United States: हर सर्वे से एक ही संकेत, अमेरिका में 8 नवंबर को बाइडन की पार्टी की बुरी हार संभव
United States: न्यूयॉर्क टाइम्स/ सियेना सर्वे में मिडटर्म्स में संसदीय चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को 49 फीसदी और डेमोक्रेटिक पार्टी को 45 फीसदी मतदाताओं का समर्थन मिलने का अनुमान लगाया गया है। सीबीएस/ यूगोव सर्वे में ये संख्या क्रमशः 47 फीसदी और 45 फीसदी बताई गई है...
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अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनावों से तीन हफ्ते पहले ही राष्ट्रपति जो बाइडन की डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावना और कमजोर होती नजर आ रही है। महंगाई और गिरती आर्थिक संभावनाओं के कारण अब ये आशंका मजबूत हो गई है कि इन चुनावों में कांग्रेस (संसद) के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी अपना बहुमत गंवा देगी। ऐसा हुआ तो उसके बाद राष्ट्रपति बाइडन के लिए शासन करना और बेहद मुश्किल हो जाएगा।
अमेरिका में हर दो साल पर संसदीय चुनाव होते हैं। इस दौरान निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के सभी 435 सदस्यों का चुनाव होता है, जबकि ऊपरी सदन सीनेट के एक तिहाई सदस्यों का निर्वाचन होता है। राष्ट्रपति के कार्यकाल के मध्य में होने के कारण इन चुनावों को मिडटर्म्स कहा जाता है। मिडटर्म्स के दौरान कई राज्यों के गवर्नरों और राज्यों की विधायिका का चुनाव भी होता है।
पिछले दो दिन में जारी चुनाव सर्वेक्षण रिपोर्टों से आठ नवंबर को होने वाले मिडटर्म्स में डेमोक्रेटिक पार्टी की मुश्किलें बढ़ने के संकेत मिले हैं।
रविवार को जारी हुए सीबीएस न्यूज/ यूगोव सर्वे में 68 फीसदी लोगों ने राय जताई कि अर्थव्यवस्था लगातार बिगड़ रही है और बाइडन प्रशासन ने महंगाई पर काबू पाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। सोमवार को न्यूयॉर्क टाइम्स/ सियेना कॉलेज सर्वे जारी हुआ। इसमें 64 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि देश गलत दिशा में जा रहा है। सोमवार को ही एपी-एनओआरसी सर्वे जारी हुआ, जिसमें 70 प्रतिशत मतदाताओं ने अमेरिका के मौजूदा हाल पर असंतोष जताया।
न्यूयॉर्क टाइम्स/ सियेना सर्वे में मिडटर्म्स में संसदीय चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को 49 फीसदी और डेमोक्रेटिक पार्टी को 45 फीसदी मतदाताओं का समर्थन मिलने का अनुमान लगाया गया है। सीबीएस/ यूगोव सर्वे में ये संख्या क्रमशः 47 फीसदी और 45 फीसदी बताई गई है।
इस बीच टीवी चैनल सीएनएन ने सभी सर्वेक्षण नतीजों का औसत प्रकाशित किया है। इसके मुताबिक डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियो को औसतन 46 फीसदी मतदाताओं का समर्थन हासिल है। सीएनएन के पिछले सर्वे औसत में डेमोक्रेटिक पार्टी को तीन फीसदी की बढ़त दिखाई गई थी। उसका मतलब है कि कुल मिला कर डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए समर्थन में गिरावट आई है।
सीएनएन ने कहा है कि तमाम सर्वेक्षणों से यही संकेत मिलता है कि रिपब्लिकन पार्टी के लिए समर्थन बढ़ रहा है। ताजा सर्वेक्षणों का निष्कर्ष यह है कि मतदाताओं का ध्यान मोटे तौर पर अर्थव्यवस्था पर केंद्रित है। इससे डेमोक्रेटिक पार्टी की इस उम्मीद को झटका लगा है कि सुप्रीम कोर्ट के गर्भपात को कानून दर्जा देने वाले फैसले को पलटने के बाद उसके पक्ष में गर्भपात समर्थक मतदाता गोलबंद हो सकते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि रिपब्लिकन पार्टी शासित राज्यों में चुनाव क्षेत्रों की सीमा मनमाफिक ढंग से तय करने के कारण ये पार्टी पहले से अधिक लाभ की स्थिति में रहती है। हाल के दशकों में इस वजह से संसदीय चुनावों में उसके लिए स्थितियां अधिक अनुकूल बनी रही हैं। इस बार महंगाई ने मतदाताओं का रुख और भी ज्यादा उसकी तरफ झुका दिया है। इससे मिडटर्म्स में उसे अपेक्षित से अधिक बड़ी जीत मिल सकती है।