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UN: वैश्विक सभ्यताओं का गठबंधन क्या है और यह इस समय क्यों महत्वपूर्ण हो गया है?
Tue, 26 Nov 2024 12:33 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 26 Nov 2024 12:33 PM IST
सार
यूएन वैश्विक सभ्यताओं के गठबंधन का बरसों से यही सिद्धांत रहा है: अनगिनत संस्कृतियां, एक मानवता। इस सिद्धांत के आधार पर, सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक बहुलवाद व पारस्परिक सम्मान को अपनाने व प्रोत्साहन देने के लिए, तत्कालीन यूएन महासचिव, कोफी अन्नान ने 2005 में इसकी आधारशिला रखी थी।
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सामाजिक परिवर्तन के लिए काम करने वाला एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) सर्कस जाम्बिया।
- फोटो : Circus Zambia
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विस्तार
गाजा, लेबनान, सूडान, यूक्रेन और अन्य इलाकों में, भुखमरी और अकाल की चेतावनियों के बीच भीषण युद्ध जारी हैं, और ऑनलाइन व ऑफलाइन नफरत, यहूदीवाद-विरोध, मुस्लिम-विरोधी कट्टरता में भयावह वृद्धि हुई है। दुनिया भर में समुदायों के बीच बढ़ती खाई को पाटने के प्रयासों के तहत, 25 से 27 नवंबर तक, संयुक्त राष्ट्र वैश्विक सभ्यताओं के गठबंधन का 10वां वैश्विक मंच आयोजित किया जा रहा है। लेकिन, यह असल में है क्या और इस समय यह वैश्विक मंच इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया है?
इस बारे में कुछ जानकारी यहां दी जा रही है
मानवता के लिए गठबंधन
यूएन वैश्विक सभ्यताओं के गठबंधन का बरसों से यही सिद्धांत रहा है: अनगिनत संस्कृतियां, एक मानवता। इस सिद्धांत के आधार पर, सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक बहुलवाद व पारस्परिक सम्मान को अपनाने व प्रोत्साहन देने के लिए, तत्कालीन यूएन महासचिव, कोफी अन्नान ने 2005 में इसकी आधारशिला रखी थी।
वैश्विक सभ्यताओं का गठबंधन (UN Alliance of Civilizations), लगभग दो दशकों से, इस सिद्धांत पर पूर्ण रूप से अमल करता रहा है। इस गठबंधन से इस्राइली और फलस्तीनी संगीतकारों का एक समूह जुड़ा है, जो शरणार्थियों को निशाना बनाती नफरत से निपटने के लिए करने के लिए संगोष्ठियों का आयोजन करते हैं, और दुनियाभर में अंतर-धार्मिक संवादों में शामिल होने जैसी गतिविधियों में भाग लेते हैं।
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इसके तहत, विश्वभर में व्याप्त, विभाजन को पाटने, मतभेदों को दूर करने तथा स्थानीय व वैश्विक स्तर पर कूटनीति के जरिए, अधिक शान्तिपूर्ण, समावेशी भविष्य को आकार देने में मदद की जाती है। यही वो मूल्य हैं, जो सितंबर में न्यूयॉर्क में आयोजित भविष्य के शिखर सम्मेलन में अपनाए गए, भविष्य के लिए समझौते का भी हिस्सा बने हैं, और सतत विकास के 2030 एजेंडा के 17 लक्ष्यों में निहित हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का कहना है, "यह गठबंधन केवल 'अच्छा महसूस करने के लिए' की गई एक पहल भर नहीं है। हम शांति, सुरक्षा, सतत विकास और जैसे विश्व का जो निर्माण करना चाहते है, यह उसकी स्थापना का मूल आधार है।"
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से खेलकूद तक
वैश्विक सभ्यताओं का यह गठबंधन, वैश्विक स्तर पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता है जो एक सुरक्षित सभा स्थल के रूप में काम करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में 130 से अधिक देशों के हजारों प्रतिनिधि, इन आयोजनों में नवीनतम चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए है और भविष्य के लिए समाधानों पर सहमति बनाने में सफल हुए हैं। जब नागरिक समाज और सरकारों के प्रतिभागी एक साथ मिलकर, अशांति के इस दौर में परस्पर साझा मूल्यों का जश्न मनाते हैं, तो लोगों के दिलों में उम्मीद की किरण जागती है।
