आक्रामक हो रहा है तालिबान: अफगानिस्तान में तेज हो रही है लड़ाई और बढ़ता जा रहा है असमंजस
लश्कर गाह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित है। कंदहार और हेरात के बीच के हाईवे के यह बीच में आता है। यह देश का प्रमुख कृषि इलाका है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक अगर तालिबान का लश्कर गाह पर कब्जा हो गया, तो देश के 34 प्रांतों में उसके नियंत्रण में आने वाली ये पहली प्रांतीय राजधानी होगी...
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अमेरिका और नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के सैनिकों की अफगानिस्तान में बची-खुची मौजूदगी का आखिरी महीना शुरू होने के साथ ही देश में अनिश्चय और बढ़ गया है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के एलान के मुताबिक ये फौज वापसी 31 अगस्त तक पूरी कर ली जाएगी। इस बीच तालिबान का रुख और आक्रामक होने के संकेत मिले हैं। फिलहाल सबका ध्यान हेलमांद प्रांत की राजधानी लश्कर गाह पर कब्जे के लिए अफगान सैनिकों और तालिबान के बीच चल रही लड़ाई है।
लश्कर गाह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित है। कंदहार और हेरात के बीच के हाईवे के यह बीच में आता है। यह देश का प्रमुख कृषि इलाका है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक अगर तालिबान का लश्कर गाह पर कब्जा हो गया, तो देश के 34 प्रांतों में उसके नियंत्रण में आने वाली ये पहली प्रांतीय राजधानी होगी। देश के कई प्रमुख राजमार्गों पर तालिबान का पहले ही कब्जा हो चुका है। बीते शनिवार को सामने आए एक वीडियो से संकेत मिला कि तालिबान का लश्कर गाह और वहां के हवाई अड्डे को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण सड़क पर कब्जा हो चुका है।
अमेरिकी सेना के मुताबिक उसके 95 फीसदी सैनिक अफगानिस्तान से लौट चुके हैं। इसका मतलब है कि अब अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की प्रतीकात्मक मौजूदगी ही बची है। तालिबान ने इसका पूरा फायदा उठाया है। अमेरिकी पत्रिका- लॉन्ग वॉर जर्नल ने एक ताजा ताजा अनुमान में कहा है कि हेरात प्रांत के 16 में से 13 जिलों पर अब तालिबान का कब्जा हो चुका है। उसने ज्यादातर इलाकों पर कब्जा जुलाई महीने में ही किया। लॉन्ग वॉर जर्नल के मुताबिक देश के 223 जिलों पर अब तालिबान का नियंत्रण है। 116 जिलों पर कब्जे के लिए उसकी अफगान बलों के साथ उसकी तेज लड़ाई चल रही है। अमेरिकी टीवी चैलन सीएनएन के एक आकलन के मुताबिक देश के 34 में से 17 प्रांतीय राजधानियों पर तालिबान का नियंत्रण हो जाने का खतरा पैदा हो चुका है।
लॉन्ग वॉर जर्नल के संपादक बिल रोगियो ने शनिवार को सीएनएन से बातचीत में कहा- ‘तालिबान के खिलाफ लड़ाई में अफगान बलों की ताकत में 80 फीसदी योगदान अमेरिकी वायु सेना का था। उसकी वापसी से अफगान वायु सेना बहुत बड़े दबाव में आ गई है।’ इसके पहले संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थियों की निगरानी वाली एजेंसी यूएनएचसीआर ने बताया था कि तालिबान के आगे बढ़ने की वजह से दो लाख 94 हजार लोग बेघर हो चुके हैं। इससे अफगानिस्तान में युद्ध के कारण विस्थापित हुए लोगों की संख्या 35 लाख तक पहुंच चुकी है। यूएसएचसीआर ने पिछले 21 जुलाई को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बीते जून में 77 हजार लोग विस्थापित हुए।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक तालिबान ने इस साल आरंभ से लड़ाई तेज कर दी। इस कारण देश में पांच हजार से ज्यादा लोग हताहत हो चुके हैं। ये संख्या 2020 में इसी अवधि में हताहत हुए कुल लोगों की संख्या से 47 फीसदी ज्यादा है। इस बीच उलटे तालिबान ने सरकारी बलों पर मानव अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया है। तालिबान के प्रवक्ता जबिनुल्लाह मुजाहिद ने एक ट्विट में कहा कि ‘किराए के सैनिकों’ ने लश्कर गोह में हवाई बमबारी की जिसमें निहत्थे लोगों मारे गए।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि उसने सैकड़ों सैनिकों को हेरात प्रांत में भेजा है। उन्हें वहां तालिबान को कुचलने के लिए भेजा गया है। मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि उससे वहां सुरक्षा की स्थिति सुधरेगी। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि असल सूरत यह है कि हालत लगातार बिगड़ रही है।