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तालिबान कितना ताकतवर: आतंकियों के पास 2.5 लाख करोड़ रुपये के हथियार और अमेरिका के मददगारों का पूरा रिकॉर्ड
Fri, 27 Aug 2021 06:29 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 27 Aug 2021 06:29 PM IST
सार
20 सालों में अमेरिका के दिए हथियार अब तालिबान के हाथों में हैं। दुनिया के 85 फीसदी देशों से ज्यादा ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर्स अब तालिबान के कब्जे में हैं। आतंकी भले ही विमान उड़ाना न जानते हों, लेकिन उनके पुर्जों की कीमत ही उन्हें मालामाल बना सकती है।
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अमेरिका ने अफगानिस्तान में छोड़ा हथियारों का जखीरा।
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
अमेरिका ने अफगानिस्तान से जिस जल्दबाजी में अपनी सेना को वापस बुलाया, उसका असर यह हुआ कि अब काबुल समेत पूरे देश पर तालिबान का कब्जा है। यहां तक कि अमेरिका द्वारा 88 अरब डॉलर (करीब 6.5 लाख करोड़ रुपये) के खर्च से तैयार की गई अफगान सेना भी बेअसर साबित हुई और अधिकतर सैनिकों ने तालिबान के सामने घुटने टेक दिए। इन 6.5 लाख करोड़ रुपये में से 2.5 लाख करोड़ रुपये के तो केवल हथियार, विमान और अन्य साजो-सामान थे।
सैनिकों के इस सरेंडर के बाद तालिबान के हाथ अमेरिका के वो खतरनाक हथियार लग गए हैं, जो दुनियाभर के कई देशों तक के पास नहीं हैं। इस सिलसिले में गुरुवार रात रिपब्लिकन पार्टी के एक सांसद और नौसेना के पूर्व रिजर्व सैनिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कई बड़े दावे किए।
क्या थे अमेरिका के विपक्षी नेता के दावे?
अमेरिका में सत्तासीन जो बाइडेन की डेमोक्रेट पार्टी को विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर जमकर घेरा है। उसके एक सांसद जिम बैंक्स ने कहा, "बाइडेन प्रशासन की लापरवाही की वजह से तालिबान के पास अब अमेरिकी सेना के अरबों डॉलर मूल्य के उपकरण मौजूद हैं। इनमें 75 हजार वाहन, 200 से ज्यादा एयरक्राफ्ट्स और 6 लाख से ज्यादा छोटे हथियार शामिल हैं। तालिबान के पास अब दुनिया के 85 फीसदी देशों से ज्यादा ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर मौजूद हैं। उनके पास नाइट विजन गॉगल्स, बॉडी ऑर्मर्स और मेडिकल सप्लाई हैं। तालिबान के पास अब उन अफगान लोगों के बायोमैट्रिक रिकॉर्ड्स, उनके फिंगरप्रिंट्स और आंखों के स्कैन्स मौजूद हैं, जिन्होंने अमेरिका की पिछले 20 सालों में मदद की।''
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क्या है आंकड़ों की सच्चाई?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने अफगानिस्तान में हथियार मुहैया कराने से जुड़े खर्च के आंकड़े रिलीज नहीं किए हैं। बाइडेन प्रशासन ने इसे युद्ध के मद्देनजर संवेदनशील जानकारी बताते हुए रोका है। हालांकि, अमेरिकी कांग्रेस की ओर गठित युद्ध के खर्चों पर नजर रखने वाले वॉचडॉग 'ऑफिस ऑफ द स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल फॉर अफगानिस्तान रिकंस्ट्रक्शन' (SIGAR) के मुताबिक आंकड़े कुछ अलग हैं।
दरअसल, वॉचडॉग की रिपोर्ट में साफ किया गया है कि अमेरिका ने 88 अरब डॉलर की रकम अफगान सेना की ट्रेनिंग और हथियारों पर खर्च की है। रक्षा विभाग ने तो सिर्फ 2005 से 2021 के बीच हथियारों पर खर्च हुई रकम का आंकड़ा मुहैया कराया है। यह करीब 18 अरब डॉलर (1.32 लाख करोड़ रुपए) दिखाया गया। हालांकि, कुछ और रिपोर्ट्स में तो इन आंकड़ों को सिरे से खारिज किया गया है। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2002 से 2017 तक अमेरिका ने अफगान सेना को 28 अरब डॉलर ( 2.06 लाख करोड़ रुपए) के हथियार मुहैया कराए। एक और रिपोर्ट में इस खर्च को 2001 से 2021 के बीच 35 अरब डॉलर (करीब 2.50 लाख करोड़) से ज्यादा बताया गया।
अमेरिका ने अफगानिस्तान को कौन से हथियार दिए?