पुर्तगाल के कास्केस शहर में सोमवार को, इस गठबन्धन का 10वां मंच आरंभ हुआ है, जिसकी थीम है, Uniting in Peace: Restoring Trust, Reshaping the Future यानि शांति के लिए एकजुट: भरोसा बहाल करने व भविष्य के पुनर्निर्माण के लिए। इसमें दुनिया भर से प्रतिनिधिमंडल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से लेकर खेलकूद जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे कि नवीनतम तरीकों को किस तरह शांति के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।
इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के राजदूतों एवं प्रतिनिधियों के साथ-साथ, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस भी हिस्सा लेंगे और विविध विषयों पर पैनल चर्चाओं में विचार-विमर्श करेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य, वर्तमान में मौजूद सर्वाधिक गंभीर मुद्दों पर बदलाव लाने के लिए सामूहिक इच्छाशक्ति प्रेरित करना है।
भावी पीढ़ियों के विचार
इस वैश्विक सभा का एक अन्य आकर्षण होगा, पहले दिन आयोजित किया जाने वाला युवा मंच, जिसमें दुनिया भर के युवजन के लिए व उनके द्वारा, अतिरिक्त कार्यक्रम होंगे। पिछले वर्ष के युवा मंच में 1,000 प्रतिभागी शामिल हुए थे। इस वर्ष, इसमें युवजन के लिए A Tent-tastic Get-together for Youth तथा अन्य कई गतिविधियां शामिल होंगी।
अगली पीढ़ियों को सम्मान देने के लिए, सोमवार शाम एक समारोह में, प्रवासन, विविधता और सामाजिक समावेशन पर PLURAL+ युवा वीडियो महोत्सव में, युवा निर्देशकों को सम्मानित किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र सभ्यता गठबन्धन और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) की एक संयुक्त पहल, PLURAL+ में, दुनिया के युवजन को इन तीन विषयों पर आधारित, मूल, रचनात्मक वीडियो प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया है।
ऐसी दुनिया, जहां असहिष्णुता और सांस्कृतिक एवं धार्मिक विभाजन आम होते जा रहे हैं, PLURAL+ कार्यक्रम में, युवजन को सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के शक्तिशाली कारक के तौर पर मान्यता देने के प्रयास किए गए हैं। इस वर्ष महोत्सव में, अफगानिस्तान और इस्राइल से लेकर, रूस व यमन तक 21 देशों की 32 लघु फिल्मों का चयन किया गया है।
नए अंतर-सांस्कृतिक नवाचार
सामाजिक परिवर्तन के लिए सामाजिक सर्कस। बच्चों द्वारा बच्चों के अनुकूल शहरों का डिज़ाइन। शांति के लिए फुटबॉल। ये हैं, दुनिया भर में जमीनी स्तर पर काम करने वाले समूहों की 1,800 से अधिक प्रविष्टियों में से कुछ-एक, जिन्होंने अंतर-सांस्कृतिक नवाचार केन्द्र की प्रतियोगिता में भाग लिया है।
वैश्विक मंच के दूसरे दिन हुए एक समारोह में, ऑस्ट्रिया, बोत्सवाना, कनाडा, भारत, इंडोनेशिया, केन्या, नाइजीरिया, पेरू, संयुक्त राज्य अमेरिका और जाम्बिया जैसे देशों से चुनी गई कुछ विशिष्ट प्रविष्टियों को पुरस्कृत किया जाएगा।
यह प्रतियोगिता, वैश्विक सभ्यताओं के गठबन्धन और निजी क्षेत्र की कार बनाने वाली दिग्गज कंपनी, बीएमडब्ल्यू समूह द्वारा सह-प्रायोजित है, और तकनीकी कम्पनी एक्सेंचर से समर्थन प्राप्त है। इसमें, सामाजिक परिवर्तन के लिए विविधता एवं समावेशन, लैंगिक समानता तथा कला, संस्कृति व खेल-कूद को बढ़ावा देने के लिए नवीन परियोजनाओं पर विचार किया गया है।
संगीत की शक्ति
इस्राइल-फलस्तीनी टकराव दशकों से जारी है, जो अक्सर गाजा में चल रहे युद्ध की तरह, कभी-कभी उग्र रूप ले लेता है. इस टकराव का हल निकालने के वैकल्पिक तरीक़ों के बारे में दो पियानोवादकों - इसराइली कंडक्टर डैनियल बरेनबोइम और दिवंगत फलस्तीनी लेखक एडवर्ड सईद के बीच शुरू हुई बातचीत ने, 1999 में ‘पश्चिम-पूर्वी दीवान समूह’ का रूप ले लिया।
लंबे समय से दोस्त रहे इन दोनों लोगों ने अपने अनुभव का उपयोग करते हुए, युवा संगीतकारों के लिए एक कार्यशाला शुरू की। मार्च 2023 में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक प्रदर्शन से ठीक पहले वायलिन वादक माइकल बरेनबोइम ने कहा, "हमारे साथ ऐसे देशों के संगीतकार जुड़े हैं, जो किसी न किसी तरह से एक-दूसरे के साथ संघर्षरत हैं।"
