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US: अमेरिकी सांसद ने की बाइडन की तारीफ, मैककॉल बोले- तिब्बत को संरक्षण देने वाले बिल पर हस्ताक्षर करना सराहनीय

Thu, 18 Jul 2024 06:56 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 18 Jul 2024 06:56 AM IST
सार

अमेरिकी सांसद माइकल मैककॉल ने कहा, परमपावन दलाई लामा से मुलाकात करने और तिब्बत के प्रति अमेरिका की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए भारत में एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। मुझे इस द्विदलीय विधेयक को सह-प्रस्तुत करने पर गर्व है जो तिब्बत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को न्याय और शांति के लिए खड़े होने का अधिकार देता है।

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US lawmaker Michael McCall says President Biden signing of Resolve Tibet Act commendable
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

अमेरिकी सांसद माइकल मैककॉल ने रिजॉल्व तिब्बत एक्ट पर हस्ताक्षर करने के लिए राष्ट्रपति जो बाइडन की सराहना की। यह एक्ट तिब्बत-चीन विवाद के समाधान के लिए लाया गया है। इसमें तिब्बत पर चीन के जारी कब्जे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए दलाई लामा या उनके प्रतिनिधियों के साथ बिना किसी पूर्व शर्त के सीधी बातचीत फिर शुरू करने का आह्वान किया गया है। हालांकि, चीन ने इस इस एक्ट का विरोध किया और इसे अस्थिरता पैदा करने वाला बताया।

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हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष माइकल मैककॉल ने बुधवार को कहा कि वह राष्ट्रपति बाइडन के तिब्बत-चीन विवाद अधिनियम को कानून में बदलने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से बेहद प्रसन्न हैं। पिछले महीने, इस विधेयक के सदन-संस्करण के सदन में पारित होने के कुछ ही दिनों बाद, तिब्बत के लिए अमेरिकी कांग्रेस में द्विदलीय समर्थन को उजागर करने के लिए, मैककॉल ने भारत में एक कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जिससे चीन का गुस्सा भड़क उठा।
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मैककॉल ने कहा, परमपावन दलाई लामा से मुलाकात करने और तिब्बत के प्रति अमेरिका की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए भारत में एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। मुझे इस द्विदलीय विधेयक को सह-प्रस्तुत करने पर गर्व है जो तिब्बत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को न्याय और शांति के लिए खड़े होने का अधिकार देता है। तिब्बती लोगों की अनूठी संस्कृति और आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए अमेरिकी समर्थन की पुष्टि करने के अलावा, यह कानून चीनी दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए अमेरिकी समर्थन को भी बढ़ाता है। सीसीपी और तिब्बत के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म करने के लिए बिना किसी पूर्व शर्त के बातचीत पर जोर देता है।
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मेरा प्रशासन चीन से दलाई लामा से बातचीत शुरू करने का आह्वान करता रहेगा: बाइडन
बाइडन ने आखिरी बार कहा था, मैंने तिब्बत-चीन विवाद समाधान को बढ़ावा देने वाले अधिनियम (अधिनियम) पर हस्ताक्षर किए हैं। मैं तिब्बतियों के मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने और उनकी विशिष्ट भाषायी, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए कांग्रेस की द्विदलीय प्रतिबद्धता को साझा करता हूं। मेरा प्रशासन पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना से दलाई लामा या उनके प्रतिनिधियों के साथ बिना किसी पूर्व शर्त के सीधी बातचीत फिर से शुरू करने का आह्वान करता रहेगा, ताकि मतभेदों को दूर किया जा सके और तिब्बत पर बातचीत के जरिये समझौता किया जा सके। विधेयक पर हस्ताक्षर करने के एक सप्ताह बाद यह कानून बन गया। 

चीन ने अमेरिका को दी थी चेतावनी
जून में चीन ने इस विधेयक को लेकर अमेरिका को चेतावनी दी थी। चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा था कि वह इस विधेयक पर हस्ताक्षर न करें। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, यह कानून चीन के घरेलू मामलों में घोर हस्तक्षेप करता है। कोई भी व्यक्ति या कोई भी ताकत जो चीन को नियंत्रित करने या दबाने के लिए जिजांग (तिब्बत का चीनी नाम) को अस्थिर करने का प्रयास करेगी, सफल नहीं होगी। चीन अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा के लिए दृढ़ कदम उठाएगा।


भारत में तिब्बती धर्मगुरु को अलगाववादी मानता है चीन
तिब्बत के चौदहवें दलाई लामा 1959 में तिब्बत से भागकर भारत आ गए, जहां उन्होंने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में निर्वासित सरकार स्थापित की। 2002 से 2010 तक दलाई लामा के प्रतिनिधियों और चीनी सरकार के बीच नौ दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। चीन, भारत में रह रहे 89 वर्षीय तिब्बती आध्यात्मिक नेता को एक ‘अलगाववादी’ मानता है, जो तिब्बत को देश (चीन) के बाकी हिस्सों से अलग करने के लिए काम कर रहे हैं। जबकि चीन इस क्षेत्र में धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, भाषाई और राजनीतिक दमन में जुटा हुआ है।

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