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क्या है अमेरिका की गोल्डन डोम योजना: जिसका ट्रंप ने किया एलान; किस खतरे से देश की सुरक्षा की तैयारी? जानें

Thu, 06 Mar 2025 06:28 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 06 Mar 2025 06:28 PM IST
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सार
ट्रंप जिस गोल्डन डोम के निर्माण की बात कर रहे हैं, वह है क्या? अमेरिका को अब इसकी जरूरत क्यों है? उसे किस तरह के हमलों और हथियारों से खतरा महसूस हुआ है? इसके अलावा अमेरिका का यह गोल्डन डोम इस्राइल के आयरन डोम से कितना अलग होगा? आइये जानते हैं...
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US Golden Dome Defence System Donald Trump Plan Congress Speech Israel Iron Dome Security comparison explained
अमेरिका का गोल्डन डोम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अमेरिकी संसद में दिए अपने भाषण में इस्राइल के आयरन डोम सुरक्षा कवच की तर्ज पर ही अपने देश में एक गोल्डन डोम बनाने का प्रस्ताव रखा है। ट्रंप ने संसद से कहा कि वह अमेरिका की रक्षा के लिए कांग्रेस से एक बेहतरीन डिफेंस शील्ड के लिए फंड की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस खतरनाक दुनिया में अमेरिका के पास अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा कवच जरूर होना चाहिए। 


ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ट्रंप जिस गोल्डन डोम के निर्माण की बात कर रहे हैं, वह है क्या? अमेरिका को अब इसकी जरूरत क्यों है? उसे किस तरह के हमलों और हथियारों से खतरा महसूस हुआ है? इसके अलावा अमेरिका का यह गोल्डन डोम इस्राइल के आयरन डोम से कितना अलग होगा? आइये जानते हैं...

पहले जानें- गोल्डन डोम पर क्या रहा ट्रंप का पूरा बयान?
ट्रंप ने कहा, "रोनाल्ड रीगन (1981 से 1989 तक अमेरिकी राष्ट्रपति रहे) इसे बहुत पहले कर लेना चाहते थे। लेकिन तब ऐसी तकनीक नहीं थी। यहां तक कि इसके आसपास की तकनीक भी मौजूद नहीं थी। लेकिन अब हमारे पास तकनीक है। यह असल में बहुत शानदार है। और कुछ जगहों पर तो अब ये है भी। इस्राइल के पास भी है। कुछ और देशों में भी यह सुरक्षा है।"

अमेरिका को अचानक क्यों याद आई इस्राइल जैसी रक्षा व्यवस्था बनाने की याद?
ऐसा नहीं है कि अमेरिका के पास अब तक किसी भी तरह के हमले के लिए कोई रक्षा कवच नहीं है। अमेरिका ने अपने आसपास पूर्वी तट और अटलांटिक महासागर में किसी खतरे से निपटने के लिए यूएस फ्लीट फोर्स कमान की तैनाती की है। वहीं, जमीनी क्षेत्रों में अमेरिका ने दूसरे देशों से लगती अपनी सीमाओं ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में अलग-अलग जगहों पर सैन्य, नौसैन्य और वायुसेना के लिए बेस कैंप भी बनाए हैं। इससे अमेरिकी सेना पूरी दुनिया में किसी भी क्षेत्र में कुछ घंटों के अंदर ही हमले करने और किसी खतरे से खुद का बचाव करने में सक्षम है। हालांकि, यह टुकड़ियां पूरा हवाई क्षेत्र कवर नहीं करतीं। यानी कई ऐसे क्षेत्र भी हैं, जो कि अमेरिकी सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए ब्लाइंड स्पॉट हैं। ऐसे में दुश्मन इन क्षेत्रों की पहचान कर के या आसानी से रडार की पकड़ में न आने वाले हथियारों के जरिए उसे निशाना बना सकता है। 

अमेरिका के पास फिलहाल ऐसी कोई सुरक्षा प्रणाली नहीं है, जिसके जरिए वह आधुनिक समय की हाइपरसोनिक मिसाइलों, ड्रोन हमलों की बाढ़ का सामना कर सके। अमेरिका के पास फिलहाल हवाई हमलों से रक्षा के लिए कुछ मिसाइल डिफेंस सिस्टम जरूर हैं। इनमें पेट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम, नाइकी हरक्यूलीज सिस्टम और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम प्रमुख हैं। इसके अलावा अमेरिका ने कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों को भी अपनी सुरक्षा के लिए देश और बाहर समुद्री क्षेत्रों में तैनात किया है। हालांकि, यह पूरी व्यवस्था अब तक काफी बिखरी हुई मानी जाती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी क्षमता होने के बावजूद अगर अमेरिका पर हमलों की बाढ़ आती है तो यह सुरक्षा प्रणाली टूट सकती है। ऐसे में अमेरिका को सुरक्षा कवच के तौर पर एक केंद्रीकृत प्रणाली की जरूरत है। 

अमेरिका की मौजूदा हवाई सुरक्षा व्यवस्थाओं को इस्राइल के आयरन डोम सिस्टम की टक्कर का नहीं माना जाता। दरअसल, आयरन डोम सिस्टम एक एकीकृत रक्षा प्रणाली है, जो हवाई हमलों को एक साथ रोकने में सक्षम है। यह सिस्टम एक साथ पूरे इस्राइल की सुरक्षा के लिए लगाया गया है। इसकी वजह से ही हमास और हिज्बुल्ला की तरफ से किए गए बड़े मिसाइल और ड्रोन हमलों को इस्राइल नाकाम कर चुका है। 

