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US National Security Strategy: भारत-अमेरिका मुक्त हिंद-प्रशांत के लिए करेंगे काम, चीन को माना असली खतरा
Wed, 12 Oct 2022 10:44 PM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला , वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला , वाशिंगटन
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 12 Oct 2022 10:44 PM IST
सार
चीन लगभग पूरे विवादित दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। हालांकि ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम सभी इसके कुछ हिस्सों का दावा करते हैं। बीजिंग ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान बनाए हैं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन
- फोटो : PTI
विस्तार
अमेरिका और भारत एक स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत के अपने साझा दृष्टिकोण की दिशा में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यवस्थाओं में एक साथ काम करेंगे। बाइडन प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति ने बुधवार को कहा कि इसने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चीन को एक प्रमुख खतरों में से एक के रूप में पहचाना है। चूंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और एक प्रमुख रक्षा भागीदार है, इसलिए अमेरिका और भारत एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के हमारे साझा दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय रूप से मिलकर काम करेंगे।
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जापान की रक्षा के लिए अटूट प्रतिबद्धता दिखाई
चीन को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्रमुख खतरों में से एक के रूप में पहचानने वाली रणनीति के तहत इंडो-पैसिफिक संधि सहयोगियों ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस और थाईलैंड के लिए अमेरिका की दृढ़ प्रतिबद्धताओं की पुष्टि की। इसमें कहा गया कि हम इन गठबंधनों का आधुनिकीकरण करना जारी रखेंगे। हम अपनी पारस्परिक सुरक्षा संधि के तहत जापान की रक्षा के लिए अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं, जिसमें सेनकाकू द्वीप शामिल हैं। अमेरिका, भारत और कई अन्य विश्व शक्तियां क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य दखल की पृष्ठभूमि में एक स्वतंत्र, खुले और संपन्न हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने की आवश्यकता के बारे में बात कर रही हैं।
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विवादित दक्षिण चीन सागर पर चीन जताता है अपना दावा
चीन लगभग पूरे विवादित दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। हालांकि ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम सभी इसके कुछ हिस्सों का दावा करते हैं। बीजिंग ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान बनाए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति दस्तावेज के अनुसार, अमेरिकी विदेश नीति के एक परिणामी नए दौर में प्रवेश किया है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के मुकाबले भारत-प्रशांत में अधिक अमेरिकी हिस्सेदारी चाहता है। इसमें कहा गया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की तुलना में कोई भी क्षेत्र दुनिया और रोजमर्रा के अमेरिकियों के लिए अधिक महत्वपूर्ण नहीं होगा। हम महत्वाकांक्षी हैं क्योंकि हम जानते हैं कि हम और हमारे सहयोगी और साझेदार इसके भविष्य के लिए एक समान दृष्टिकोण रखते हैं।
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व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति यह बताती है कि कैसे संयुक्त राज्य अमेरिका अपने महत्वपूर्ण हितों को आगे बढ़ाएगा और एक स्वतंत्र, खुले, समृद्ध और सुरक्षित दुनिया बनाने का काम करेगा। हम अपने सामरिक प्रतिस्पर्धियों को पछाड़ने के लिए अपनी राष्ट्रीय शक्ति के सभी तत्वों का लाभ उठाएंगे और साझा चुनौतियों से निपटेंगे। चीन पर इसने कहा कि अमेरिका, चीन के साथ प्रभावी रूप से प्रतिस्पर्धा करेगा, जो कि एकमात्र प्रतियोगी है और खतरनाक रूस को बाधित करते हुए तेजी से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को फिर से आकार देने की क्षमता रखता है।