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AUKUS: ऑस्ट्रेलिया जल्द खरीदेगा अमेरिकी परमाणु-संचालित पनडुब्बियां, ब्रिटिश पीएम सुनक ने कही यह बात

Tue, 14 Mar 2023 07:01 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Tue, 14 Mar 2023 07:01 PM IST
सार

Nuclear-powered Submarines Deal: संयुक्त बयान में कहा गया है कि समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया की 2030 तक तीन अमेरिकी वर्जीनिया क्लास की परमाणु-संचालित पनडुब्बियों को खरीदने की उम्मीद है। एक पनडुब्बी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद 2027 तक अमेरिका अपनी दो पनडुब्बियों को ऑस्ट्रेलिया के तटों पर तैनात करेगा।

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US Australia and Britain on Monday unveiled plan to provide Australia with nuclear powered attack submarines
AUKUS - फोटो : twitter.com/@POTUS

विस्तार

Nuclear-powered Submarines Deal:चीन की करतूतों से परेशान दुनियाभर के देश उसके खिलाफ पुरजोर तरीके से योजनाएं बना रहे हैं। दक्षिण चीन सागर से लेकर दुनियाभर में फैले व्यापार में ड्रैगन के हस्तक्षेप को लेकर ताकतवर देश उस पर नजर बनाए हुए हैं और इसी के मद्देनजर त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन ऑकस के तहत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-संचालित पनडुब्बियां मिलने जा रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के नेताओं ने सोमवार को ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-संचालित हमलावर पनडुब्बियां देने की योजना का खुलासा किया।

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हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ड्रैगन को रोकने की तैयारी
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के उद्देश्य से सैकड़ों अरब डॉलर के निवेश से जुड़ा एक बड़ा कदम है। इस समझौते से चीन को जरूर मिर्ची लगेगी, इससे पहले इन तीनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन का मुकाबला करने के प्रयासों के तहत 2021 में ऑकस (AUKUS) की घोषणा की थी। 
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जो बाइडन ने कही बड़ी बात
सैन डिएगो में अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर एक समारोह को संबोधित करते हुए, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस और ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सनक के साथ, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने 2021 ऑकस साझेदारी के तहत समझौते को एक मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए साझा प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया, जिसमें अमेरिका के दो सबसे दिग्गज और सक्षम सहयोगी हैं। 
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संयुक्त बयान में कहा गया है कि समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया को 2030 तक तीन अमेरिकी वर्जीनिया क्लास की परमाणु-संचालित पनडुब्बियों को खरीदने की उम्मीद है। एक पनडुब्बी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद 2027 तक अमेरिका अपनी दो पनडुब्बियों को ऑस्ट्रेलिया के तटों पर तैनात करेगा।

AUKUS परमाणु पनडुब्बियां वैश्विक सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन -पीएम सुनक
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने मंगलवार को कहा कि ब्रिटिश शिपयार्ड में बनने वाली ऑकस परमाणु पनडुब्बियों की पहली पीढ़ी वैश्विक सुरक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन है। ब्रिटिश पीएम ने कहा कि पारंपरिक रूप से सशस्त्र परमाणु-संचालित पनडुब्बी जिसे 'एसएसएन-ऑकस' कहा जाता है, ब्रिटिश शिपयार्ड में बनाई जाएंगी। 

डाउनिंग स्ट्रीट द्वारा जारी एक बयान में सुनक के हवाले से कहा गया कि AUKUS साझेदारी और ब्रिटिश शिपयार्ड में हम जो पनडुब्बियां बना रहे हैं, वे वैश्विक सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का एक ठोस प्रदर्शन हैं। 
बयान में आगे कहा गया कि यह साझेदारी हमारे साझा मूल्यों के आधार पर स्थापित की गई थी मुझे बहुत खुशी है कि आज हमने जिन योजनाओं की घोषणा की है, उनमें अग्रणी ब्रिटिश डिजाइन विशेषज्ञता हमारे लोगों और हमारे सहयोगियों की रक्षा करेगी। 

वहीं, ब्रिटेन के रक्षा सचिव बेन वालेस ने कहा कि यह हमारे तीन देशों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि हम इंडो-पैसिफिक और दुनिया भर में सुरक्षा में योगदान देने के लिए मिलकर काम करते हैं। 


30 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का होगा प्रोजेक्ट
नेताओं के बयान में कहा गया है कि बहु-स्तरीय परियोजना ब्रिटिश और ऑस्ट्रेलियाई उत्पादन और पनडुब्बी के एक नए वर्ग के संचालन के साथ समाप्त होगी। साथ ही बयान में कहा गया है कि एसएसएन ऑकस के तहत  ब्रिटेन की अगली पीढ़ी के डिजाइन पर आधारित एक "त्रिपक्षीय रूप से विकसित" पोत जो ब्रिटेन में बनाया जाएगा, जिसमें ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका संयुक्त रूप से तकनीकी सहयोग करेंगे। एक ऑस्ट्रेलियाई रक्षा अधिकारी ने कहा कि परियोजना की लागत 2055 तक 368 बिलियन डॉलर (245 बिलियन डॉलर) होगी।


चीन कर रहा विरोध
ऑकस के तहत पहली बार होगा जब वाशिंगटन ने 1950 के दशक में ब्रिटेन के साथ ऐसा करने के बाद से परमाणु-प्रणोदन तकनीक साझा की है। वहीं चीन इस समझौते का विरोध कर रहा है और अवैध कार्य के रूप में ऑकस की निंदा की है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन मिलकर चीन पर दबाव बनाना चाहते हैं। वहीं ब्रिटेन का कहना है कि ऑकस का यह समझौता नई नौकरियां पैदा करेगा और इसकी अर्थव्यवस्था की कम विकास दर को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

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