सिगर की पिछले महीने भेजी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में तालिबान शासन आने से पहले तक अफगान सेना के पास कई बड़े हथियार थे। इनमें 6 लाख M16 असॉल्ट राइफल्स, 1 लाख 62 हजार संचार उपकरण, रात में सेना ऑपरेट करने के लिए 16 हजार नाइट विजन गॉगल्स, मशीन गन, तकरीबन 1 लाख वाहन और 16 हजार के करीब खुफिया सर्विलांस से जुड़े उपकरण शामिल हैं। इस साल जून तक अफगान सेना के पास 211 एयरक्राफ्ट्स भी मौजूद थे, जिनकी संख्या बाद में बढ़ाई गई थी। इनमें ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर से लेकर ए-29 सुपर टुकानो अटैक एयरक्राफ्ट और सी-208 लाइट अटैक एयरप्लेन भी शामिल थे।
तालिबान के कब्जे में क्या-क्या?
1. वाहन
तालिबान ने जिन अमेरिकी हथियारों पर कब्जा जमाया है, उनमें सैनिकों के कई वाहन शामिल हैं। 2016 तक अमेरिका ने करीब 75 हजार वाहन अफगान सेना को दिए थे, जबकि पिछले चार सालों में ही 10 हजार और वाहन अफगानिस्तान पहुंचाए गए। इस लिहाज से तालिबान की पहुंच इस समय 85 हजार सैन्य वाहनों तक है, जिसमें 45 हजार लाइट टैक्टिकल व्हीकल से लेकर 30 हजार हमवी, करीब 200 पर्सनल आर्मर्ड कैरियर (मुख्य तौर पर टैंक) भी शामिल हैं।
2. एयरक्राफ्ट
इसी महीने तालिबान ने अमेरिका के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर और ए-29 सुपर टुकानो एयरक्राफ्ट कब्जा लिए। एक ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर की कीमत 155 करोड़ रुपए आंकी जाती है। बताया जाता है कि अफगान सेना के पास तकरीबन 45 ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर मौजूद थे। इसके अलावा उसके पास 50 एमडी-530एस और 56 एमआई-17 हेलिकॉप्टर भी थे। अफगान वायुसेना के पास 23 सुपर टुकानों अटैक हेलिकॉप्टर के अलावा सी-208, सी-182, सी-130 सुपर हर्क्युलीस, टी-182, जी-222 और एन-32 जैसे ट्रांसपोर्ट विमान भी मौजूद थे। 18 यूटिलिटी एयरक्राफ्ट और एसी-208 फिक्स विंग एयरक्राफ्ट भी अफगान वायुसेना का हिस्सा रहे।
बताया गया है कि अफगान वायुसेना के कई सैनिक तालिबान के खिलाफ चलाए जा रहे अपने मिशन के दौरान एयरक्राफ्ट लेकर ही पड़ोसी देश चले गए। उज्बेकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि बीते दिनों 46 अफगान एयरक्राफ्ट उसकी जमीन पर उतरे, जिनमें 24 हेलिकॉप्टर शामिल हैं। वहीं, कुछ और विमानों के पड़ोसी ताजिकिस्तान जाने की भी आशंका है। इसके बावजूद तालिबान के कब्जे में करीब 150 एयरक्राफ्ट्स होने का अनुमान लगाया गया है।
अमेरिकी अफसरों के मुताबिक, अगर तालिबान के आतंकी अमेरिकी विमानों को उड़ा नहीं पाए, तो भी उनके लिए हमारी तकनीक काफी अहम साबित हो सकती है, क्योंकि इनकी पुर्जों की कीमत ही उन्हें जबरदस्त फायदा पहुंचा सकती है। एक सैन्य विमान की कंट्रोल स्टिक की कीमत 18 हजार डॉलर (करीब 13 लाख रुपए) और फ्यूल टैंक 35 हजार डॉलर (करीब 25 लाख रुपए) तक में बिकता है।
