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US Dollar: डॉलर के मुकाबले नई मुद्रा बनाएंगे ब्रिक्स देश! क्यों दुनिया तलाश रही अमेरिकी करेंसी का विकल्प?
Tue, 04 Apr 2023 07:57 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Tue, 04 Apr 2023 07:57 PM IST
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ब्रिक्स
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SOCIAL MEDIA
विस्तार
बीते साल रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण रूस को कड़े वैश्विक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। इन्हीं चुनौतियों के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले दिनों एक नई विदेश नीति अपनाई। इसमें चीन और भारत को विश्व मंच पर अपने मुख्य सहयोगियों के रूप में पहचान दी गई। अब तीनों राष्ट्र कुछ अन्य देशों के साथ मिलकर नई मुद्रा बनाने की तैयारी में हैं। दरअसल, रूसी सांसद अलेक्जेंडर बाबाकोव ने एक बयान में कहा है कि ब्रिक्स राष्ट्र भुगतान के लिए एक नया माध्यम बनाने की प्रक्रिया में हैं।अमेरिकी डॉलर को चुनौती देने के लिए ब्रिक्स देश क्या कर रहे हैं? क्या है ब्रिक्स? क्या भारत भी अपनी मुद्रा का अंतरराष्ट्रीयकरण करने के प्रयास में है? भारत के अलावा और कौन से देश डॉलर का विकल्प तलाश रहे हैं? नई मुद्रा निर्माण में रूस की क्या भूमिका होगी? डॉलर से अलग कैसी होगी भुगतान व्यवस्था? देश क्यों तलाश रहे हैं अमेरिकी डॉलर का विकल्प?
ब्रिक्स सम्मेलन
- फोटो :
ANI
अमेरिकी डॉलर को चुनौती देने के लिए ब्रिक्स देश क्या कर रहे हैं?
ब्रिक्स देश अंतरराष्ट्रीय भुगतान में अमेरिकी मुद्रा डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने की एक खास तैयारी कर रहे हैं। ब्रिक्स देश कथित तौर पर आपस में व्यापार के लिए एक सामान्य मुद्रा बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी साल अगस्त में दक्षिण अफ्रीका में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एक नई वित्तीय व्यवस्था की घोषणा की जा सकती है।
रूसी सांसद अलेक्जेंडर बाबाकोव ने भारत में पिछले हफ्ते सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम इवेंट में एक बयान में कहा था कि ब्रिक्स राष्ट्र भुगतान के लिए एक नया माध्यम बनाने की प्रक्रिया में हैं। बाबाकोव ने कहा कि योजना शुरू में लेनदेन में घरेलू मुद्राओं का उपयोग करने के लिए है। इसके बाद एक डिजिटल या मुद्रा के वैकल्पिक रूप की शुरूआत की जा सकती है। बाबाकोव ने बताया कि ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन से इस विशेष पहल को लागू करने की तैयारी की जानकारी मिल सकती है। फिलहाल योजना पर काम जारी है।
ब्रिक्स देश अंतरराष्ट्रीय भुगतान में अमेरिकी मुद्रा डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने की एक खास तैयारी कर रहे हैं। ब्रिक्स देश कथित तौर पर आपस में व्यापार के लिए एक सामान्य मुद्रा बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी साल अगस्त में दक्षिण अफ्रीका में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एक नई वित्तीय व्यवस्था की घोषणा की जा सकती है।
रूसी सांसद अलेक्जेंडर बाबाकोव ने भारत में पिछले हफ्ते सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम इवेंट में एक बयान में कहा था कि ब्रिक्स राष्ट्र भुगतान के लिए एक नया माध्यम बनाने की प्रक्रिया में हैं। बाबाकोव ने कहा कि योजना शुरू में लेनदेन में घरेलू मुद्राओं का उपयोग करने के लिए है। इसके बाद एक डिजिटल या मुद्रा के वैकल्पिक रूप की शुरूआत की जा सकती है। बाबाकोव ने बताया कि ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन से इस विशेष पहल को लागू करने की तैयारी की जानकारी मिल सकती है। फिलहाल योजना पर काम जारी है।
ब्रिक्स सम्मेलन
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Getty Images
क्या है ब्रिक्स?
