के साथ आगे बढ़ रहा है।विदेश मंत्रालय ने नवंबर 2021 में कहा कि भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और इसके रक्षा अधिग्रहण उसके राष्ट्रीय सुरक्षा हितों द्वारा निर्देशित होते हैं। रूसी तेल के लिए भारत की जरूरत तब से बढ़ गई है जब से उसने छूट पर व्यापार करना शुरू किया।