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अमेरिका: गर्भपात रोकने के आर्थिक नुकसान पर अर्थशास्त्रियों ने डाली रोशनी

Thu, 23 Sep 2021 04:17 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 23 Sep 2021 04:17 PM IST
सार

अर्थशास्त्रियों ने मिसिसिपी राज्य की अदालत में अपना पक्ष रखा है। टेक्सस राज्य में एक कानून बना कर गर्भस्थ भ्रूण में हृदय की धड़कन शुरू होने के बाद गर्भपात कराने को अवैध ठहरा दिया गया है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने टेक्सस के कानून पर स्टे लगाने की याचिका पिछले दिनों ठुकरा दी थी...

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United states: economists and researchers have described in a report the economic impact of denying abortion freedom to women
गर्भपात कानून - फोटो : Social Media

विस्तार

जिस वक्त गर्भपात अधिकार को लेकर अमेरिका में बहस गर्म है, 150 से ज्यादा अर्थशास्त्रियों और अनुसंधानकर्ताओं ने एक रिपोर्ट में बताया है कि गर्भपात की आजादी से वंचित करने का महिलाओं पर कैसा आर्थिक असर होगा। लगभग 50 साल पहले अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात को वैध ठहराया था। लेकिन अब टेक्सस और मिसिसिपी जैसे राज्यों में ऐसे कानून बनाए गए हैं, जिनके तहत गर्भपात कराना बेहद मुश्किल हो गया है। इसके अलावा भी कई राज्यों में गर्भपात अधिकारों को संकुचित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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अर्थशास्त्रियों ने मिसिसिपी राज्य की अदालत में अपना पक्ष रखा है। यहां बनाए गए कानून में गर्भपात को गैर कानूनी बना दिया गया है। इसके खिलाफ अदालत में याचिका दायर की गई है। टेक्सस राज्य में एक कानून बना कर गर्भस्थ भ्रूण में हृदय की धड़कन शुरू होने के बाद गर्भपात कराने को अवैध ठहरा दिया गया है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने टेक्सस के कानून पर स्टे लगाने की याचिका पिछले दिनों ठुकरा दी थी।
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अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि गर्भपात अधिकार का महिलाओं के वेतन और शिक्षा से सीधा संबंध है। यह अधिकार न होने का सबसे बुरा असर ब्लैक महिलाओं पर पड़ेगा। अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि अगर गर्भपात संबंधी सुप्रीम कोर्ट के पांच दशक पुराने फैसले को पलट दिया गया, तो पहले साल में ही लगभग एक लाख 20 हजार महिलाएं गर्भपात की मेडिकल सुविधा से वंचित हो जाएंगी।

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कोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों ने कहा है- ‘इस बात के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि अमेरिका में महिलाओं ने सामाजिक और आर्थिक जीवन में जो प्रगति हासिल की, उसमें गर्भपात के मिले अधिकार की बड़ी भूमिका रही है। अगर इस अधिकार में कटौती हुई, तो उसका महिलाओं के जीवन पर गहरा नकारात्मक असर होगा।’

अमेरिका में महिला अधिकार संगठन गर्भपात अधिकार को संकुचित करने के प्रयासों के खिलाफ लगातार आंदोलन चला रहे हैं। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था इंस्टीट्यूट फॉर वूमन्स पॉलिसी रिसर्च की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निकोल मेसन ने कहा है कि गर्भपात पर नियंत्रण का महिलाओं की जिंदगी पर वास्तविक और ठोस असर होता है। इससे शिक्षा प्राप्त करने की उनकी संभावना बाधित होती है, उनका वेतन और करियर के विकल्प सीमित हो जाते हैं और श्रम शक्ति (लेबर फोर्स) में उनके भाग लेने की संभावना घट जाती है। इस सबकी वजह से उनके गरीबी में चले जाने का जोखिम बढ़ जाता है।

अमेरिकी की कई बड़ी कंपनियां भी गर्भपात अधिकार के खिलाफ हो रहे प्रयासों से परेशान हैं। इसी हफ्ते 50 से अधिक कंपनियों ने एक साझा बयान में कहा कि गर्भपात पर प्रतिबंध से हमारी महिला कर्मियों और ग्राहकों की सेहत, स्वतंत्रता और आर्थिक स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी। थिंक टैंक सेंटर ऑन इकॉनमिक्स ऑफ रिप्रोडक्टिव हेल्थ ने अपने एक अध्ययन में कहा है कि गर्भपात अधिकार संकुचित होने से अर्थव्यवस्था को हर साल 105 अरब डॉलर का नुकसान होगा। ऐसा महिलाओं की लेबर फोर्स में भागीदारी घटने और उनकी आमदनी घटने के कारण होगा।

निकोल मेसन ने ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स से कहा- ‘गर्भपात कराना चाहिए या नहीं, इसके पक्ष और विपक्ष में कई नैतिक तर्क हो सकते हैं। लेकिन इस चर्चा में इस बात का जिक्र नहीं होता कि गर्भपात से रोकने का महिलाओं और उनके परिवारों पर आर्थिक प्रभाव क्या होता है।’

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