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Report: परमाणु समझौते पर बढ़ी उम्मीद, लेकिन मतभेद कायम; शांति समझौते की राह में अब भी कई बड़ी बाधाएं
Tue, 26 May 2026 03:59 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 26 May 2026 03:59 AM IST
सार
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच समझौते की दिशा में प्रगति हुई है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को खत्म करे, जबकि ईरान पहले प्रतिबंधों में राहत मांग रहा है। कतर में जारी वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है। दोनों देश परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर मतभेद दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अब भी कई अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त भरोसा दे, जबकि ईरान आर्थिक प्रतिबंध हटाने की स्पष्ट गारंटी मांग रहा है।
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आखिर किन मुद्दों पर अटका हुआ है समझौता?
अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम की भाषा और प्रतिबंध हटाने के तरीके को लेकर है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान को अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करना होगा और परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ना होगा। वहीं ईरान चाहता है कि पहले उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी जाए। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत धीमी पड़ गई है।
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क्या कतर में चल रही बातचीत से निकलेगा समाधान?
रिपोर्ट के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस समय कतर में मौजूद है। इसमें ईरान की वार्ता टीम के प्रमुख एमबी गालिबाफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची भी शामिल हैं। कतर इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरानी टीम की मौजूदगी सकारात्मक संकेत है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि फिलहाल बातचीत का मुख्य फोकस युद्ध समाप्त करना है और परमाणु कार्यक्रम की विस्तृत चर्चा अभी नहीं हुई है।
अमेरिका और ईरान की सबसे बड़ी शर्त क्या है?
अमेरिका की सबसे बड़ी मांग यह है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को खत्म करे। अमेरिकी अधिकारियों ने “नो डस्ट, नो डॉलर्स” का फॉर्मूला सामने रखा है। इसका मतलब है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम में ठोस कदम नहीं उठाएगा, तब तक उसे आर्थिक राहत नहीं मिलेगी। दूसरी तरफ ईरान कह रहा है कि उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए प्रतिबंध हटाना जरूरी है। इसी कारण बातचीत में लगातार दबाव बना हुआ है।
क्या जल्द हो सकता है बड़ा समझौता?
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच अब भी मतभेद मौजूद हैं, लेकिन बातचीत को लेकर सावधानी भरी उम्मीद भी बनी हुई है। अमेरिकी और क्षेत्रीय सूत्रों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ मुद्दों पर सहमति बन सकती है। ट्रंप प्रशासन भी संकेत दे चुका है कि अगर ईरान शर्तों को मानता है तो समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस वार्ता पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है।