3. बंदूकें
अमेरिका की तरफ से अफगान सेना को बीते 20 सालों में चार लाख रायफल्स, 1.5 लाख से ज्यादा पिस्तौल, करीब 65 हजार मशीन गन दी गईं। इसके अलावा उसे ग्रेनेड लॉन्चर, शॉटगन, रॉकेट-प्रोपेल्ड वेपन्स और मोर्टार लॉन्चर दिए गए। डीओडी की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल तालिबान 20 सालों में अफगानिस्तान को मुहैया कराए गए 6 लाख से ज्यादा आधुनिक हथियारों तक पहुंच बनाकर अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
अफगान सेना के पास जो सबसे आम बंदूक थी, वह थी एम16 राइफल, जिसकी कीमत 750 डॉलर से लेकर 12 हजार डॉलर (करीब 55 हजार रुपए से 9 लाख रुपए) तक जा सकती है। इसके अलावा मशीन गन एम240 मॉडल की कीमत 6.67 लाख रुपए और ग्रेनेड लॉन्चर की कीमत 3.70 लाख रुपए तक जाती है। उधर सैनिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली जीलॉक जेनरेशन की 0.4 कैलिबर गोली वाली पिस्तौल की कीमत 24 हजार रुपए तक आंकी जाती है।
4. निगरानी-जासूसी उपकरण
अफगानिस्तान में अल-कायदा को खत्म करने के लिए अमेरिका की तरफ से जब अफगान सेना को तैयार करना शुरू किया गया, तो उन्हें पारंपरिक हथियारों के साथ खुफिया तंत्र मजबूत करने लायक उपकरण चलाने की ट्रेनिंग भी दी गई। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका ने अफगान सेना और पुलिस को 16 हजार से ज्यादा ऐसे उपकरण दिए, जिनके जरिए आतंकी संगठन के खिलाफ निगरानी और जासूसी तंत्र काफी मजबूत हुए। इनमें नाइट विजन डिवाइस से लेकर रेडियो मॉनिटरिंग सिस्टम और मानवरहित ड्रोन्स भी शामिल रहे हैं, जिन्हें आतंकियों को ढूंढ कर बम बरसाने के लिए जाना जाता है।
कीमतों की बात करें तो एक नाइट विजन गॉगल की कीमत 8 करोड़ डॉलर (करीब 589 करोड़ रुपए) तक हो सकती है। इसके अलावा रेडियो उपकरणों (रिसीवर, ट्रांसमीटर, एम्पलीफायर, रिपीटर) की कीमत 3.5 लाख डॉलर (करीब 2.5 करोड़ रुपए) तक जा सकती है। हालांकि, अमेरिकी सेना के लिए एक सुकून की बात यह है कि तालिबान को इन उपकरणों को चलाने के लिए काफी ट्रेनिंग की जरूरत पड़ सकती है, जिसके बिना यह उपकरण उनके लिए पूरी तरह बेकार होंगे।
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सैनिकों के इस सरेंडर के बाद तालिबान के हाथ अमेरिका के वो खतरनाक हथियार लग गए हैं, जो दुनियाभर के कई देशों तक के पास नहीं हैं। इस सिलसिले में गुरुवार रात रिपब्लिकन पार्टी के एक सांसद और नौसेना के पूर्व रिजर्व सैनिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कई बड़े दावे किए।
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क्या थे अमेरिका के विपक्षी नेता के दावे?
