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United Nations: ईरान के परमाणु गतिविधियों को नहीं जांच पाई UN की टीम, केंद्र तक जाने की नहीं मिली अनुमति
Fri, 27 Feb 2026 08:10 PM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वियना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वियना
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 27 Feb 2026 08:10 PM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु संस्था ने रिपोर्ट दी है कि ईरान ने उन्हें अपने परमाणु केंद्र की जांच करने से रोक दिया है। इस कारण संस्था यह स्पष्ट नहीं कर पा रही है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन बंद किया है या नहीं।
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संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की परमाणु निगरानी संस्था ने कहा है कि वह ईरान की परमाणु गतिविधियों की पुष्टि नहीं कर पा रही है। गोपनीय सूत्रों के अनुसार, ईरान ने जून में 12 दिन के युद्ध से प्रभावित अपने परमाणु केंद्र तक अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को जाने की इजाजत नहीं दी। यह रिपोर्ट सदस्य देशों को भेजी गई है। निगरानी संस्था का कहना है कि पहुंच न मिलने के कारण वे यह जांचने में असमर्थ हैं कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन का काम रोका है या नहीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एजेंसी को उस केंद्र में मौजूद यूरेनियम स्टॉक की सही मात्रा की जानकारी भी नहीं मिल पा रही है।
यूरेनियम भंडार और परमाणु बम का खतरा
हालांकि आईएईए के अनुसार, ईरान के पास वर्तमान में 60 प्रतिशत शुद्धता वाला लगभग 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है। यह स्तर परमाणु हथियार बनाने के लिए आवश्यक 90 प्रतिशत शुद्धता के बेहद करीब है। एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान चाहे, तो इस भंडार से वह 10 परमाणु बम तैयार कर सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के पास अभी कोई हथियार मौजूद है।
ये भी पढ़ें: Pakistan-Afghanistan Clash: पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव सुलझाने के लिए आगे आया चीन, शांति बनाए रखने की अपील की
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सैटेलाइट तस्वीरों से संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा
एजेंसी ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए इस्फहान, नटांज और फोर्डो जैसे केंद्रों पर संदिग्ध गतिविधियां देखी हैं। इस्फहान के टनल कॉम्प्लेक्स के पास गाड़ियों की आवाजाही दर्ज की गई है। गौरतलब है कि पिछले साल जून में युद्ध के दौरान इजरायल और अमेरिका ने इस्फहान की परमाणु साइटों पर मिसाइल हमले किए थे। पहुंच न होने के कारण एजेंसी इन गतिविधियों के असली मकसद को नहीं समझ पा रही है।
कूटनीतिक प्रयास और बातचीत जारी
परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में बातचीत चल रही है, जिसमें आईएईए के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी भी शामिल हुए हैं। ओमान की मध्यस्थता में ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच तीन दौर की चर्चा हो चुकी है। हालांकि, गुरुवार को हुई बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे, जबकि ईरान का दावा है कि उसका कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है। अगले हफ्ते वियना में तकनीकी स्तर की बातचीत फिर से शुरू होगी। फिलहाल, मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है क्योंकि अमेरिका ने क्षेत्र में अपने युद्धपोतों और विमानों का बड़ा बेड़ा तैनात कर दिया है।
अन्य वीडियो-
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यूरेनियम भंडार और परमाणु बम का खतरा
हालांकि आईएईए के अनुसार, ईरान के पास वर्तमान में 60 प्रतिशत शुद्धता वाला लगभग 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है। यह स्तर परमाणु हथियार बनाने के लिए आवश्यक 90 प्रतिशत शुद्धता के बेहद करीब है। एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान चाहे, तो इस भंडार से वह 10 परमाणु बम तैयार कर सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के पास अभी कोई हथियार मौजूद है।
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सैटेलाइट तस्वीरों से संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा
एजेंसी ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए इस्फहान, नटांज और फोर्डो जैसे केंद्रों पर संदिग्ध गतिविधियां देखी हैं। इस्फहान के टनल कॉम्प्लेक्स के पास गाड़ियों की आवाजाही दर्ज की गई है। गौरतलब है कि पिछले साल जून में युद्ध के दौरान इजरायल और अमेरिका ने इस्फहान की परमाणु साइटों पर मिसाइल हमले किए थे। पहुंच न होने के कारण एजेंसी इन गतिविधियों के असली मकसद को नहीं समझ पा रही है।
कूटनीतिक प्रयास और बातचीत जारी
परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में बातचीत चल रही है, जिसमें आईएईए के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी भी शामिल हुए हैं। ओमान की मध्यस्थता में ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच तीन दौर की चर्चा हो चुकी है। हालांकि, गुरुवार को हुई बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे, जबकि ईरान का दावा है कि उसका कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है। अगले हफ्ते वियना में तकनीकी स्तर की बातचीत फिर से शुरू होगी। फिलहाल, मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है क्योंकि अमेरिका ने क्षेत्र में अपने युद्धपोतों और विमानों का बड़ा बेड़ा तैनात कर दिया है।
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