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मांस के लिए जानवरों की हत्या से दुखी एक बच्चे ने बड़ा होकर बनाया शाकाहारी मीट
Mon, 28 Dec 2020 08:03 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला रिसर्च टीम, बीजिंग
अमर उजाला रिसर्च टीम, बीजिंग
Published by: Kuldeep Singh
Updated Mon, 28 Dec 2020 08:03 AM IST
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हांगकांग में 31 साल पहले मांसाहार से नाराज हो खाना छोड़ देने वाला 4 साल का एक बच्चा अब दुनिया के सामने इसका विकल्प परोस रहा है। ब्लेर क्रिश्टन नाम का वह बच्चा पौधों से मांस तैयार करने वाली एशिया की पहली कंपनी- 'कराना' का मालिक है।
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चीन, सिंगापुर, हांगकांग सहित कई देशों में बढ़ा रहे मांसाहार का विकल्प
कंपनी चीन, सिंगापुर, हांगकांग समेत एशियाई बाजार में मांस जैसे दिखने वाले शाकाहारी विकल्प पेश कर रही है। क्रिश्टन ने अच्छी खासी बैंक की नौकरी छोड़कर बचपन में सीखे नैतिक मूल्य निभाने के लिए यह कदम उठाया है।
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पौधों पर आधारित मांस बनाने वाली पहली एशियाई कंपनी के मालिक ब्लेर क्रिश्टन की कहानी
खटहल से बन रहा पोर्क
क्रिश्टन का कहना है कि उनकी कंपनी पौधों से कुदरती तौर पर मांस जैसे दिखने वाले विकल्प चुनती हैं। इनमें खटहल का स्वादिष्ट 'पोर्क' बनाने से लेकर मटर, सोयाबीन और गेहूं से कई डिशें बनाई जा रही हैं।
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डॉक्यूमेंट्री ने बदली जिंदगी... 2019 में बने कराना के सह-संस्थापक
क्रिश्टन ने 2016 में एक डॉक्यूमेंट्री काउ-पायरेसी देखी। इसमें पशु मांस के पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव दिखाए गए हैं। इसके बाद उन्होंने सैन फ्रांसिस्को जाकर मांस, डेयरी उत्पाद और अंडों के पौधों आधारित विकल्पों की जानकारी ली। यहां वे डग रीग्लेर से मिले जो सिंगापुर में कराना शुरू कर चुका था। क्रिश्टन बतौर सह-संस्थापक उनके साथ जुड़ गए।
पर्यावरण के प्रति संवेदनशील... बचपन में सीखे नैतिक मूल्य निभाने की ठानी
मैं शुरू से ही पर्यावरण को लेकर संवेदनशील था। ज्यों-ज्यों बड़ा हुआ तो यह ज्यादा स्पष्ट हुआ कि डेयरी, अंडा और मांस उद्योग का जलवायु पर बड़ा प्रभाव पड़ता है इसके चलते मैं शुद्ध शाकाहारी हो गया।
- ब्लेर क्रिश्टन