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Hindi News ›   World ›   UN refused representation to the Taliban government in Afghanistan and military rule of Myanmar

फैसला: संयुक्त राष्ट्र में म्यांमार के सैन्य शासन, तालिबान को स्थान नहीं

Fri, 03 Dec 2021 05:30 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली।
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 03 Dec 2021 05:30 AM IST
सार

अफगान राजदूत ने कहा हमारा झंडा फहराता रहेगा इस समय अफगान मिशन का नेतृत्व कर रहे राजदूत गुलाम इसाकजई तालिबानी सरकार की कई मुद्दों पर खुली आलोचना करते रहे हैं।

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UN refused representation to the Taliban government in Afghanistan and military rule of Myanmar
संयुक्त राष्ट्र (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार और म्यांमार के सैन्य शासन को प्रतिनिधित्व देने से इनकार कर दिया है। मौजूदा स्थायी अफगान मिशन ही फिलहाल अफगानिस्तान का यूएन में प्रतिनिधित्व करता रहेगा। माना जा रहा है कि तालिबान की दमनकारी हरकतों के कारण मान्यता न देने फैसला किया गया है।

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अफगान मिशन के अनुसार यूएन की मान्यता समिति ने इस विषय पर बैठक करके निर्णय लिया कि मौजूदा अफगान शासन और म्यांमार की सैन्य सरकार को यूएन में सीट नहीं दी जा सकती। नतीजे में अशरफ गनी सरकार के समय नियुक्त किए गए मौजूदा अफगान मिशन का प्रतिनिधित्व बरकार रहेगा। आने वाले दिनों में यही समिति महासभा को अपनी रिपोर्ट देगी।
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इस प्रकार अफगान नागरिक अगर यूएन से संपर्क करते हैं तो यही मिशन मदद करेगा। इससे पहले नवंबर में यूएन की विशेष प्रतिनिधि डेबोरा लियन ने कहा था कि तालिबानी यूएन से मान्यता तो चाहते हैं, लेकिन विश्वास का संकट बना हुआ है।
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महिलाओं, अल्पसंख्यकों व स्थानीय समुदायों पर उसने जो कदम उठाए, उनसे मान्यता पाने में नई बाधाएं पैदा  हुईं। हालांकि, लोगों को संकटपूर्ण हालात से उबारने के लिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान के नेताओं से वार्ता जारी रखने का निवेदन किया था।

अफगान राजदूत ने कहा हमारा झंडा फहराता रहेगा इस समय अफगान मिशन का नेतृत्व कर रहे राजदूत गुलाम इसाकजई तालिबानी सरकार की कई मुद्दों पर खुली आलोचना करते रहे हैं।


यूएन के ताजा कदम पर उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान का तीन रंग का राष्ट्रीय झंडा ही संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पर फहराता रहेगा। वे पहले भी लड़कियों को शिक्षा की स्वतंत्रता को कुरान की शिक्षा के अनुरूप बता कर तालिबानियों द्वारा लगाए प्रतिबंधों कर चुके हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय राहत से आतंकियों के परिवारों को मदद देने का आरोप लगा चुके हैं। 

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