{"_id":"607f2ce88ebc3eb92d46a5c1","slug":"un-report-says-that-india-lost-14-billion-dollar-in-2020-due-to-amfan-cyclone","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिपोर्ट : अम्फान चक्रवात से 2020 में भारत को 14 अरब डॉलर की क्षति","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
रिपोर्ट : अम्फान चक्रवात से 2020 में भारत को 14 अरब डॉलर की क्षति
Wed, 21 Apr 2021 01:05 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र।
एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 21 Apr 2021 01:05 AM IST
सार
- संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में पिछले दशक को सबसे गर्म बताया गया
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर...
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विश्व निकाय की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर पिछले साल मई में आया चक्रवात ‘अम्फान’ सबसे महंगा साबित हुआ। उत्तरी हिंद महासागर में इस उष्णकटिबंधीय चक्रवात में भारत को करीब 14 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन के लिहाज से पिछला दशक सबसे गर्म रहा।
विज्ञापन
भारतीय समयानुसार मंगलवार को जारी ‘ग्लोबल क्लाइमेट 2020’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 की मार झेल रहे भारत को इस तूफान के कारण दोहरी मार झेलनी पड़ी। भारत-बांग्लादेश सीमा के पास 20 मई को भूस्खलन भी हुआ।
विज्ञापन
इस दौरान हताहतों की संख्या कम रहने के बावजूद 129 लोग मारे गए। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 तीन सबसे गर्म साल रिकॉर्ड किया गया। 2015 के बाद से छह साल रिकॉर्ड स्तर पर गर्म रहे हैं। इस हिसाब से 2011 से 2020 का दशक सबसे गर्म दशक रहा।
विज्ञापन
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरस ने विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) द्वारा संकलित रिपोर्ट के लांच अवसर पर कहा कि वर्ष 2020 धरती और यहां रहने वाले लोगों के लिए एक अभूतपूर्व वर्ष रहा है। संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट काफी भयावह है जिसे दुनिया के सभी नेताओं और निर्णयकर्ताओं को पढ़ना चाहिए।
अम्फान के बाद क्षेत्र में 2,000 से ज्यादा की मौतें
अम्फान तूफान के चलते भारत में करीब 24 लाख लोग विस्थापित हुए। इनमें ज्यादातर पश्चिम बंगाल और ओडिशा में हुए। बांग्लादेश में इस चक्रवात के कारण 25 लाख लोग विस्थापित हुए।
इसके बाद जून से सितंबर के बीच भारत में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा बारिश हुई जिससे बाढ़, भूस्खलन जैसी घटनाएं हुईं। इस दौरान भारत, पाक, नेपाल, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और म्यांमार में 2,000 से ज्यादा लोग मारे गए।