अंग्रेजी अक्षरों BRICS से बना है। 'ब्रिक्स' दुनिया की पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। जैसा कि नाम से अनुमान लगाया जा सकता है, ये देश हैं - ब्राजील, रुस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। ब्रिक्स के विचार की परिकल्पना वर्ष 2001 में की गई थी, जो 2006 में ब्रिक के रूप में सामने आई और 2010 में जब इस समूह में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ, तो यह ब्रिक्स बन गया।
'ब्रिक' शब्दावली के जन्मदाता जिम ओ'नील हैं। ओ'नील ने इस शब्दावली का प्रयोग सबसे पहले वर्ष 2001 में अपने शोधपत्र में किया था। उस शोधपत्र का शीर्षक था, "बिल्डिंग बेटर ग्लोबल इकोनॉमिक ब्रिक्स"। ओ'नील अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कंसलटेंसी गोल्डमैन सैक्स से जुड़े हैं।
अंग्रेजी अक्षरों BRICS से बना है। 'ब्रिक्स' दुनिया की पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। जैसा कि नाम से अनुमान लगाया जा सकता है, ये देश हैं - ब्राजील, रुस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। ब्रिक्स के विचार की परिकल्पना वर्ष 2001 में की गई थी, जो 2006 में ब्रिक के रूप में सामने आई और 2010 में जब इस समूह में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ, तो यह ब्रिक्स बन गया।
'ब्रिक' शब्दावली के जन्मदाता जिम ओ'नील हैं। ओ'नील ने इस शब्दावली का प्रयोग सबसे पहले वर्ष 2001 में अपने शोधपत्र में किया था। उस शोधपत्र का शीर्षक था, "बिल्डिंग बेटर ग्लोबल इकोनॉमिक ब्रिक्स"। ओ'नील अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कंसलटेंसी गोल्डमैन सैक्स से जुड़े हैं।
rupee
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सोशल मीडिया
क्या भारत भी अपनी मुद्रा का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने के प्रयास में है?
भारत डॉलर को वैश्विक मुद्रा के रूप में रुपये से बदलने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। देश लगातार डॉलर की कमी से जूझ रहे देशों को अपने व्यापार भारतीय रुपये में करने की पेशकश कर रहा है। भारत का लक्ष्य है कि अपने उन पड़ोसी देशों को संकट से बचाया जा सके जिनका यह महत्वपूर्ण व्यापारिक साझीदार है।
भारत के अलावा और कौन से देश डॉलर से मुक्ति पाना चाहते हैं?
डॉलर से अपने कारोबार को अलग करने की दिशा में रूस और चीन पहले से ही काम कर रहे हैं। पिछले साल दिसंबर में रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन ने बताया था कि दोनों देशों के बीच अब लगभग आधा कारोबार अपनी मुद्राओं- रुबल और युवान में हो रहा है। मुशुस्तिन ने चीन के प्रधानमंत्री ली किचियांग के साथ एक वीडियो कांफ्रेंस में हिस्सा लिया था। इसमें उन्होंने उम्मीद जताई थी कि अब डॉलर या यूरो में भुगतान करने की जगह सभी देश अपनी राष्ट्रीय मुद्राएं का अधिक इस्तेमाल करेंगे। मिशुस्तिन ने कहा था कि बाहरी दबावों और प्रतिकूल आर्थिक स्थितियों के बावजूद रूस और चीन का आपसी व्यापार तेजी से बढ़ रहा है। इस वर्ष के पहले दस महीनों में दोनों देशों के बीच लगभग 150 बिलियन डॉलर का कारोबार हुआ, जो साल भर पहले की तुलना में एक तिहाई ज्यादा है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन
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अमर उजाला
नई मुद्रा निर्माण में रूस की क्या भूमिका होगी?
विश्लेषकों के मुताबिक रूस ने अंतरराष्ट्रीय कारोबार में अमेरिकी मुद्रा डॉलर के वर्चस्व को खत्म करने को अपना लक्ष्य बना रखा है। इसी कोशिश में वह अलग-अलग देशों के साथ आपसी मुद्राओं में कारोबार को बढ़ावा दे रहा है। इसमें उसे चीन और भारत जैसे देशों का साथ मिला है। नवंबर 2022 में यूरेशिया इकॉनमिक यूनियन (यूएईयू) की बैठक में भी रूस ने इसी मुद्दे को सबसे ज्यादा तरजीह दी थी। वहां रूस से ईएईयू मामलों के मंत्री सर्गेई ग्लेजयेव ने विभिन्न देशों के बीच आपसी मुद्राओं में भुगतान के सिस्टम का एक खाका पेश किया था। उन्होंने बताया था कि इस सिस्टम से संबंधित प्रस्ताव यूरेशियन इकॉनमिक कमीशन (ईईसी) और ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) को भेजा गया है।
इस रूसी प्रस्ताव के तहत कई देशों के भुगतान कार्डों को शामिल कर एक कार्ड तैयार किया जाएगा। इन कार्डों में भारत का रूपे, रूस का मीर, ब्राजील एलो, चीन का यूनियन-पे आदि शामिल होंगे।
