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United Nations: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को किया बेनकाब, आतंकवाद पर सुनाई खरी-खरी 

Fri, 19 Nov 2021 05:55 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Published by: Amit Mandal Updated Fri, 19 Nov 2021 05:55 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव राजेश परिहार ने कहा कि आतंकवाद के खतरे का सफलतापूर्वक मुकाबला करने के लिए आतंकवादियों को वित्तीय संसाधनों तक पहुंचने से रोकना जरूरी है।

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United Nations: India hits out at Pakistan over terrorism and financial aid to terrorists oraganizations
यूएन में भारत ने पाकिस्तान को घेरा (प्रतीकात्मक) - फोटो : iStock

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर आतंकवाद के आका पाकिस्तान को बेनकाब किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि कुछ देश आतंकवाद का समर्थन करने और सहयोग करने के स्पष्ट रूप से दोषी हैं और वे जानबूझकर आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह देते हैं। भारत ने ऐसे देशों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कार्रवाई करने की अपील की। साथ ही सामूहिक रूप से ऐसे देशों को जवाबदेह ठहराने का भी आह्वान किया।

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भारत ने कहा, हम सीमा पार आतंकवाद के शिकार 
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से कहा कि भारत तीन दशकों से अधिक समय से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव राजेश परिहार ने गुरुवार को आतंकवाद विरोधी समिति और 1267/1989/2253 आईएसआईएल (दाएश) और अलकायदा प्रतिबंध समिति की संयुक्त विशेष बैठक में यह टिप्पणी की। उन्होंने रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि ये रिपोर्ट्स संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकी समूहों के नेताओं पर मुकदमा चलाने में दक्षिण एशिया के कुछ देशों की ढिलाई की ओर इशारा करती हैं। यहां आतंकी संगठन लगातार धन जुटा रहे हैं।  
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राजेश परिहार ने कहा कि आतंकवाद के खतरे का सफलतापूर्वक मुकाबला करने के लिए आतंकवादियों को वित्तीय संसाधनों तक पहुंचने से रोकना जरूरी है। कुछ देशों में कानूनी परिचालन ढांचे और आवश्यक आतंकवाद के वित्तपोषण (सीएफटी) क्षमताओं का मुकाबला करने की कमी है तो कुछ देश ऐसे हैं जो साफ तौर पर आतंकवाद को सहायता और समर्थन देने व जानबूझकर वित्तीय सहायता और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह देने के दोषी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे देशों को उनके इन कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए।

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