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मुद्दा: टैरिफ से मुकाबला कैसे.... अर्थव्यवस्था को बहिर्मुखी बनाने के साथ ही निर्यातकों को बढ़ावा देना होगा

Tue, 12 Aug 2025 05:58 AM IST
Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Tue, 12 Aug 2025 05:58 AM IST
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सार
टैरिफ का मुकाबला करने के लिए भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को बहिर्मुखी बनाने के साथ ही निर्यातकों को बढ़ावा देना होगा। 
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How to deal with US tariffs Along with making economy outward-looking exporters also have to be encouraged
टैरिफ पर ट्रंप की नीतियों ने दुनियाभर को परेशानी में डाला - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। गौरतलब है कि अमेरिकी डेयरी उत्पादों और आनुवांशिक रूप से संवर्धित (जीएम) फसलों के लिए बाजार पहुंच पर मतभेद के चलते भारत और अमेरिका के बीच एक अगस्त की निर्धारित समय-सीमा में अंतरिम व्यापार समझौता नहीं हो पाया। नतीजतन डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर 25 फीसदी शुल्क (टैरिफ) लागू कर दिया और रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने का आदेश जारी कर दिया। भारत अब ब्राजील के साथ सर्वाधिक 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ वाला देश बन गया है, जबकि भारत के निर्यात प्रतिस्पर्धी एशियाई देशों पर भी कम टैरिफ लगा है। 



 ऐसे में जहां चालू वित्त वर्ष में भारत के लिए 900 अरब डॉलर के रिकॉर्ड निर्यात के लक्ष्य को पाना मुश्किल है, वहीं देश की अनुमानित विकास दर के घटकर छह फीसदी पर पहुंचने की चुनौती भी बढ़ गई है। इसलिए टैरिफ चुनौती का मुकाबला करने के लिए नई रणनीति के तहत किसानों और निर्यातकों को सब्सिडी देने, घरेलू खपत को बढ़ाने, एमएसएमई की मजबूती, स्वदेशी व आत्मनिर्भर भारत अभियान एवं मुक्त व्यापार समझौतों की ओर तेजी से बढ़ना होगा। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में दोनों देशों के बीच कारोबार में तेजी आने की संभावनाएं दिखाई दे रही थीं, जो अब धूमिल हो गई हैं। 


दरअसल भारत ने कृषि और डेयरी क्षेत्र में रियायत नहीं देने की दृढ़ता दिखाई है, जिसके कारण दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने उच्च टैरिफ का एलान किया है। हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था निर्यात प्रधान नहीं है, फिर भी अब उसे वैश्विक व्यापार में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार और निर्यात गंतव्य है। वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का निर्यात किया, जिसमें भारत का व्यापार अधिशेष 40.8 अरब डॉलर रहा। 

उच्च टैरिफ से भारत के कई उद्योग-कारोबार प्रभावित होंगे। मसलन, ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियां, टेक्सटाइल्स, धातु और फार्मा कंपनियों पर टैरिफ का असर देखने को मिल सकता है। उच्च टैरिफ से विकास दर और निर्यात घटने की चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार ने रणनीतिपूर्वक आगे बढ़ना शुरू किया है। नई रणनीति के तहत वाणिज्य मंत्रालय ने विभिन्न क्षेत्रों के निर्यातकों के साथ बैठकें की हैं, ताकि उच्च शुल्क के कारण होने वाली समस्याओं को समझकर उन्हें राहत दी जा सके। निर्यातक सरकार से वित्तीय सहायता, किफायती ऋण, ब्याज सब्सिडी चाहते हैं। वे बकाया राशि का समय पर भुगतान और राजकोषीय प्रोत्साहनों के विस्तार की जरूरत महसूस कर रहे हैं। 

यही नहीं, अब भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को और बहिर्मुखी बनाना होगा। भारत द्वारा ईएफटीए, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और यूके के साथ किए गए एफटीए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। भारत को यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ एफटीए से मजबूत लाभ हुआ है। यूएई के साथ सेवाओं का निर्यात लगभग दोगुना हो गया है। भारत और ब्रिटेन के बीच एफटीए पर हस्ताक्षर हो गए हैं। भारत में स्विट्जरलैंड की राजदूत माया तिस्साफी ने कहा कि भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफटीए) के बीच व्यापार समझौता अक्तूबर से लागू हो जाएगा। भारत यूरोपीय आयोग, ओमान, कतर, न्यूजीलैंड, पेरू, चिली, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, इस्राइल सहित अन्य देशों के साथ भी एफटीए को अंतिम रूप देने की डगर पर आगे बढ़ रहा है।  

भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के जीवंत आर्थिक क्षेत्र से फिर से जुड़ना होगा और पूर्व के अपने पड़ोसियों के साथ आर्थिक जुड़ाव का रास्ता दोबारा तैयार करना होगा। साथ ही भारत को व्यापक एवं प्रगतिशील प्रशांत पार साझेदारी (सीपीटीपी) का हिस्सा बनने के लिए आगे बढ़ना होगा। प्रधानमंत्री मोदी इसी महीने के अंत में एससीओ सम्मेलन में हिस्सा लेने चीन जाएंगे। टैरिफ की चुनौती के बीच निर्यातकों के समक्ष शुल्क के अलावा जो नॉन टैरिफ बाधाएं हैं, उन्हें भी दूर करने की जरूरत है। चीन सहित अन्य देशों में निर्यात बढ़ाने के लिए कदम उठाना जरूरी है, ताकि भारतीय निर्यातकों को प्रोत्साहन मिल सके। इनवर्टेड टैक्स स्ट्रक्चर और जीएसटी में सुधार काफी समय से लंबित है। जीएसटी दरों में भी कमी करने की जरूरत है। अब भारत के प्रभावी सेवा निर्यात की रफ्तार सुस्त हो गई है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है। 

उम्मीद करें कि सरकार अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ की चुनौती से मुकाबला करने के लिए देश के किसानों, निर्यातकों और उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए रणनीतिपूर्वक आगे बढ़ेगी। साथ ही कारोबार सुगमता, एमएसएमई की मुश्किलों को कम करने, स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन एवं पर्यटन को बढ़ावा देने और नए एफटीए को तेजी से आकार देने के लिए सरकार आगे बढ़ेगी। 

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