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अनोखे मुकदमे का निपटारा: पर्यावरण को नुकसान, फ्रांस पर लगा जुर्माना

Sun, 07 Feb 2021 07:08 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: देव कश्यप Updated Sun, 07 Feb 2021 07:08 AM IST
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Unique lawsuit settled Paris court finds French state guilty for damage to environment Penalty imposed
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

दुनिया में पहली बार जलवायु परिवर्तन को लेकर एक अनोखे मुकदमे का निपटारा हुआ है। पेरिस की एक अदालत ने फ्रांस सरकार को जलवायु खतरों से निपटने के लिए पूरा प्रयास नहीं करने का दोषी करार दिया है। अदालत ने फ्रांस सरकार पर एक यूरो का प्रतीकात्मक जुर्माना लगाया है। पेरिस की प्रशासनिक अदालत में इस मुकदमे की सुनवाई हुई। 

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दरअसल, दो साल पूर्व चार गैर सरकारी संगठनों ने यह मुकदमा दायर किया था, जिसे 23 लाख लोगों का समर्थन प्राप्त था। ऑनलाइन याचिका पर इतने लोगों ने हस्ताक्षर किए थे। कई बार सुनवाई करने के बाद बुधवार को अदालत ने फैसला दिया। अदालत ने ऐतिहासिक फैसले में फ्रांस में जलवायु परिवर्तन पारिस्थितिकीय तंत्र को क्षति पहुंचने की बात मानी।

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अदालत ने कहा कि फ्रांस सरकार ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के लक्ष्यों को पूरा करने में नाकामयाब रही है, जिसके चलते पारिस्थितिकीय क्षति हुई। इस पर अदालत ने राज्य को मुआवज़े के रूप में 1 यूरो की प्रतीकात्मक रकम का भुगतान करने का आदेश दिया।

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निर्णय लेने के लिए खुद को दो महीने का समय दिया
मुकदमे के दौरान पेरिस की अदालत ने समस्या को सुधारने और चीजों को खराब होने से रोकने के उपायों पर निर्णय लेने के लिए खुद को दो महीने का समय दिया। अदालत ने कहा कि क्षति की भरपाई के लिए सरकार को ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के लक्ष्यों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

 

इन लक्ष्यों को नहीं किया पूरा

  • रिन्यूएबल ऊर्जा : 2020 के लिए लक्ष्य 23 है, लेकिन एक बड़ी क्षमता के बावजूद फ्रांस 2019 में केवल 17.2 तक पहुंचा है। यूरोपीय संघ में उसका प्रदर्शन सबसे खराब है।
  • भवनों का ऊर्जा नवीकरण : प्रति वर्ष 0.2 की दर है। जबकि 2022 के बाद एक प्रति वर्ष और 2030 तक प्रति वर्ष 1.9 की दर से कार्य होना है। जो रफ्तार है वह लक्ष्य के अनुरूप नहीं है।
  • कृषि में आर्गेनिक खेती : यह कार्य महज आठ फीसदी हुआ है, जबकि 2020 में इसे 20 फीसदी तक पहुंच जाना चाहिए था। जो कार्य किया जा रहा है उससे 2022 में सिर्फ 15 फीसदी का लक्ष्य ही हासिल किया जा सकता है।
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