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अमेरिका: हेल्थ केयर सिस्टम का ऐसा हाल! संसाधन की कमी बनी एंटीबॉडीज इलाज में बाधा

Tue, 26 Oct 2021 07:32 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 26 Oct 2021 07:32 PM IST
सार

अपने अध्ययन के दौरान सीएनएन ने डॉ. फाउची से पूछा कि अस्पतालों में डॉक्टर एंडीबॉडीज चिकित्सा क्यों नहीं दे रहे हैं। इस पर उनक जवाब था- ‘मैं बताने की स्थिति में नहीं हूं। यह इलाज कारगर होता है। हमें लोगों को ये बात समझानी होगी।’ मोनोक्लोनल प्रयोगशाला में तैयार एंटीबॉडीज हैं। इन्हें मनुष्य के प्राकृतिक एंटीबॉडीज की नकल कर तैयार किया जाता है...

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US Doctors not using FDA approved monoclonal antibody therapy in the early stages of covid-19 treatment
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

क्या अमेरिका में ज्यादातर डॉक्टरों को कोविड-19 के मरीजों के मनोक्लोनल एंटीबॉडीज इलाज की जानकारी नहीं है? ये सवाल टीवी चैनल सीएनएन की एक खोजी रिपोर्ट से उठा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक बहुत से मरीजों ने टीवी चैनल से कहा कि डॉक्टरों ने उनसे कभी एंटीबॉडीज इलाज की चर्चा नहीं की। जबकि लगभग एक साल पहले अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने इस इलाज की मंजूरी दे दी थी। एफडीए के मुताबिक कोविड-19 संक्रमण के आरंभिक चरण में मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज चिकित्सा ऐसा उपाय है, जिससे मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने या उनकी मृत्यु की दर बहुत घट जाती है।

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डॉ. एंथनी फाउची ने दिया था प्रेजेंटेशन

सीएनएन के मुताबिक अमेरिका की संघीय सरकार ने इस बारे में डॉक्टरों को शिक्षित करने की कोशिशें की हैं। इस साल अगस्त में इस बारे में कोरोना महामारी के बारे में बाइडन प्रशासन के सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची ने एक प्रेजेंटेशन भी दिया था। संक्रामक रोग विशेषज्ञ और यूसीएसएफ स्कूल ऑफ मेडिसीन में प्रोफेसर डॉ. पीटर चिन-होंग ने सीएनएन से कहा- ‘यह बात समझ से बाहर है। हमारे पास ऐसी दवा है, जिसके बारे में साक्ष्य मौजूद हैं। ये दवा सरकार मुफ्त दे रही है। लेकिन हमारे सिस्टम में ऐसी रुकावटें हैं, जिनके कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।’

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अमेरिकन हॉस्पिटल एसोसिएशन के नीति संबंधी निदेशक अकिन डेमेहिन ने कहा- ‘कुछ अस्पताल इस स्थिति में नहीं हैं कि वे मोनोक्लोनल एंडीबॉडी चिकित्सा के लिए संसाधन आवंटित कर सकें।’ इसका नतीजा यह हुआ है कि अनगिनत मरीजों को ये चिकित्सा नहीं मिल पाई। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर डॉ. लिंडसे बैडेन ने कहा- ‘इस बात ने हमारे हेल्थ सिस्टम में मौजूद खामियों को बेनकाब कर दिया है। इसमें तुरंत सुधार की जरूरत है।’
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व्हाइट हाउस में दिए प्रेजेंटेशन में डॉ. फाउची ने डॉक्टरों से बेहिचक मोनोक्लोनल एंडीबॉडीज इलाज करने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि ये चिकित्सा देने के बाद कोविड-19 मरीज के अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत 70 से 85 फीसदी तक कम हो जाती है। उन्होंने कहा था- ‘कोविड-19 में यह बहुत प्रभावी इलाज है। इसका जरूरत से कम इस्तेमाल हुआ है। हमारी सलाह है कि इसका अधिक से अधिक उपयोग किया जाए।’

प्रयोगशाला में तैयार होती हैं मोनोक्लोनल एंडीबॉडीज

अपने अध्ययन के दौरान सीएनएन ने डॉ. फाउची से पूछा कि अस्पतालों में डॉक्टर एंडीबॉडीज चिकित्सा क्यों नहीं दे रहे हैं। इस पर उनक जवाब था- ‘मैं बताने की स्थिति में नहीं हूं। यह इलाज कारगर होता है। हमें लोगों को ये बात समझानी होगी।’ मोनोक्लोनल प्रयोगशाला में तैयार एंटीबॉडीज हैं। इन्हें मनुष्य के प्राकृतिक एंटीबॉडीज की नकल कर तैयार किया जाता है। ये एंटीबॉडीज कोविड-19 वायरस को मानव कोशिकाओं से जुड़ने से रोक देते हैं। इस कारण ये वायरस शरीर के अंदर नए वायरस नहीं पैदा कर पाते। उससे शरीर नुकसान से बच जाता है।



लेकिन अमेरिका में बीते सितंबर में जब कोविड संक्रमण के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ, तो ज्यादातर अस्पतालों में इस इलाज को प्राथमिकता नहीं दी गई। अमेरिकन हॉस्पिटल एसोसिएशन का कहना है कि मोनोक्लोनल एंटीबॉटीज देना आसान नहीं है। इसकी वजह अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी है। डेमेहिन ने कहा- ‘ऐसी चिकित्सा में उपकरण, मरीजों को बैठाने की जगह, और योग्य कर्मचारियों की जरूरत होती है। इन सबकी बहुत कमी है।’

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