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UN: 'दो अरब महिलाएं सामाजिक सुरक्षा व कल्याण योजनाओं के दायरे से बाहर', संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में दावा

Wed, 16 Oct 2024 01:11 PM IST
काव्या मिश्रा यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 16 Oct 2024 01:11 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में महिलाओं व लड़कियों तक, नकदी सहायता, स्वास्थ्य देखभाल और पेंशन संबंधी नीतियों से मिलने वाली सहायता नहीं पहुंच पा रही है। 

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UN Report claimed Two billion women are outside the ambit of social security and welfare schemes
लाओस की एक कॉफ़ी नर्सरी में कुछ युवतियां काम करती हुईं। - फोटो : संयुक्त राष्ट्र

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की है। इसमें दावा किया गया है कि विश्वभर में दो अरब से अधिक महिलाओं व लड़कियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। महिला सशक्तिकरण मामलों के लिए यूएन संस्था (यून वूमन) ने 17 अक्तूबर को ‘अंतरराष्ट्रीय निर्धनता उन्मूलन दिवस’ से ठीक पहले प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में ये निष्कर्ष साझा किए।

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सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की हो रही कोशिश
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2015 के बाद से अब तक महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों में कुछ सफलता मिली है। मगर अधिकांश विकासशील देशों में इसकी कवरेज की खाई चौड़ी होती जा रही है। ऐसी योजनाओं का लाभ गैर-आनुपातिक ढंग से पुरुषों को मिल रहा है, जिससे लैंगिक समानता पर केंद्रित पांचवें टिकाऊ विकास लक्ष्य को पूरा करने के प्रयासों पर जोखिम मंडरा रहा है। 
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जीवन के हर चरण व आयु वर्ग में निर्धनता का सामना करने वाले लोगों में महिलाओं व लड़कियों की संख्या सबसे अधिक है। बच्चों का लालन-पोषण करने वाले वर्षों में यह विसंगति सबसे अधिक नजर आती है। 25 से 34 वर्ष आयु वर्ग में, पुरुषों की तुलना में महिलाओं द्वारा अत्यधिक निर्धनता का सामना करने की संभावना 25 फीसदी तक अधिक होती है।
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निर्धनता से जूझ रहीं महिलाएं
जलवायु परिवर्तन और हिंसक टकराव के कारण यह असमानता बढ़ रही है। स्थायित्वपूर्ण देशों की तुलना में संवेदनशील हालात वाले क्षेत्रों में महिलाओं के अत्यधिक निर्धनता से जूझने की आशंका, साढ़े सात गुना तक अधिक होती है। 

महंगाई के कारण भोजन व ऊर्जा की कीमतों में उछाल
2022 के बाद से अब तक मुद्रास्फीति की ऊंची दर के कारण भोजन व ऊर्जा की कीमतों में उछाल आया है, जिसका महिलाओं पर विशेष रूप से असर हुआ है। इसके बावजूद, 171 देशों की सरकारों द्वारा अपनाए गए एक हजार से अधिक सामाजिक सुरक्षा उपायों में, केवल 18 प्रतिशत महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा पर लक्षित हैं। 

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह सीधे तौर पर दर्शाता है कि अक्सर लैंगिक परिप्रेक्ष्य, विशिष्ट जरूरतों और संवेदनशीलताओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। 

मातृत्व योजनाओं का लाभ भी नहीं ले पा रहीं 63 फीसदी महिलाएं
एक अनुमान के अनुसार, विश्व भर में 63 फीसदी से अधिक महिलाएं मातृत्व योजनाओं के लाभ के बिना ही बच्चों को जन्म दे रही हैं। सब-सहारा अफ्रीका में यह आंकड़ा 94 फीसदी है। मातृत्व अवकाश के दौरान वित्तीय समर्थन का अभाव है, जिससे महिलाएं आर्थिक दृष्टि से एक बड़ी चुनौती को झेलने के लिए मजबूर होती हैं। साथ ही, उन्हें अक्सर अपने व बच्चों के स्वास्थ्य व कल्याण के साथ समझौता करना पड़ता है और निर्धनता फिर कई पीढ़ियों तक जारी रहती है। 


प्रगति के मिल रहे संकेत 
कुछ देशों में सामाजिक सुरक्षा लाभ के क्षेत्र में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने पर बल दिया जा रहा है। मंगोलिया में मातृत्व अवकाश के दायरे में अनौपचारिक श्रमिकों, जैसे कि गडेरियों को भी लाया गया है। बच्चों की देखभाल के लिए लैंगिक समानता को समर्थन देने के इरादे से, पितृत्व अवकाश व्यवस्था को भी मजबूती प्रदान की गई है। वहीं, सेनेगल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा का विस्तार किया गया है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सके। 

(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)

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