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अमेरिका को झटका, ईरान पर पुन: प्रतिबंधों को अभी संयुक्त राष्ट्र का समर्थन नहीं
Tue, 22 Sep 2020 03:10 AM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 22 Sep 2020 03:10 AM IST
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संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस
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महासचिव एंतोनियो गुटेरस ने कहा है कि सुरक्षा परिषद से हरी झंडी मिलने तक संयुक्त राष्ट्र फिलहाल ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी मांग पर कोई मदद नहीं कर पाएगा। गुटेरस ने परिषद को लिखे पत्र में कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में ‘स्नैपबैक’ का इस्तेमाल किया है या नहीं, इस पर अनिश्चितता प्रतीत होती है।
पोम्पियो ने यह घोषणा सुरक्षा परिषद को ‘स्नैपबैक‘ का इस्तेमाल करने की जानकारी देने के करीब 30 दिन बाद की है। ‘स्नैपबैक’ का मतलब है कि परमाणु करार के तहत दी गई ढील या हटा ली गई पाबंदियों को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा दोबारा लगाया जा सकता है। गुटेरस ने पत्र में लिखा कि सुरक्षा परिषद, उसके सदस्यों या उसके अध्यक्ष ने अमेरिकी विदेश मंत्री के पत्र की प्राप्ति के बाद कोई कार्रवाई नहीं की है।
उन्होंने कहा कि परिषद के अधिकतर सदस्यों ने परिषद के अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी है कि पोम्पियो के पत्र में यह स्पष्ट नहीं है कि ‘स्नैपबैक’ का इस्तेमाल किया गया है या नहीं। उन्होंने कहा, अगस्त और सितंबर के लिए परिषद के अध्यक्षों ने संकेत दिया है कि वे इस मामले में कोई कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं हैं। गुटेरस ने कहा कि वे इस मामले को आगे नहीं बढ़ा सकते हैं।
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ईरान ने कहा, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करे अमेरिका
ईरान के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता सईद खातिबजादे ने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह विश्व बिरादरी के साथ लौटे और अपने कर्तव्यों का पालन करे। उन्होंने कहा, अमेरिका के इस कदम से दुनिया को युद्ध, अस्थिरता और असुरक्षा के अलावा कुछ नहीं मिला है। खतीबजादे ने पोम्पियो की स्थिति को झूठ से भरी दुनिया बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील की।
खड़ा हो सकता है विवाद
2015 में परमाणु समझौता ईरान और विश्व की छह महाशक्तियों के बीच हुआ था और ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका इस समझौते से पहले ही बाहर निकल चुका है। इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की थी कि ईरान के खिलाफ सभी प्रतिबंध बहाल कर दिए गए हैं। उसके इस कदम को विश्व के अधिकतर देशों ने खारिज कर दिया है। इस घोषणा से संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक बैठक में विवाद खड़ा हो सकता है।
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पोम्पियो ने यह घोषणा सुरक्षा परिषद को ‘स्नैपबैक‘ का इस्तेमाल करने की जानकारी देने के करीब 30 दिन बाद की है। ‘स्नैपबैक’ का मतलब है कि परमाणु करार के तहत दी गई ढील या हटा ली गई पाबंदियों को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा दोबारा लगाया जा सकता है। गुटेरस ने पत्र में लिखा कि सुरक्षा परिषद, उसके सदस्यों या उसके अध्यक्ष ने अमेरिकी विदेश मंत्री के पत्र की प्राप्ति के बाद कोई कार्रवाई नहीं की है।
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उन्होंने कहा कि परिषद के अधिकतर सदस्यों ने परिषद के अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी है कि पोम्पियो के पत्र में यह स्पष्ट नहीं है कि ‘स्नैपबैक’ का इस्तेमाल किया गया है या नहीं। उन्होंने कहा, अगस्त और सितंबर के लिए परिषद के अध्यक्षों ने संकेत दिया है कि वे इस मामले में कोई कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं हैं। गुटेरस ने कहा कि वे इस मामले को आगे नहीं बढ़ा सकते हैं।
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ईरान ने कहा, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करे अमेरिका
ईरान के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता सईद खातिबजादे ने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह विश्व बिरादरी के साथ लौटे और अपने कर्तव्यों का पालन करे। उन्होंने कहा, अमेरिका के इस कदम से दुनिया को युद्ध, अस्थिरता और असुरक्षा के अलावा कुछ नहीं मिला है। खतीबजादे ने पोम्पियो की स्थिति को झूठ से भरी दुनिया बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील की।
खड़ा हो सकता है विवाद
2015 में परमाणु समझौता ईरान और विश्व की छह महाशक्तियों के बीच हुआ था और ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका इस समझौते से पहले ही बाहर निकल चुका है। इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की थी कि ईरान के खिलाफ सभी प्रतिबंध बहाल कर दिए गए हैं। उसके इस कदम को विश्व के अधिकतर देशों ने खारिज कर दिया है। इस घोषणा से संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक बैठक में विवाद खड़ा हो सकता है।