अब जानें- क्या है गोल्डन डोम, जिसकी दुनिया में फिर छिड़ी चर्चा?
डोनाल्ड ट्रंप ने संसद में दिए अपने भाषण में अमेरिका के 40वें राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के नाम का जिक्र किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1983 में अमेरिका में कूटनीतिक रक्षा पहल (स्ट्रैटेजिक डिफेंस इनीशिएटिव) का एलान किया गया था। इसे मुख्य तौर पर रूस से आने वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों से सुरक्षा के लिए तैयार किया जाना था। हालांकि, अमेरिका इस प्रोजेक्ट को लागू करने में सफल नहीं हो पाया। 

अब करीब 42 साल बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फिर ऐसे ही सिस्टम को तैयार करने पहल की है। 

दरअसल, सैटेलाइट्स रडार और इंटरसेप्टर्स के जरिए मिसाइलों या दूसरे हवाई खतरों की लोकेशन की जानकारी अलग-अलग बिंदुओं पर भेजती है। ऐसे में अमेरिका की तरफ आने वाले किसी भी खतरे को सबसे पहले देश से दूर ही अमेरिकी सैन्य बेस या नौसैन्य पोत के करीब ही खत्म करने की कोशिश की जाती है। यहां से जरूरी मिसाइलों या लड़ाकू विमानों के जरिए हवाई खतरों को नष्ट किया जाता है। 

दरअसल, सैटेलाइट्स रडार और इंटरसेप्टर्स के जरिए मिसाइलों या दूसरे हवाई खतरों की लोकेशन की जानकारी अलग-अलग बिंदुओं पर भेजती है। ऐसे में अमेरिका की तरफ आने वाले किसी भी खतरे को सबसे पहले देश से दूर ही अमेरिकी सैन्य बेस या नौसैन्य पोत के करीब ही खत्म करने की कोशिश की जाती है। यहां से जरूरी मिसाइलों या लड़ाकू विमानों के जरिए हवाई खतरों को नष्ट किया जाता है। 

यहीं से गोल्डन डोम सिस्टम का अगला काम यहीं से शुरू होता है। दरअसल, इस्राइल के सिस्टम का ही उदाहरण ले लें तो इस सिस्टम में तीन हिस्से होते हैं। पहला- रडार, दूसरा- कमांड पोस्ट और तीसरा- लॉन्चर। 
  • रडार के जरिए डोम सिस्टम यह तय करता है कि आसमान में दिख रही चीज कितना बड़ा खतरा है, इसकी क्या गति है और इसे खत्म करने के लिए किस गति की और कितनी ताकत की जरूरत होगी। 
  • यह पूरी जानकारी गोल्डन डोम के दूसरे हिस्से के तौर पर काम कर रहे कमांड पोस्ट को लगातार मिलती है, जो कि खतरे को भांपकर लॉन्चर को सिग्नल देता है और यह लॉन्चर यूनिट इंटरसेप्टर मिसाइलों के जरिए हमला करता है और खतरे को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर देता है।  
  • लॉन्चर दो तरह के होते हैं- स्टेश्नरी और मोबाइल। स्टेश्नरी एक ही जगह पर फिटेड सिस्टम होता है और मोबाइल को एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाया जाता है। मिसाइलें हवा में सीधे ऊपर की तरफ छोड़ी जाती हैं। उसके बाद ये अपने निशाने को ढूंढते हुए दिशा बदल लेती है। ये मिसाइलें हीट या मोशन सेंसिंग होती हैं और हवा में ही खतरों को नष्ट कर देती है। वहीं कमांड पोस्ट से इस पूरी प्रकिया पर नजर रखी जाती है।
     

  • रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिका अपने गोल्डन डोम सिस्टम के लिए कई तरह की मिसाइलों को रखने की योजना बना रहा है। यह मिसाइलें जरूरत के हिसाब से छोटे या लंबे रेंज की मिसाइलों को खत्म कर देंगी। इतना ही नहीं हाइपरसोनिक गति से आने वाली मिसाइलों के लिए अलग तरह के हथियार और फ्लेयर तैयार किए जा सकते हैं।
  • बताया जाता है कि फिलहाल अमेरिका गोल्डन डोम में पहले से मौजूद मिसाइल रक्षा प्रणालियों को एकीकृत कर इस्तेमाल करेगा। जैसे कि पैट्रियट डिफेंस सिस्टम और उन्नत रडार। हालांकि, समय के साथ गोल्डन डोम की क्षमता को बढ़ाने का काम किया जाएगा। 

इस्राइल के मुकाबले काफी अलग होगा अमेरिका का गोल्डन डोम
इस्राइल का आयरन डोम सिस्टम छोटे से देश की रक्षा के लिए बना है। वहीं अमेरिका क्षेत्रफल में इस्राइल से 430 गुना और जनसंख्या में 35 गुना बड़ा है। यानी अमेरिका में इस्राइल जैसा डिफेंस सिस्टम को तैनात करना बड़ी चुनौती होगी। 

 
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