टैरिफ नीति पर ट्रंप को दोहरा झटका: सुप्रीम कोर्ट के बाद संघीय अदालत का फैसला, रिफंड रोकने की मांग ठुकराई
पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को अवैध करार दिया, फिर बौखलाए ट्रंप ने अपनी इस नीति को लेकर खूब बयानबाजी की। वहीं अब रिफंड प्रक्रिया में देरी कर रहे ट्रंप प्रशासन को संघीय अदालत से बड़ा झटका लगा है। यहां जानिए इस पूरे मामले को...
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति जहां एक ओर दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में अब ट्रंप को उनकी टैरिफ को लेकर दोहरा झटका लगा है, जहां एक ओर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी टैरिफ को अवैध बताते हुए पूरी तरह से रद्द करने का फैसला सुनाया था। वहीं दूसरी ओर अब अमेरिका की संघीय अदालत ने भी ट्रंप प्रशासन की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें प्रशासन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पिछले महीने अवैध घोषित किए गए टैरिफ का रिफंड देने की प्रक्रिया को धीमा करना चाहता था।
संघीय सर्किट की अपीलीय अदालत ने अब रिफंड प्रक्रिया को अगले चरण में भेजते हुए इसे निचली अदालत को सौंप दिया है, जो तय करेगी कि रिफंड कैसे दिया जाएगा। बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को अदालत से 90 दिन के लिए प्रक्रिया रोकने का अनुरोध किया था, लेकिन जजों ने इसे पूरी तरह से मना कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को बताया था अवैध
बता दें कि इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को फैसला सुनाते हुए कहा था कि ट्रंप प्रशासन की तरफ से अधिकांश देशों पर लगाए गए व्यापक टैरिफ अवैध थे। इससे उन आयातकों को रिफंड का रास्ता खुल गया जिन्होंने ये शुल्क अदा किए थे। सरकार ने दिसंबर तक इन टैरिफ से 130 अरब डॉलर से अधिक एकत्र किए थे और अनुमान है कि कुल रिफंड 175 अरब डॉलर तक हो सकता है।
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सरकार नए टैरिफ की तैयारी में, लेकिन फिर
हालांकि अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड के तरीके पर कोई निर्देश नहीं दिया। अब न्यूयॉर्क की अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत यह तय करेगी कि जटिल रिफंड प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक नया और चुनौतीपूर्ण मामला है क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर रिफंड का भुगतान करना आसान नहीं। सरकार नए टैरिफ भी लागू करने की तैयारी में है, जिससे रिफंड भुगतान और रणनीतिक व्यापार सौदों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक होगा।
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