"इसके जरिए हम यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि ऐसी परियोजना के साथ जुड़कर, उन देशों के लोगों को एकजुट करना संभव होता है, जो परस्पर संघर्षरत हैं, ताकि वे एक आम लक्ष्य के लिए साथ मिलकर काम कर सकें।" यहां तक कि गाजा में युद्ध जारी रहने के बावजूद, यह समूह आपस में जुड़ा हुआ है और इस महीने अपनी 25वीं वर्षगांठ मनाने के लिए यूरोप में संगीत आयोजन कर रहा है।
उनके मुताबिक़, “पहली कार्यशाला से इस मील के पत्थर तक पहुंचने का इस ऑर्केस्ट्रा का सफ़र, संगीत के ज़रिए संवाद एवं एकजुटता को बढ़ावा देने का उनका लक्ष्य उजागर करता है।”
(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)
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मानवता के लिए गठबंधन
यूएन वैश्विक सभ्यताओं के गठबंधन का बरसों से यही सिद्धांत रहा है: अनगिनत संस्कृतियां, एक मानवता। इस सिद्धांत के आधार पर, सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक बहुलवाद व पारस्परिक सम्मान को अपनाने व प्रोत्साहन देने के लिए, तत्कालीन यूएन महासचिव, कोफी अन्नान ने 2005 में इसकी आधारशिला रखी थी।
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वैश्विक सभ्यताओं का गठबंधन (UN Alliance of Civilizations), लगभग दो दशकों से, इस सिद्धांत पर पूर्ण रूप से अमल करता रहा है। इस गठबंधन से इस्राइली और फलस्तीनी संगीतकारों का एक समूह जुड़ा है, जो शरणार्थियों को निशाना बनाती नफरत से निपटने के लिए करने के लिए संगोष्ठियों का आयोजन करते हैं, और दुनियाभर में अंतर-धार्मिक संवादों में शामिल होने जैसी गतिविधियों में भाग लेते हैं।
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इसके तहत, विश्वभर में व्याप्त, विभाजन को पाटने, मतभेदों को दूर करने तथा स्थानीय व वैश्विक स्तर पर कूटनीति के जरिए, अधिक शान्तिपूर्ण, समावेशी भविष्य को आकार देने में मदद की जाती है। यही वो मूल्य हैं, जो सितंबर में न्यूयॉर्क में आयोजित भविष्य के शिखर सम्मेलन में अपनाए गए, भविष्य के लिए समझौते का भी हिस्सा बने हैं, और सतत विकास के 2030 एजेंडा के 17 लक्ष्यों में निहित हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का कहना है, "यह गठबंधन केवल 'अच्छा महसूस करने के लिए' की गई एक पहल भर नहीं है। हम शांति, सुरक्षा, सतत विकास और जैसे विश्व का जो निर्माण करना चाहते है, यह उसकी स्थापना का मूल आधार है।"
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से खेलकूद तक
वैश्विक सभ्यताओं का यह गठबंधन, वैश्विक स्तर पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता है जो एक सुरक्षित सभा स्थल के रूप में काम करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में 130 से अधिक देशों के हजारों प्रतिनिधि, इन आयोजनों में नवीनतम चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए है और भविष्य के लिए समाधानों पर सहमति बनाने में सफल हुए हैं। जब नागरिक समाज और सरकारों के प्रतिभागी एक साथ मिलकर, अशांति के इस दौर में परस्पर साझा मूल्यों का जश्न मनाते हैं, तो लोगों के दिलों में उम्मीद की किरण जागती है।
पुर्तगाल के कास्केस शहर में सोमवार को, इस गठबन्धन का 10वां मंच आरंभ हुआ है, जिसकी थीम है, Uniting in Peace: Restoring Trust, Reshaping the Future यानि शांति के लिए एकजुट: भरोसा बहाल करने व भविष्य के पुनर्निर्माण के लिए। इसमें दुनिया भर से प्रतिनिधिमंडल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से लेकर खेलकूद जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे कि नवीनतम तरीकों को किस तरह शांति के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।
इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के राजदूतों एवं प्रतिनिधियों के साथ-साथ, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस भी हिस्सा लेंगे और विविध विषयों पर पैनल चर्चाओं में विचार-विमर्श करेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य, वर्तमान में मौजूद सर्वाधिक गंभीर मुद्दों पर बदलाव लाने के लिए सामूहिक इच्छाशक्ति प्रेरित करना है।
