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एंटोनियो गुटेरेस ने केरल में बाढ़ से लोगों की मौत पर दुख जताया, संयुक्त राष्ट्र की स्थिति पर नजर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 18 Aug 2018 12:58 PM IST
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केरल में बाढ़
- फोटो : PTI
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केरल करीब एक शताब्दी बाद आई भीषण बाढ़ से जूझ रहा है और मदद के लिए गुहार लगा रहा है। इस त्रासदी में महज एक दिन में 106 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच आठ अगस्त के बाद से बाढ़ के चलते मृतकों की संख्या बढ़कर 324 हो गई है। करीब ढाई लाख लोग बेघर हो चुके हैं और उन्होंने शरणार्थी शिविरों में शरण ली हुई है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस केरल में आए विनाशकारी बाढ़ के कारण लोगों की मौत और विनाश से दुखी हैं। गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक यह जानकारी दी और कहा कि विश्व संगठन स्थिति पर बहुत करीब से नजर बनाए हुए है।
दुजारिक ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, संयुक्त राष्ट्र "भारत में बाढ़ के कारण हुई मौतों, विनाश और विस्थापन से दुखी है," जो करीब 100 वर्षों में आया सबसे भयंकर बाढ़ है।
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यह पूछे जाने पर कि क्या भारत ने संयुक्त राष्ट्र से मदद मांगी है, उन्होंने कहा कि मदद के लिए कोई अनुरोध नहीं किया गया है और कहा, "जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर प्रणाली काम कर रही है।"
उन्होंने कहा, "लेकिन निश्चित रूप से हमारी टीम बारीकी से नजर बनाए हुए है, मैं अपने रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर यूरी अफनासिएव के संपर्क में हूं, वे जमीनी स्थिति के भागीदारों के संपर्क में हैं।"
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस केरल में आए विनाशकारी बाढ़ के कारण लोगों की मौत और विनाश से दुखी हैं। गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक यह जानकारी दी और कहा कि विश्व संगठन स्थिति पर बहुत करीब से नजर बनाए हुए है।
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दुजारिक ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, संयुक्त राष्ट्र "भारत में बाढ़ के कारण हुई मौतों, विनाश और विस्थापन से दुखी है," जो करीब 100 वर्षों में आया सबसे भयंकर बाढ़ है।
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यह पूछे जाने पर कि क्या भारत ने संयुक्त राष्ट्र से मदद मांगी है, उन्होंने कहा कि मदद के लिए कोई अनुरोध नहीं किया गया है और कहा, "जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर प्रणाली काम कर रही है।"
उन्होंने कहा, "लेकिन निश्चित रूप से हमारी टीम बारीकी से नजर बनाए हुए है, मैं अपने रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर यूरी अफनासिएव के संपर्क में हूं, वे जमीनी स्थिति के भागीदारों के संपर्क में हैं।"