विश्लेषकों के मुताबिक रूस ने अंतरराष्ट्रीय कारोबार में अमेरिकी मुद्रा डॉलर के वर्चस्व को खत्म करने को अपना लक्ष्य बना रखा है। इसी कोशिश में वह अलग-अलग देशों के साथ आपसी मुद्राओं में कारोबार को बढ़ावा दे रहा है। इसमें उसे चीन और भारत जैसे देशों का साथ मिला है। नवंबर 2022 में यूरेशिया इकॉनमिक यूनियन (यूएईयू) की बैठक में भी रूस ने इसी मुद्दे को सबसे ज्यादा तरजीह दी थी। वहां रूस से ईएईयू मामलों के मंत्री सर्गेई ग्लेजयेव ने विभिन्न देशों के बीच आपसी मुद्राओं में भुगतान के सिस्टम का एक खाका पेश किया था। उन्होंने बताया था कि इस सिस्टम से संबंधित प्रस्ताव यूरेशियन इकॉनमिक कमीशन (ईईसी) और ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) को भेजा गया है।
इस रूसी प्रस्ताव के तहत कई देशों के भुगतान कार्डों को शामिल कर एक कार्ड तैयार किया जाएगा। इन कार्डों में भारत का रूपे, रूस का मीर, ब्राजील एलो, चीन का यूनियन-पे आदि शामिल होंगे।
डॉलर से अलग कैसी होगी भुगतान व्यवस्था?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ पेपे एस्कोबार ने एक टिप्पणी में लिखा था कि प्रस्तावित कार्ड वीजा या मास्टर कार्ड की तर्ज पर होगा, जो इस व्यवस्था में शामिल होने वाले सभी देशों में चलेगा। इसके जरिए किसी भी मुद्रा में किया गए भुगतान तुरंत दूसरे देश की मुद्रा में प्राप्त हो जाएगा। एस्कोबार ने लिखा था- ‘यह व्यवस्था पश्चिम नियंत्रित मौद्रिक व्यवस्था के लिए प्रत्यक्ष चुनौती साबित होगी। इसके तहत ब्रिक्स देश डॉलर से हटते हुए आपसी व्यापार का भुगतान अपनी मुद्राओं में करेंगे।’
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ पेपे एस्कोबार ने एक टिप्पणी में लिखा था कि प्रस्तावित कार्ड वीजा या मास्टर कार्ड की तर्ज पर होगा, जो इस व्यवस्था में शामिल होने वाले सभी देशों में चलेगा। इसके जरिए किसी भी मुद्रा में किया गए भुगतान तुरंत दूसरे देश की मुद्रा में प्राप्त हो जाएगा। एस्कोबार ने लिखा था- ‘यह व्यवस्था पश्चिम नियंत्रित मौद्रिक व्यवस्था के लिए प्रत्यक्ष चुनौती साबित होगी। इसके तहत ब्रिक्स देश डॉलर से हटते हुए आपसी व्यापार का भुगतान अपनी मुद्राओं में करेंगे।’
डॉलर
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पिक्साबे
देश क्यों तलाश रहे हैं अमेरिकी डॉलर का विकल्प?
अमेरिकी डॉलर का लगभग पूरी दुनिया में दबदबा है। अधिकांश व्यापार अमेरिकी डॉलर में दर्शाया जाता है। स्विट्जरलैंड स्थित बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स, बासेल के अनुसार, वैश्विक व्यापार का लगभग 50 फीसदी अमेरिकी डॉलर में होता है। हालांकि, पिछले कुछ समय से इसमें अचानक वृद्धि देखी गई है। फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत की तुलना में अमेरिकी डॉलर 10 प्रतिशत अधिक और एक दशक पहले की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक मूल्य पर आ गया है। बीते अक्तूबर में एक समय पर डॉलर 2000 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर था।
मुद्रा के मूल्य में इस बढ़ोतरी की वजह से डॉलर में देय ऋण को चुकाना और अधिक महंगा हो गया है। खासकर उन देशों के लिए जो अन्य देशों से बड़ी मात्रा में ईंधन, खाद्य और अन्य आवश्यक वस्तुएं खरीदते हैं, यह उनके आयात में अचानक वृद्धि का कारण भी बन गया है। यही कारण है कि न केवल भारत, चीन और रूस डॉलर के प्रति अपने जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि अमेरिका के करीबी दोस्त भी विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
अमेरिकी डॉलर का लगभग पूरी दुनिया में दबदबा है। अधिकांश व्यापार अमेरिकी डॉलर में दर्शाया जाता है। स्विट्जरलैंड स्थित बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स, बासेल के अनुसार, वैश्विक व्यापार का लगभग 50 फीसदी अमेरिकी डॉलर में होता है। हालांकि, पिछले कुछ समय से इसमें अचानक वृद्धि देखी गई है। फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत की तुलना में अमेरिकी डॉलर 10 प्रतिशत अधिक और एक दशक पहले की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक मूल्य पर आ गया है। बीते अक्तूबर में एक समय पर डॉलर 2000 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर था।
मुद्रा के मूल्य में इस बढ़ोतरी की वजह से डॉलर में देय ऋण को चुकाना और अधिक महंगा हो गया है। खासकर उन देशों के लिए जो अन्य देशों से बड़ी मात्रा में ईंधन, खाद्य और अन्य आवश्यक वस्तुएं खरीदते हैं, यह उनके आयात में अचानक वृद्धि का कारण भी बन गया है। यही कारण है कि न केवल भारत, चीन और रूस डॉलर के प्रति अपने जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि अमेरिका के करीबी दोस्त भी विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।