भावी पीढ़ियों के विचार
इस वैश्विक सभा का एक अन्य आकर्षण होगा, पहले दिन आयोजित किया जाने वाला युवा मंच, जिसमें दुनिया भर के युवजन के लिए व उनके द्वारा, अतिरिक्त कार्यक्रम होंगे। पिछले वर्ष के युवा मंच में 1,000 प्रतिभागी शामिल हुए थे। इस वर्ष, इसमें युवजन के लिए A Tent-tastic Get-together for Youth तथा अन्य कई गतिविधियां शामिल होंगी।
अगली पीढ़ियों को सम्मान देने के लिए, सोमवार शाम एक समारोह में, प्रवासन, विविधता और सामाजिक समावेशन पर PLURAL+ युवा वीडियो महोत्सव में, युवा निर्देशकों को सम्मानित किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र सभ्यता गठबन्धन और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) की एक संयुक्त पहल, PLURAL+ में, दुनिया के युवजन को इन तीन विषयों पर आधारित, मूल, रचनात्मक वीडियो प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया है।
ऐसी दुनिया, जहां असहिष्णुता और सांस्कृतिक एवं धार्मिक विभाजन आम होते जा रहे हैं, PLURAL+ कार्यक्रम में, युवजन को सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के शक्तिशाली कारक के तौर पर मान्यता देने के प्रयास किए गए हैं। इस वर्ष महोत्सव में, अफगानिस्तान और इस्राइल से लेकर, रूस व यमन तक 21 देशों की 32 लघु फिल्मों का चयन किया गया है।
नए अंतर-सांस्कृतिक नवाचार
सामाजिक परिवर्तन के लिए सामाजिक सर्कस। बच्चों द्वारा बच्चों के अनुकूल शहरों का डिज़ाइन। शांति के लिए फुटबॉल। ये हैं, दुनिया भर में जमीनी स्तर पर काम करने वाले समूहों की 1,800 से अधिक प्रविष्टियों में से कुछ-एक, जिन्होंने अंतर-सांस्कृतिक नवाचार केन्द्र की प्रतियोगिता में भाग लिया है।
वैश्विक मंच के दूसरे दिन हुए एक समारोह में, ऑस्ट्रिया, बोत्सवाना, कनाडा, भारत, इंडोनेशिया, केन्या, नाइजीरिया, पेरू, संयुक्त राज्य अमेरिका और जाम्बिया जैसे देशों से चुनी गई कुछ विशिष्ट प्रविष्टियों को पुरस्कृत किया जाएगा।
यह प्रतियोगिता, वैश्विक सभ्यताओं के गठबन्धन और निजी क्षेत्र की कार बनाने वाली दिग्गज कंपनी, बीएमडब्ल्यू समूह द्वारा सह-प्रायोजित है, और तकनीकी कम्पनी एक्सेंचर से समर्थन प्राप्त है। इसमें, सामाजिक परिवर्तन के लिए विविधता एवं समावेशन, लैंगिक समानता तथा कला, संस्कृति व खेल-कूद को बढ़ावा देने के लिए नवीन परियोजनाओं पर विचार किया गया है।
संगीत की शक्ति
इस्राइल-फलस्तीनी टकराव दशकों से जारी है, जो अक्सर गाजा में चल रहे युद्ध की तरह, कभी-कभी उग्र रूप ले लेता है. इस टकराव का हल निकालने के वैकल्पिक तरीक़ों के बारे में दो पियानोवादकों - इसराइली कंडक्टर डैनियल बरेनबोइम और दिवंगत फलस्तीनी लेखक एडवर्ड सईद के बीच शुरू हुई बातचीत ने, 1999 में ‘पश्चिम-पूर्वी दीवान समूह’ का रूप ले लिया।
लंबे समय से दोस्त रहे इन दोनों लोगों ने अपने अनुभव का उपयोग करते हुए, युवा संगीतकारों के लिए एक कार्यशाला शुरू की। मार्च 2023 में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक प्रदर्शन से ठीक पहले वायलिन वादक माइकल बरेनबोइम ने कहा, "हमारे साथ ऐसे देशों के संगीतकार जुड़े हैं, जो किसी न किसी तरह से एक-दूसरे के साथ संघर्षरत हैं।"
"इसके जरिए हम यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि ऐसी परियोजना के साथ जुड़कर, उन देशों के लोगों को एकजुट करना संभव होता है, जो परस्पर संघर्षरत हैं, ताकि वे एक आम लक्ष्य के लिए साथ मिलकर काम कर सकें।" यहां तक कि गाजा में युद्ध जारी रहने के बावजूद, यह समूह आपस में जुड़ा हुआ है और इस महीने अपनी 25वीं वर्षगांठ मनाने के लिए यूरोप में संगीत आयोजन कर रहा है।
उनके मुताबिक़, “पहली कार्यशाला से इस मील के पत्थर तक पहुंचने का इस ऑर्केस्ट्रा का सफ़र, संगीत के ज़रिए संवाद एवं एकजुटता को बढ़ावा देने का उनका लक्ष्य उजागर करता है।”
(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)