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जम्मू-कश्मीर पर फिर बिगड़े यूएन चीफ के बोल, कहा- भारत बंद करे पैलेट गन का इस्तेमाल

Wed, 17 Jun 2020 05:06 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 17 Jun 2020 05:06 AM IST
सार

  • एंटोनियो गुटेरस ने एक बार फिर विवादित मुद्दा छुआ है
  • गुटेरस ने जम्मू-कश्मीर में बच्चों की मौत पर चिंता जताई है
  • गुटेरस ने अपनी रिपोर्ट में नक्सलवादी हिंसा का भी संज्ञान लिया है

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UN general secretary antonio guterres says, India should stop using pellet guns against children
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस - फोटो : social media

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर कई बार भारत विरोधी रुख दिखा चुके यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरस ने एक बार फिर विवादित मुद्दा छुआ है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरस ने जम्मू-कश्मीर में बच्चों की मौत पर चिंता जताई है और भारत सरकार से उनके खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की अपील की है।

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यूएन ने सोमवार को ‘बच्चे और सैन्य संघर्ष’ विषय पर सालाना रिपोर्ट जारी की। इस दौरान उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर में बच्चों के हताहत होने को लेकर मैं चिंतित हूं और सरकार से मांग करता हूं कि वह बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाते हुए उनके खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल बंद कराए। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएन ने जनवरी से दिसंबर 2019 तक वैश्विक स्तर पर बच्चों के साथ 25 हजार से ज्यादा जघन्य अपराध होने की पुष्टि की है।
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रिपोर्ट में भारत में भी एक साल में 17 साल के आठ बच्चों की हत्या और सात के गंभीर रूप से अपंग होने का सत्यापन यूएन ने किया है। इनमें 13 लड़के और 2 लड़कियां शामिल हैं। ये बच्चे सीआरपीएफ, भारतीय सेना (राष्ट्रीय राइफल) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त अभियान, लश्कर-ए-ताइबा, अज्ञात सशस्त्र संगठनों की हिंसा या फिर नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी के दौरान शिकार बन हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएन ने जम्मू-कश्मीर में अज्ञात तत्वों द्वारा 9 स्कूलों पर हमले का भी सत्यापन किया है।
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गुटेरस ने कहा, मैं बच्चों को हिरासत में लेने, रात में छापेमारी के दौरान गिरफ्तार करने, सेना के शिविरों में नजरबंदी, हिरासत के बाद प्रताड़ित या बिना किसी आरोप के प्रताड़ित करने को लेकर भी चिंतित हूं। मैं सरकार से अपील करता हूं कि वह तत्काल इस पर रोक लगाए। हालांकि गुटेरस ने यह भी कहा कि भारत सरकार ने हिरासत में लिए गए कुछ बच्चों की उम्र का सत्यापन किया है और मैं अपील करता हूं कि इसे एक तय प्रणाली का हिस्सा बनाया जाए।

यूएन महासचिव की तरफ से उनकी विशेष यूएन प्रतिनिधि (बच्चे व सैन्य संघर्ष) वर्जीनिया गाम्बा ने यह रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंताजनक हालात यमन, माली, केंद्रीय अफ्रीकी रिपब्लिक (सीएआर), इस्राइल, फलस्तीन और सीरिया में बताए गए हैं। हालांकि मानवाधिकार समूहों ने यमन में 2019 में स्कूलाें और अस्पतालों पर 4 हमलों और 222 बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन का नाम रिपोर्ट की बच्चों के खिलाफ अपराध करने वाले देशों व संगठनों वाली ‘लिस्ट ऑफ शेम’ से हटाने के लिए गुटेरस की जबरदस्त आलोचना की है।  

नक्सली क्षेत्रों में भारतीय कार्रवाई की प्रशंसा

गुटेरस ने अपनी रिपोर्ट में नक्सलवादी हिंसा का भी संज्ञान लिया है और कहा है कि भारत सरकार के प्रयासों से इन संगठनों में बच्चाें को भर्ती करने, उनकी हत्या करने और अपंग बनाने की घटनाओं में कमी आई है। हालांकि उन्होंने खासतौर पर छत्तीसगढ़ और झारखंड में नक्सली संगठनों के चलते बच्चों तक शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं के नहीं पहुंचने पर चिंता जताई। उन्होंने  10 बच्चों को नक्सली विद्रोही समूहों के चंगुल से छुड़ाने के भारतीय पुलिस के प्रयासों की भी सराहना की।

  • भारत जता चुका है रिपोर्ट पर पहले ही निराशा

भारत ने 2019 में बच्चे व सैन्य संघर्ष विषय पर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की रिपोर्ट पर गहरी निराशा जताई थी। भारत के एक वरिष्ठ राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र में पिछले साल अगस्त में रिपोर्ट पर निराशा जताते हुए कहा था कि तय हालात में अपनी समझ से राय बनाना एजेंडे को सिर्फ राजनीतिक रंग देता है। इसमें उन ऐसी परिस्थितियों को शामिल किया गया है, जो सशस्त्र संघर्ष या अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरे वाली नहीं हैं।

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