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US-China Ties: टैरिफ नीति में दिखा ट्रंप का दोहरा चरित्र, भारत पर सख्ती के बीच चीन को 90 दिन की मोहलत और दी

Tue, 12 Aug 2025 07:06 AM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 12 Aug 2025 07:06 AM IST
सार

अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह के फैसले ले रहे हैं, इससे उनका दोहरा चरित्र सामने आ गया है। ट्रंप ने एक तरफ जहां भारत के लिए 25 फीसदी टैरिफ और रूस से आयात पर जुर्माना लगाने का एलान किया है, तो दूसरी तरफ उन्होंने चीन को 90 दिन की मोहलत और देने का फैसला लिया है। जानिए ट्रंप के इस फैसले के मायने

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US China Extend trade truce 90 days extension easing economic tensions know details in hindi
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के साथ रिश्ते सामान्य करने के भरपूर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर चीनी समकक्ष को 'अच्छा दोस्त' बताया है। सकारात्मक कोशिशों का सबसे ताजा उदाहरण है चीन को टैरिफ पर रियायत देना। उन्होंने टैरिफ वसूलने की अवधि को 90 दिन और आगे बढ़ा दिया है। ट्रंप ने सोमवार को व्यापार को लेकर टकराव (ट्रेड ट्रूस) 90 दिन टालने का फैसला लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- ट्रुथ सोशल पर लिखा, समय सीमा का विस्तार होने के बावजूद समझौते की अन्य सभी शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी।

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ट्रंप ने चीन को रियायत देने के साथ क्या कहा?
दरअसल, ट्रंप के फैसले के बाद दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टकराव टल गया है। पहले से निर्धारित समयसीमा मंगलवार 12:01 बजे समाप्त होनी थी, जिसके बाद अमेरिका चीनी आयात पर पहले से 30% ऊंचे शुल्क और बढ़ा सकता था। ऐसा करने पर चीन भी जवाबी कार्रवाई के तहत अमेरिका से निर्यात होने वाले उत्पादों पर शुल्क बढ़ा सकता था। ऐसे में 90 दिनों की राहत यानी ट्रेड ट्रूस को अहम माना जा रहा है।
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हालांकि, ट्रंप का ये फैसला भारत के नजरिए से इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि एक हफ्ते तक टैरिफ वसूली टालने के बाद ट्रंप प्रशासन अब 25 फीसदी शुल्क वसूली शुरू कर चुका है। दबाव बढ़ाने की नीतियों के तहत ट्रंप ने 27 अगस्त से 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ और थोपने का एलान किया है। ऐसे में टैरिफ को लेकर उनके दोहरे चरित्र का भी पता लग रहा है।

ये भी पढ़ें- मुद्दा: टैरिफ से मुकाबला कैसे.... अर्थव्यवस्था को बहिर्मुखी बनाने के साथ ही निर्यातकों को बढ़ावा देना होगा

एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन को मिली 90 दिनों की मोहलत के बाद दोनों देशों को मतभेद सुलझाने का अवसर मिलेगा। साथ ही दोनों पक्षों को इस वर्ष के अंत तक राष्ट्रपति ट्रंप व चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात का रास्ता भी साफ करने का अवसर मिला है। अमेरिकी कंपनियों ने इस कदम का स्वागत किया है। अमेरिका-चीन बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष सीन स्टीन ने इसे बाजार में पैठ बढ़ाने और कंपनियों के दीर्घकालिक निवेश निर्णयों के लिहाज से जरूरी बताया।


जापान और यूरोपीय संघ ने भी ट्रंप की टैरिफ नीति को मान लिया
यह भी दिलचस्प है कि ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका ने लगभग हर देश पर भारी शुल्क लगाया है। वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर इस फैसले का असर पड़ रहा है। औसत अमेरिकी शुल्क 2.5% से बढ़कर 18.6% हो गया है, जो 1933 के बाद सबसे अधिक है। यूरोपीय संघ और जापान जैसे साझेदारों ने भी उच्च शुल्क स्वीकार कर समझौते कर लिए हैं, ताकि और कठोर कदमों से बचा जा सके।

जब चीन ने दुर्लभ खनिजों और मैग्नेट्स की आपूर्ति सीमित करने की धमकी दी तो अमेरिका के तेवर नरम पड़े और उन्होंने टैरिफ वसूली की तारीख आगे खिसकाने का निर्णय लिया। जून में दोनों के बीच समझौता हुआ। अमेरिका ने कंप्यूटर चिप तकनीक और एथेन पर निर्यात प्रतिबंध घटाए, जबकि चीन ने अमेरिकी कंपनियों तक दुर्लभ खनिजों की पहुंच आसान करने पर सहमति दी।

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अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध आने वाले वर्षों तक जारी रहेगा
इससे पहले मई में, अमेरिका ने चीन पर 145% टैरिफ लगाने का एलान किया था। जवाब में चीन ने अमेरिका पर 125% टैरिफ लगाने का एलान किया। बाद में दोनों देशों ने अत्यधिक शुल्क घटाकर क्रमशः 30% और 10% कर दिए थे। इस कारण वैश्विक वित्तीय बाजार में गिरावट का दौर टल गया। फिलहाल दोनों देशों के बीच कठिन मुद्दों पर सहमति की संभावना कम है और विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध आने वाले वर्षों तक जारी रहेगा।

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