अमेरिका में सत्तासीन जो बाइडेन की डेमोक्रेट पार्टी को विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर जमकर घेरा है। उसके एक सांसद जिम बैंक्स ने कहा, "बाइडेन प्रशासन की लापरवाही की वजह से तालिबान के पास अब अमेरिकी सेना के अरबों डॉलर मूल्य के उपकरण मौजूद हैं। इनमें 75 हजार वाहन, 200 से ज्यादा एयरक्राफ्ट्स और 6 लाख से ज्यादा छोटे हथियार शामिल हैं। तालिबान के पास अब दुनिया के 85 फीसदी देशों से ज्यादा ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर मौजूद हैं। उनके पास नाइट विजन गॉगल्स, बॉडी ऑर्मर्स और मेडिकल सप्लाई हैं। तालिबान के पास अब उन अफगान लोगों के बायोमैट्रिक रिकॉर्ड्स, उनके फिंगरप्रिंट्स और आंखों के स्कैन्स मौजूद हैं, जिन्होंने अमेरिका की पिछले 20 सालों में मदद की।''
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क्या है आंकड़ों की सच्चाई?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने अफगानिस्तान में हथियार मुहैया कराने से जुड़े खर्च के आंकड़े रिलीज नहीं किए हैं। बाइडेन प्रशासन ने इसे युद्ध के मद्देनजर संवेदनशील जानकारी बताते हुए रोका है। हालांकि, अमेरिकी कांग्रेस की ओर गठित युद्ध के खर्चों पर नजर रखने वाले वॉचडॉग 'ऑफिस ऑफ द स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल फॉर अफगानिस्तान रिकंस्ट्रक्शन' (SIGAR) के मुताबिक आंकड़े कुछ अलग हैं।
दरअसल, वॉचडॉग की रिपोर्ट में साफ किया गया है कि अमेरिका ने 88 अरब डॉलर की रकम अफगान सेना की ट्रेनिंग और हथियारों पर खर्च की है। रक्षा विभाग ने तो सिर्फ 2005 से 2021 के बीच हथियारों पर खर्च हुई रकम का आंकड़ा मुहैया कराया है। यह करीब 18 अरब डॉलर (1.32 लाख करोड़ रुपए) दिखाया गया। हालांकि, कुछ और रिपोर्ट्स में तो इन आंकड़ों को सिरे से खारिज किया गया है। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2002 से 2017 तक अमेरिका ने अफगान सेना को 28 अरब डॉलर ( 2.06 लाख करोड़ रुपए) के हथियार मुहैया कराए। एक और रिपोर्ट में इस खर्च को 2001 से 2021 के बीच 35 अरब डॉलर (करीब 2.50 लाख करोड़) से ज्यादा बताया गया।
अमेरिका ने अफगानिस्तान को कौन से हथियार दिए?
सिगर की पिछले महीने भेजी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में तालिबान शासन आने से पहले तक अफगान सेना के पास कई बड़े हथियार थे। इनमें 6 लाख M16 असॉल्ट राइफल्स, 1 लाख 62 हजार संचार उपकरण, रात में सेना ऑपरेट करने के लिए 16 हजार नाइट विजन गॉगल्स, मशीन गन, तकरीबन 1 लाख वाहन और 16 हजार के करीब खुफिया सर्विलांस से जुड़े उपकरण शामिल हैं। इस साल जून तक अफगान सेना के पास 211 एयरक्राफ्ट्स भी मौजूद थे, जिनकी संख्या बाद में बढ़ाई गई थी। इनमें ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर से लेकर ए-29 सुपर टुकानो अटैक एयरक्राफ्ट और सी-208 लाइट अटैक एयरप्लेन भी शामिल थे।
तालिबान के कब्जे में क्या-क्या?
1. वाहन
तालिबान ने जिन अमेरिकी हथियारों पर कब्जा जमाया है, उनमें सैनिकों के कई वाहन शामिल हैं। 2016 तक अमेरिका ने करीब 75 हजार वाहन अफगान सेना को दिए थे, जबकि पिछले चार सालों में ही 10 हजार और वाहन अफगानिस्तान पहुंचाए गए। इस लिहाज से तालिबान की पहुंच इस समय 85 हजार सैन्य वाहनों तक है, जिसमें 45 हजार लाइट टैक्टिकल व्हीकल से लेकर 30 हजार हमवी, करीब 200 पर्सनल आर्मर्ड कैरियर (मुख्य तौर पर टैंक) भी शामिल हैं।
2. एयरक्राफ्ट
