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Human Rights: मानवाधिकार के उल्लंघन को लेकर चीन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग, जवाबदेही के लिए UN पर दबाव

Wed, 21 Sep 2022 12:27 AM IST
निर्मल कांत एजेंसी, न्यूयॉर्क।
एजेंसी, न्यूयॉर्क। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 21 Sep 2022 12:27 AM IST
सार

चीन पर शिनजियांग में इन समूहों पर अत्याचार करने, उनका यौन उत्पीड़न करने और उन्हें वहां से जाने के लिए मजबूर करने का आरोप है। 

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UN pressure on China to account for minority persecution
चीन में मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ प्रदर्शन - फोटो : सोशल मीडिया (फाइल)

विस्तार

विभिन्न देशों के राजनयिकों एवं मानवाधिकार समर्थकों ने चीन पर ‘मानवता के खिलाफ अपराधों’ संबंधी रिपोर्ट के तहत यूएन से उसके विरुद्ध कड़े कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा, विश्व निकाय को भविष्य में इस बात पर आंका जाएगा कि वह जातीय अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के संबंध में चीन पर लगे आरोपों से किस तरह निपटती है। इस पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।

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मानवाधिकार समर्थक संस्थाएं एवं पत्रकार कई वर्षों से शिनजियांग में उइगर और अन्य मुस्लिम जातीय समूहों के उत्पीड़न का आरोप लगाते रहे हैं। चीन पर शिनजियांग में इन समूहों पर अत्याचार करने, उनका यौन उत्पीड़न करने और उन्हें वहां से जाने के लिए मजबूर करने का आरोप है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की गत माह जारी एक रिपोर्ट ने इन आरोपों को और हवा दे दी है।
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अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत फर्नांड डी वेरेंस ने ‘अटलांटिक काउंसिल एंड ह्यूमन राइट्स वॉच’ द्वारा प्रायोजित एक कार्यक्रम में कहा, अब निष्क्रिय बने रहना संभव नहीं है। यदि हम सजा दिए बगैर किसी को छोड़ देंगे, तो इससे क्या संदेश जाएगा? इसलिए इस पर कार्रवाई होना चाहिए।
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वैश्विक प्रणाली के भरोसे पर असर
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी उपराजदूत जेफ्री प्रोस्कॉट ने कहा, इन अत्याचारों को लेकर क्या प्रतिक्रिया दी जाती है, उससे हमारी अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के भरोसे पर असर पड़ेगा। यह देखकर बहुत दुख होता है कि आधुनिक संयुक्त राष्ट्र प्रणाली बनाने में इतनी अहम भूमिका निभाने वाले देश और यूएन में स्थायी दर्जा रखने वाला देश अपनी प्रतिबद्धताओं का इतना गंभीर उल्लंघन कर रहा है।

लंबे समय तक टाली गई रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की पूर्व उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट के कार्यकाल के आखिरी दिन के अंतिम क्षणों में चीन द्वारा कथित उत्पीड़न की रिपोर्ट जारी की गई थी। ऐसा माना जाता है कि इस रिपोर्ट को लंबे समय तक टाला गया। जबकि चीन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट जारी होने पर हैरानी व नाराजगी जताई। चीन ने रिपोर्ट को अवैध और अमान्य करार दिया है।

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