इसी महीने तालिबान ने अमेरिका के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर और ए-29 सुपर टुकानो एयरक्राफ्ट कब्जा लिए। एक ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर की कीमत 155 करोड़ रुपए आंकी जाती है। बताया जाता है कि अफगान सेना के पास तकरीबन 45 ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर मौजूद थे। इसके अलावा उसके पास 50 एमडी-530एस और 56 एमआई-17 हेलिकॉप्टर भी थे। अफगान वायुसेना के पास 23 सुपर टुकानों अटैक हेलिकॉप्टर के अलावा सी-208, सी-182, सी-130 सुपर हर्क्युलीस, टी-182, जी-222 और एन-32 जैसे ट्रांसपोर्ट विमान भी मौजूद थे। 18 यूटिलिटी एयरक्राफ्ट और एसी-208 फिक्स विंग एयरक्राफ्ट भी अफगान वायुसेना का हिस्सा रहे।
बताया गया है कि अफगान वायुसेना के कई सैनिक तालिबान के खिलाफ चलाए जा रहे अपने मिशन के दौरान एयरक्राफ्ट लेकर ही पड़ोसी देश चले गए। उज्बेकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि बीते दिनों 46 अफगान एयरक्राफ्ट उसकी जमीन पर उतरे, जिनमें 24 हेलिकॉप्टर शामिल हैं। वहीं, कुछ और विमानों के पड़ोसी ताजिकिस्तान जाने की भी आशंका है। इसके बावजूद तालिबान के कब्जे में करीब 150 एयरक्राफ्ट्स होने का अनुमान लगाया गया है।
अमेरिकी अफसरों के मुताबिक, अगर तालिबान के आतंकी अमेरिकी विमानों को उड़ा नहीं पाए, तो भी उनके लिए हमारी तकनीक काफी अहम साबित हो सकती है, क्योंकि इनकी पुर्जों की कीमत ही उन्हें जबरदस्त फायदा पहुंचा सकती है। एक सैन्य विमान की कंट्रोल स्टिक की कीमत 18 हजार डॉलर (करीब 13 लाख रुपए) और फ्यूल टैंक 35 हजार डॉलर (करीब 25 लाख रुपए) तक में बिकता है।
3. बंदूकें
अमेरिका की तरफ से अफगान सेना को बीते 20 सालों में चार लाख रायफल्स, 1.5 लाख से ज्यादा पिस्तौल, करीब 65 हजार मशीन गन दी गईं। इसके अलावा उसे ग्रेनेड लॉन्चर, शॉटगन, रॉकेट-प्रोपेल्ड वेपन्स और मोर्टार लॉन्चर दिए गए। डीओडी की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल तालिबान 20 सालों में अफगानिस्तान को मुहैया कराए गए 6 लाख से ज्यादा आधुनिक हथियारों तक पहुंच बनाकर अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
अफगान सेना के पास जो सबसे आम बंदूक थी, वह थी एम16 राइफल, जिसकी कीमत 750 डॉलर से लेकर 12 हजार डॉलर (करीब 55 हजार रुपए से 9 लाख रुपए) तक जा सकती है। इसके अलावा मशीन गन एम240 मॉडल की कीमत 6.67 लाख रुपए और ग्रेनेड लॉन्चर की कीमत 3.70 लाख रुपए तक जाती है। उधर सैनिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली जीलॉक जेनरेशन की 0.4 कैलिबर गोली वाली पिस्तौल की कीमत 24 हजार रुपए तक आंकी जाती है।
4. निगरानी-जासूसी उपकरण
अफगानिस्तान में अल-कायदा को खत्म करने के लिए अमेरिका की तरफ से जब अफगान सेना को तैयार करना शुरू किया गया, तो उन्हें पारंपरिक हथियारों के साथ खुफिया तंत्र मजबूत करने लायक उपकरण चलाने की ट्रेनिंग भी दी गई। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका ने अफगान सेना और पुलिस को 16 हजार से ज्यादा ऐसे उपकरण दिए, जिनके जरिए आतंकी संगठन के खिलाफ निगरानी और जासूसी तंत्र काफी मजबूत हुए। इनमें नाइट विजन डिवाइस से लेकर रेडियो मॉनिटरिंग सिस्टम और मानवरहित ड्रोन्स भी शामिल रहे हैं, जिन्हें आतंकियों को ढूंढ कर बम बरसाने के लिए जाना जाता है।
कीमतों की बात करें तो एक नाइट विजन गॉगल की कीमत 8 करोड़ डॉलर (करीब 589 करोड़ रुपए) तक हो सकती है। इसके अलावा रेडियो उपकरणों (रिसीवर, ट्रांसमीटर, एम्पलीफायर, रिपीटर) की कीमत 3.5 लाख डॉलर (करीब 2.5 करोड़ रुपए) तक जा सकती है। हालांकि, अमेरिकी सेना के लिए एक सुकून की बात यह है कि तालिबान को इन उपकरणों को चलाने के लिए काफी ट्रेनिंग की जरूरत पड़ सकती है, जिसके बिना यह उपकरण उनके लिए पूरी तरह बेकार होंगे।